जेएसएलपीएस से जुड़ कर आत्मनिर्भर बनीं बिरसमुनी देवी

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 19 May 2026 9:54 PM

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हार्डनिंग सेंटर और मुर्गी पालन व्यवसाय से ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणास्रोत

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सिमडेगा. झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) की योजनाओं और आजीविका कार्यक्रमों से जुड़ कर बानो प्रखंड के कानारोवा गांव की बिरसमुनी देवी आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. कभी सामान्य ग्रामीण महिला के रूप में जीवन यापन करने वाली बिरसमुनी देवी आज हार्डनिंग सेंटर संचालन और मुर्गी पालन व्यवसाय के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त होकर अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं. बिरसमुनी देवी ने वर्ष 2015 में प्यारी आजीविका महिला समूह से जुड़ कर अपने सामाजिक और आर्थिक सफर की शुरुआत की. समूह में सचिव पद की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने महिलाओं को संगठित करने और समूह की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. इसके बाद वर्ष 2016 में उनका चयन कृषि सखी के रूप में हुआ. इस दौरान उन्हें विभाग की ओर से मुर्गी पालन का प्रशिक्षण दिया गया, जिसने उनके जीवन को नयी दिशा दी. प्रशिक्षण के बाद बिरसमुनी देवी ने जेएसएलपीएस के सहयोग से हार्डनिंग सेंटर में मुर्गियों के रख-रखाव, चूजा प्रबंधन और पोषण संबंधी विस्तृत जानकारी हासिल की. इसके आधार पर उन्होंने अपने गांव में हार्डनिंग सेंटर शुरू करने का निर्णय लिया. शुरुआत में उन्होंने आशील नस्ल के एक हजार चूजों को सेंटर में रखा. लगभग 20 से 30 दिनों तक पालन-पोषण करने के बाद चूजों की बिक्री से उन्हें करीब 10 हजार रुपये का मुनाफा हुआ. पहली सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ा दिया. पहली कमाई से उत्साहित होकर उन्होंने दोबारा चूजे मंगा कर व्यवसाय का विस्तार किया. दूसरी बार भी उन्हें अच्छा लाभ हुआ और धीरे-धीरे यह कार्य नियमित व्यवसाय बन गया. वर्तमान में वह वर्ष में चार बार हार्डनिंग सेंटर के माध्यम से चूजा पालन और बिक्री का कार्य कर रही हैं. केवल चूजा पालन तक सीमित न रह कर बिरसमुनी देवी ने मुर्गी दाना तैयार करने का काम भी शुरू किया. आज वह अपने गांव के साथ-साथ आसपास के अन्य हार्डनिंग सेंटरों में भी मुर्गी दाना की आपूर्ति कर रही हैं. चूजा पालन और मुर्गी दाना निर्माण व बिक्री से वह सालाना लगभग 50 से 60 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं. इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार व आत्मनिर्भरता की प्रेरणा मिली है. बिरसमुनी देवी का कहना है कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें नयी दिशा मिली. प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के कारण उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्राप्त हुआ. वह अपनी सफलता का श्रेय जेएसएलपीएस, आजीविका महिला समूह और प्रशिक्षण संस्थाओं को देती हैं. आज कानारोवा गांव में बिरसमुनी देवी की पहचान एक सफल और प्रगतिशील महिला किसान के रूप में हो रही है. उनकी मेहनत और लगन यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन कर समाज में नयी मिसाल कायम कर सकती हैं.

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