रामरेखाधाम महोत्सव के नाम पर राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण

Updated at : 28 Apr 2016 6:19 AM (IST)
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रामरेखाधाम महोत्सव के नाम पर राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण

सिमडेगा : 30 अप्रैल से आयोजित तीन दिवसीय रामरेखाधाम महोत्सव को लेकर विवाद उठ खड़े हुए हैं. कुछ लोगों का कहना है कि इस महोत्सव में सिर्फ बाहरी कलाकारों को आमंत्रित किया गया है और झारखंडी कलाकारों की उपेक्षा की जा रही है. कार्यक्रम को लेकर झारखंड कला से जुड़े लोगों ने एकजुट होकर इस […]

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सिमडेगा : 30 अप्रैल से आयोजित तीन दिवसीय रामरेखाधाम महोत्सव को लेकर विवाद उठ खड़े हुए हैं. कुछ लोगों का कहना है कि इस महोत्सव में सिर्फ बाहरी कलाकारों को आमंत्रित किया गया है और झारखंडी कलाकारों की उपेक्षा की जा रही है.
कार्यक्रम को लेकर झारखंड कला से जुड़े लोगों ने एकजुट होकर इस कार्यक्रम का विरोध करने का मन बनाया है. साथ ही विरोध स्वरूप मशाल जुलूस निकालने एवं काला बिल्ला लगाने का भी निर्णय लिया है. उक्त विवाद को लेकर ही शहरी क्षेत्र के लोगों ने अपनी प्रतिक्रयाएं दी हैं.
श्याम पथ निवासी श्यामलाल शर्मा ने कहा कि रामरेखाधाम महोत्सव के नाम पर राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण है. रामरेखाधाम पर सभी को आस्था है. रामरेखाधाम महोत्सव को जाति धर्म से उपर उठ कर देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि महोत्सव से रामरेखाधाम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी. राजेंद्र गुप्ता का कहना है कि उपायुक्त की पहल से जो कार्यक्रम हो रहा है, यह एक सराहनीय कदम है. इसमें बढ़ चढ़ कर भाग लेना चाहिए. कुछ लोग राजनीतिक स्वार्थ के लिए कार्यक्रम में विवाद खड़ा कर रहे हैं .
प्रशांत कुमार ने कहा कि अपने स्वार्थ के लिए कुछ लोक कार्यक्रम में रूकावट पैदा करना चाहते हैं और बड़े कलाकारों को सिमडेगा में आने से रोकना चाहते हैं.
बड़े कलाकारों के आने से रामरेखाधाम को पहचान मिलेगी. प्रदीप मित्तल का कहना है कि पूरे वर्ष स्थानीय एवं झारखंडी कलाकारों को मौका दिया जाता है, किंतु कभी-कभी बड़े कलाकारों को भी यहां लाया जाना चाहिए, ताकि सिमडेगा का नाम राष्ट्रीय स्तर पर हो सके. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का विरोध करना उचित नहीं है.
इस महोत्सव एवं रामरेखाधाम के विकास के बाद पर्यटक यहां आयेंगे, जिससे जनता को लाभ मिलेगा. कौशल राम सिंह देव ने कहा कि रामरेखा धाम भगवान रामचंद्र की सत्य की निशानी है. महोत्सव को जाति धर्म से उपर उठ कर मनाना चाहिए. प्रदीप शर्मा, प्रभात कुलुकेरिया, विनय कुमार एवं संजय केसरी आदि का कहना है कि कार्यक्रम का विरोध कतई भी नहीं होना चाहिए. झारखंडी कलाकारों को मौका देने की मांग जायज है, किंतु बाहर से आने वाले कलाकारों को रोकने की बात करना बिल्कुल गलत है.
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