पहाड़ों और जंगलों के बीच सेवा की मिसाल बनीं सरायकेला-खरसावां की नर्सेज

Seraikela News: अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस पर सरायकेला-खरसावां की नर्सों की समर्पण भरी सेवा की मिसाल सामने आई है. दुर्गम पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में एएनएम ज्योति कुसुम तिडु और उत्तरा महतो वर्षों से लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचा रही हैं. वहीं सदर अस्पताल की नर्स प्रमिला रॉबर्ट और बिंदिया कुजुर मरीजों की सेवा और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाकर मानवता की मिसाल पेश कर रही हैं.
सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
Seraikela News: 12 मई यह सिर्फ एक तारीख नहीं है. यह उन नर्सों को सम्मान देने का दिन है, जो दिन-रात अस्पतालों में मानवता की सेवा करती हैं. डॉक्टर इलाज की दिशा तय करता है लेकिन उस इलाज को धरातल पर लागू करने, मरीज को समय पर दवा देने, उसकी स्थिति पर नजर रखने, मानसिक सहारा देने और कई बार जीवन बचाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी नर्सिंग स्टाफ निभाता है. नर्स परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अस्पतालों में मरीजों की हर समय निस्वार्थ भाव से सेवा करती हैं. ग्रामीण क्षेत्र में नर्स दीदी बन जाती है और वही नर्स से लेकर डॉक्टर की भूमिका में रहती है. ग्रामीणों की हर छोटी छोटी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान नर्स ही करती है.
जोंबरो-कोमाय क्षेत्र के लोगों के लिए ‘डॉक्टर’ दीदी बन गई है एएनएम ज्योति
सरायकेला-खरसावां जिले के सीमावर्ती कुचाई प्रखंड के रालोहातु पंचायत कभी अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा है. यहां के कई गांव-टोला में आज भी सड़क और मोबाइल की कनेक्टिविटी से दूर हैं. क्षेत्र की भौगलिक स्थिति ही ऐसी है कि यहां पहुंचना भी अपने आप में एक चैलेंज है. इसी बीच अपने काम के लिए समर्पित नर्स (एएनएम) ज्योति कुसुम तिडु मुश्किल परिस्थितियों में भी यहां के लोगों तक सरकार के स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुंचा रही है. क्षेत्र के भोले भाले लोग एएनएम ज्योति कुसुम तिडु को प्यार से ‘डॉक्टर’ दीदी कह कर बुलाते है. नर्स (एएनएम) ज्योति कुसुम तिडु जोंबरो स्वास्थ्य उप केंद्र (एसएचसी) में पदस्थापित है और पिछले 18 सालों से यहां के ग्रामीण इलाकों में अपनी सेवाएं दे रही हैं.

गांवों में पैदल चल कर पहुंचा रही है स्वास्थ्य सेवा
44 साल की नर्स ज्योति कुसुम तिडु जोंबरो, कोमाय, लदुबेड़ा, कसराउली, सिकरंबा, डांगिल, कोर्रा गांव समेत इनके आस पास के टोलों के करीब पांच हजार से ग्रामीणों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचा रही हैं. जोंबरो, कोमाय और लदुबेड़ा तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क है, लेकिन कसराउली, सिकरंबा, डांगिल, कोर्रा गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है. घना जंगल, पहाड़ी और पथरीले रास्तों को पार करना पड़ता है. तब जाकर कहीं पाहाड़ियों की तलहटी तो, कहीं पाहाड़ियों की चोटी पर बसे छोटे-छोटे टोलों तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाती है. ज्योति बताती हैं कि पहले नदी में पुल नहीं था, तो बारिश के दिनों में काफी परेशानी होती थी. इसके बावजूद भी बरसात के दिनों में नदी पार कर लोगों तक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना होता था.
पेड़ के नीचे चलता है टीकाकरण समेत अन्य काम

एएनएम ज्योति बताती हैं कि कुचाई के जोंबरो में स्वास्थ्य उप केंद्र भवन नहीं है. कुछ महीने पहले ही स्वास्थ्य उप केंद्र के भवन का निर्माण काम शुरु हुआ है. ऐसे में टीकाकरण से लेकर सभी तरह के काम पेड़ के नीचे या फिर किसी अन्य भवन में किया जाता है. लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के साथ साथ स्वास्थ्य के लिए जागरूक भी करना होता है. गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी कराने के लिए करीब 35 किमी दूर कुचाई सीएचसी भेजना होता है. ज्योति बताती है कि लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में स्थानीय लोगों का भी भरपूर सहयोग और स्नेह मिलता है. इसी स्नेह के वजह से ही पिछले 18 सालों से उनकी सेवा में लगी हुई हैं.
18 वर्षों से अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही है एएनएम उत्तरा महतो

