नक्सलियों द्वारा पूर्व सहयोगी और छात्र की हत्या का मामला
Updated at : 16 Jan 2017 5:17 AM (IST)
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गोइलकेरा : जिदन व सुरेश जिस ओर भाग रहे थे, उधर मैदानी इलाका था. उन्हें रोकने के लिए माओवादियों ने पहले उनके पैरों में गोली मारी. दोनों गिर पड़े थे तो उन्हें उठाकर बीच सड़क पर ले आये. माओवादियों ने घायल सुरेश पर ताबातोड़ गोलियां दाग दीं. उसे 12 गोलियां मारी गयीं. वहीं जीदन को […]
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गोइलकेरा : जिदन व सुरेश जिस ओर भाग रहे थे, उधर मैदानी इलाका था. उन्हें रोकने के लिए माओवादियों ने पहले उनके पैरों में गोली मारी. दोनों गिर पड़े थे तो उन्हें उठाकर बीच सड़क पर ले आये. माओवादियों ने घायल सुरेश पर ताबातोड़ गोलियां दाग दीं. उसे 12 गोलियां मारी गयीं. वहीं जीदन को दो गोलियां मारी गयीं. दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी. घटना के बाद अपराधी उसकी बाइक लेकर भाग निकले. गोइलकेरा थाने में मृतक के भाई मसी भुइयां ने देर रात पहुंचकर घटना की सूचना दी थी.
माराश्रम गांव के पास सड़क पर हथियारबंद लोगों ने घेरा : तीनों बाइक से माराश्रम गांव के पास पहुंचे थे कि करीब आठ की संख्या में हथियारबंध लोगों ने बीच रास्ते पर उन्हें रोक लिया. इससे बाइक छोड़कर तीनों भागने लगे. सुरेश व जिदन सड़क की एक ओर और मसी विपरीत दिशा में भागने लगा. तीनों को भागते देख माओवादियों ने उनपर फायरिंग शुरू की. मसी इस दौरान झाड़ियों में छिपकर से भाग गया.
माओवादियों के सहयोग का आरोपी था सुरेश
सुरेश भुइयां गुदड़ी के सिदमा क्षेत्र का रहने वाला था. फिलहाल वह सोनुवा के मधुपुर गांव में रहता था. उसे वर्ष 2015 में पुलिस ने सोनुवा थाने में डकैती की योजना बनाने के मामले में हथियार के साथ गिरफ्तार किया था. इसमें वह जेल भी जा चुका था. उसपर माओवादियों के सहयोगी होने का आरोप भी था.
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