माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य किशन दा की मौत!

Updated at : 22 Jan 2017 4:50 AM (IST)
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माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य किशन दा की मौत!

कोल्हान फॉरेस्ट डिवीजन व सारंडा की सीमा पर बीमारी से मौत की सूचना, पुष्टि नहीं झारखंड सरकार ने रखा है एक करोड़ का इनाम, ओड़िशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सरकार ने भी घोषित किया है पुरस्कार चाईबासा/किरीबुरू : माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य किशन दा उर्फ प्रशांत बोस का लगभग 70 वर्ष की […]

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कोल्हान फॉरेस्ट डिवीजन व सारंडा की सीमा पर बीमारी से मौत की सूचना, पुष्टि नहीं

झारखंड सरकार ने रखा है एक करोड़ का इनाम, ओड़िशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सरकार ने भी घोषित किया है पुरस्कार
चाईबासा/किरीबुरू : माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य किशन दा उर्फ प्रशांत बोस का लगभग 70 वर्ष की उम्र में बीमारी के कारण मौत हो जाने की सूचना है. शनिवार को इस खबर के सामने आने के बाद पुलिस महकमा सतर्क हो गया. अपने गुप्तचरों के माध्यम से पुलिस देर शाम तक खबर की पुष्टि में लगी रही. हालांकि देर शाम तक इसकी पुष्टि नहीं हो पायी थी.
विभिन्न सूत्रों से प्राप्त अब तक की सूचना के अनुसार किशन दा लंबे समय से बीमार था और जड़ी-बूटी से कोल्हान फॉरेस्ट डिवीजन और सारंडा की सीमा पर जेटिया थाना अंतर्गत किसी स्थान पर साथियों द्वारा उनका इलाज किया जा रहा था. मिली जानकारी के अनुसार, निधन के बाद माओवादी साथियों द्वारा उन्हें सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किये जाने की तैयारी की जा रही है. उधर, पुलिस सूत्रों का कहना है कि किशन दा की मौत की खबर कहां से आयी है यह साफ नहीं हो पाया है.
यह भी साफ नहीं है कि किशन दा इन दिनों सारंडा के जंगलों में ही था. हालांकि बरसात के समय ओड़िशा के सुंदरगढ़ जिला अंतर्गत गुरुंडिया पुलिस थाने के जंगलों में माओवादियों के साथ पुलिस की दो बार मुठभेड़ हुई थी. ओड़िशा पुलिस ने झारखंड पुलिस को सूचना दी थी कि किशन दा का ट्रूप ब्राह्मणी नदी पार कर झारखंड आ सकता है. उस समय झारखंड पुलिस ने किशन दा को पकड़ने के लिये ओड़िशा से सटे सारंडा के जंगलों में 15 दिनों तक कैंप भी किया था. लेकिन झारखंड पुलिस को कोई कामयाबी नहीं मिली थी.
भाकपा माओवादी का उपमहासचिव था किशन दा. पुलिस सूत्रों के मुताबिक किशन दा के कई नाम थे, हालांकि उसका वास्तविक नाम प्रशांत बोस है. इसके अलावा वह मनीष दा उर्फ निर्भय उर्फ काजल उर्फ महेश के रुप में भी जाना जाता था. किशन दा मूल रुप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला था. एमसीपीआइ के सदस्य रहे किशन दा पोलित ब्यूरो सदस्य भी के साथ-साथ पार्टी का उपमहासचिव भी था. ईआरबी और बीजेसेक का सचिव भी था. पुलिस सूत्रों के मुताबिक किशन दा 5.6 इंच लंबा और रंग गोरा था. दुबले-पतले शरीर वाला किशन दा चेहरे पर फ्रेंच कट सफेद दाढ़ी रखता था. किशन दा मोटे फ्रेम का चश्मा पहनता था. चोट के कारण उनका जबड़ा टेड़ा हो चुका था
और वह नकली दांत का इस्तेमाल करता था.
सुरक्षा में तैनात रहते थे तीन हथियारबंद अंगरक्षक. पोलित ब्यूरो सदस्य होने के कारण किशन दा पर कई राज्यों ने इनाम रखे हुए थे. झारखंड सरकार ने उस पर एक करोड़ रुपये, ओड़िशा सरकार ने 30 लाख रुपये, आंध्र प्रदेश की सरकार ने 15 लाख रुपये, छत्तीसगढ़ की सरकार ने 7 लाख रुपये व महाराष्ट्र सरकार ने 30 हजार रुपये इनाम घोषित कर रखा है. किशन दा हमेशा भारी सुरक्षा में रहता था. 9 एमएम की पिस्टल रखने वाले किशन दा की सुरक्षा में हमेशा तीन हथियारबंद अंगरक्षक तैनात रहते थे.
माओवादियों के पोलित ब्यूरो सदस्य किसान दा उर्फ प्रशांत बोस के निधन की खबर आ रही है. हम इसकी पुष्टि करने का प्रयास कर रहे हैं.
अनिश गुप्ता, एसपी पश्चिम सिंहभूम
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