सरायकेला-खरसावां जिले की एएनएम दीदी उत्तरा महतो विगत 18 सालों से कुचाई के पुनिसीर-सियाडीह क्षेत्र में लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रही है. सियाडीह स्वास्थ्य उप केंद्र की जिम्मेदारी उत्तरा महतो के ऊपर है. एएनएम उत्तरा महतो कुचाई के सियाडीह, पतराडीह, पुनिसीर, गिलुवा, रोलाहातु, बावगुटू, तोरंबा जैसे क्षेत्रों में जाकर काम करती हैं. घने पाहाड़ियों की बीच बसे इन गांवों तक पहुंचने के लिए पक्की सड़कें है, लेकिन स्वास्थ्य उप केंद्रों में सुविधाओं का अभाव है. इसके बावजूद भी टीकाकरण से लेकर मरीजों के स्वास्थ्य की जांच समेत स्वास्थ्य विभाग के सभी तरह के योजनाओं का फायदा क्षेत्र के लोगों तक पहुंचाने के लिए उत्तरा महतो लगातार काम करती आ रही हैं. इसके लिए उत्तरा महतो को अपने घर खरसावां से 35 किमी (स्कूटी से) का सफर करना होता है. सुदूरवर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में एएनएम उत्तरा महतो महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. इन क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और प्राथमिक उपचार जैसी जरूरी सेवाएं सीधे ग्रामीणों के दरवाजे तक पहुंचा रही हैं.
सेवा के प्रति समर्पित रहती है नर्स प्रमिला

सरायकेला सदर अस्पताल की एएनएम नर्स प्रोमिला रॉबर्ट मरीजों की सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित रहती है. वे अपना परिवारिक जिम्मेदारी को निभा रही है और मरीजों का भी निस्वार्थ भाव से सेवा करती हैं. सरायकेला सदर अस्पताल में वह ईमरजेंसी वार्ड में उसकी ड्युटी रहती है. चाहे कोई दुर्घटना हो या गंभीर स्थिति में मरीजों को पहले ईमरजेंसी वार्ड में लाया जाता है. वह अपने व्यवहार के साथ साथ अपने सेवा और समर्पण से हमेशा मरीजों के आधा मर्ज को ही ठीक कर देती है. प्रमिला ने कहा कि कभी कभार मरीजों के परिजनों की डांट,फटकार, धमकी और आरोप की परवाह नहीं करते हुए अपना फर्ज निभाती हैं.
परिवार और अस्पताल में सामंजस्य बनाना ट्रैनिंग के दौरान सीखा

सदर अस्पताल सरायकेला के प्रसव कक्ष में तैनात नर्स बिंदिया कुजुर भी पूरी निष्ठा के साथ मरीजों की सेवा करती हैं. जब प्रसूति कक्ष में नई जिंदगी जन्म ले रही होती है उस समय वह पूरी निष्ठा के साथ गर्भवती महिला की सेवा करती हैं. बिंदिया ने कहा कि नर्सिंग प्रशिक्षण के दौरान ही परिवार और अस्पताल के बीच सामंजस्य बनाना सीखा है. एक नर्स का जीवन हमेशा दूसरों के लिए समर्पित रहता है. परिवार और बच्चे की जिम्मेदारी के साथ साथ अस्पताल के मरीजों की जिम्मेदारी एक साथ उठाना एक मुश्किल काम जरूर है. लेकिन नर्स हर दिन इस काम को निभाती है.
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By Sweta Vaidya
श्वेता वैद्य प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक साल से अधिक का अनुभव है. पिछले करीब दो महीनों से वे झारखंड बीट पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं. इस दौरान वे राज्य से जुड़ी ताजा खबरों, लोगों से जुड़े मुद्दे और जरूरी जानकारियों पर आधारित स्टोरीज तैयार कर रही हैं. इससे पहले उन्होंने लाइफस्टाइल बीट के लिए भी कंटेंट लिखा. इस बीट में उन्होंने रेसिपी, फैशन, ब्यूटी टिप्स, होम डेकोर, किचन टिप्स, गार्डनिंग टिप्स और लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन्स जैसे रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर रोचक और उपयोगी आर्टिकल लिखे. श्वेता की हर बार कोशिश यही रहती है कि बात आसान, साफ और सीधे तरीके से लोगों तक पहुंचे, जिससे कि हर कोई उसे बिना दिक्कत के समझ सके. कंटेंट राइटर के तौर पर उनका फोकस होता है कि कंटेंट सिंपल, रिलेटेबल और यूजर-फ्रेंडली हो.
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