तेल कंपनियों पर 'जंग' की मार: पेट्रोल पर ₹24 और डीजल पर ₹104 का घाटा, फिर भी दाम नहीं बढ़े

Updated at : 02 Apr 2026 5:12 PM (IST)
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Crude Oil-Gas Price

वो 3 बड़े कारण, जिन्होंने भारत को बचाया (फोटो/Canva)

Govt holds pump prices steady: कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार होने से भारतीय तेल कंपनियों को पेट्रोल पर ₹24 और डीजल पर ₹104 प्रति लीटर का घाटा हो रहा है. जानिए क्यों सरकार ने नहीं बढ़ाए दाम और देश में तेल का कितना स्टॉक बचा है.

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Govt holds pump prices steady: दुनियाभर में जारी तनाव और मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग ने कच्चे तेल (Crude Oil) के बाजार में हड़कंप मचा दिया है. जो कच्चा तेल कुछ समय पहले 65 डॉलर प्रति बैरल पर था, वह अब 100 डॉलर के पार निकल गया है. आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए सरकार ने खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन पर्दे के पीछे भारतीय तेल कंपनियां हर लीटर तेल की बिक्री पर भारी नुकसान झेल रही हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, यह घाटा अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है.

कंपनियों को कितना नुकसान?

पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागत बढ़ने के बावजूद घरेलू बाजार में कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं. इसका नतीजा यह है.

  • पेट्रोल पर घाटा: तेल कंपनियां हर लीटर पेट्रोल बेचने पर ₹24 का नुकसान उठा रही हैं.
  • डीजल पर घाटा: डीजल पर स्थिति और भी गंभीर है, यहां प्रति लीटर ₹104 का घाटा (Under-recovery) हो रहा है.

कीमतें क्यों नहीं बढ़ीं?

सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है और तेल कंपनियों को इस बढ़ते बोझ का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन करने का निर्देश दिया है, ताकि आम आदमी की जेब पर सीधा असर न पड़े.

क्या देश में तेल खत्म हो जाएगा?

जंग के माहौल में अक्सर तेल की किल्लत की अफवाहें उड़ने लगती हैं, लेकिन मंत्रालय ने साफ किया है कि घबराने की जरूरत नहीं है.

  • 60 दिनों का स्टॉक: भारत ने अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति सुरक्षित कर ली है. देश के पास पर्याप्त इन्वेंट्री मौजूद है.
  • रिफाइनरियां फुल कैपेसिटी पर: देश की सभी रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता (Maximum Capacity) के साथ काम कर रही हैं.
  • सल्फर की कमी नहीं: रिफाइनिंग प्रक्रिया के दौरान निकलने वाले सल्फर की भी कोई कमी नहीं है, जिससे उद्योगों को मदद मिल रही है.

नेचुरल गैस और PNG पर बड़ा दांव

  • सरकार अब एलपीजी (LPG) के बजाय पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है.
  • 100% सप्लाई की गारंटी: घरेलू उपभोक्ताओं को नेचुरल गैस की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी.
  • PNG को बढ़ावा: अगर राज्य सरकारें ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के जरिए PNG के बुनियादी ढांचे को बढ़ाती हैं, तो उन्हें 10% अतिरिक्त कमर्शियल एलपीजी का कोटा दिया जाएगा.
स्थितिकच्चा तेल (Brent Crude)पेट्रोल पर घाटा (प्रति लीटर)डीजल पर घाटा (प्रति लीटर)
जंग से पहले~$65 प्रति बैरल₹0₹0
मौजूदा स्थिति$100+ प्रति बैरल₹24₹104

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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