सामाजिक कार्यकर्ता तारामणि साहू ने राशन डीलर से बदला लेने के लिए मौत को बनाया ‘भूख से मौत’ का मामला!
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Oct 2017 10:53 AM
रांची: सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड स्थित कारीमाटी गांव में 11 साल की संतोषी की मौत को एक सामाजिक कार्यकर्ता ने अपनी निजी दुश्मनी निकालने के लिए ‘भूख से मौत’ बना दिया! राज्य सरकार की एक एजेंसी की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है. सिमडेगा में संतोषी की कथित भूख से मौत की जांच […]
रांची: सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड स्थित कारीमाटी गांव में 11 साल की संतोषी की मौत को एक सामाजिक कार्यकर्ता ने अपनी निजी दुश्मनी निकालने के लिए ‘भूख से मौत’ बना दिया! राज्य सरकार की एक एजेंसी की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है. सिमडेगा में संतोषी की कथित भूख से मौत की जांच पर झारखंड से लेकर दिल्ली तक की सरकार हिल गयी.
राज्य सरकार ने अपना जांच दल भेजा, तो केंद्र सरकार ने भी जांच दल को सिमडेगा भेजा. डीसी ने जांच करवायी, सो अलग. कई एजेंसियों ने जांच की, तो मामले की एक-एक परत खुलने लगी. हालांकि, यह सच था कि राशन डीलर ने कई महीने से संतोषी के परिवार को अनाज नहीं दिया था, क्योंकि उसके परिवार का आधार कार्ड राशन कार्ड से लिंक नहीं हुआ था.
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लेकिन, एक एजेंसी की ताजा रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि एक सामाजिक कार्यकर्ता ने अपनी निजी शत्रुता निभाने के लिए संतोषी की मां को अपना मोहरा बनाया. रिपोर्ट में कहा गया है कि कारीमाटी के राशन डीलर भोला साहू और सामाजिक कार्यकर्ता चंदा देवी उर्फ तारामणि साहू के बीच पारिवारिक झगड़ा है. तारामणि साहू ने ही इस मामले को इतना तूल दिया.
एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि संतोषी की मौत कारामाटी गांव में एक सामान्य बात थी. गांव के लोगोंको भी पता था कि उसकी मौत बीमारी की वजह से हुई है. इसमें कहा गया है कि संतोषी की मौत के बाद तारामणि देवी ने मृतका की मां कोयली देवी से मुलाकात की. उसे सिखाया कि वह बयान दे कि उसकी बेटी की मौत राशन नहीं मिलने की वजह से हुई है.
कोयली को सिखाने के बाद तारामणि ने विपक्षी पार्टी के नेताओं के साथ मिलकर सोशल मीडिया पर सरकार और राशन डीलर के खिलाफ दुष्प्रचार शुरू कर दिया. रिपोर्ट में कहा गया है कि तारामणि राशन डीलर भोला साहू की भाभी है. भोला के ममेरे भाई से तारामणि की शादी हुई है.
भोला के एक भाई नितेंद्र प्रसाद के खिलाफ पंचायत समिति चुनाव में तारामणि खड़ी हुई थी. यह भी कहा गया है कि भोला पहले से तारामणि का विरोध करता रहा है. ऐसे में जब संतोषी की मौत हुई, तो तारामणि ने अपनी बेईज्जती का बदला लेने के लिए संतोषी की मां को मोहरा बनाया, ताकि भोला की डीलरशिप रद्द करायी जा सके.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उपायुक्त ने भी मामले की जांच की थी. इसमें डॉक्टर नारायण सिंह का बयान लिया गया था. डॉ सिंह ने कहा था कि विष्णु बड़ाईक के कहने पर संतोषी की मौत के दो दिन पहले वह संतोषी के घर गये थे. वहां मलेरिया किट से जांच के बाद मलेरिया का इंजेक्शन और टैबलेट दिया था. जांच में मृतक की मां कोयली देवी को भी मलेरिया निकला था.
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