सरायकेला में भीमखंदा की खूबसूरती खींचती है लोगों को अपनी ओर, पांडवों के साथ जुड़ी है यहां की कहानी

Published by : Sameer Oraon Updated At : 11 Dec 2024 8:25 PM

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राजनगर के भीमखंदा में स्थित मंदिर

Saraikela Picnic Spot: राजनगर का प्रमुख पिकनिक स्पॉट भीमखंदा की खूबसूरती लोगों को अपनी ओर खींचती है. पत्थरों पर भीम के पैरों के निशान के कारण इस जगह का नाम भीमखंदा पड़ा है.

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सरायकेला, शचिंद्र कुमार दाश: 2024 का साल खत्म होने को है. लोग अभी से ही 2025 के स्वागत की तैयारी में जुट गये हैं. इसी को देखते हुए सरायकेला-खरसावां जिला में पिकनिक का दौर शुरू हो चुका है. लोग अपने दोस्त सगे संबंधियों के साथ पिकनिक मनाने के लिए जिला के अलग-अलग लोकेशन पर पहुंच रहे हैं. जिले में कई ऐसे पिकनिक स्पॉट हैं जो लोगों को अपनी तरफ खींचती है. सरायकेला-खरसावां की नदियां, पहाड़, झरना के साथ साथ धार्मिक भी स्थल लोगों को खूब भा रही है. इन्हीं में से एक है राजनगर का प्रमुख पिकनिक स्पॉट भीमखंदा. मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव द्रौपदी के साथ एक दिन यहां रुके थे.

कैसे हुआ नामकरण

पत्थरों पर भीम के पैरों के निशान के कारण जगह का नाम भीमखंदा पड़ा. बोंबोगा नदी की कल-कल बहती धारा पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है. बोंबोंगा नदी के बीचों बीच भगवान शिव का मंदिर है. कहा जाता है कि द्वापर युग में पांडवों ने यहां पूजा की थी. यहां पिकनिक मनाने के लिए पहुंचने वाले सैलानी यहां पहले पूजा अर्चना करते हैं, इसके पश्चात ही पिकनिक मनाते हैं.

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कई गहन रहस्यों को समेटे हुए है भीमखंदा

सरायकेला का भीमखंदा खुद में कई गहन रहस्यों को समेटे हुए हैं. यहां महाभारत काल का विस्तृत उल्लेख मिलता है. गांव के बुजुर्ग और स्थानीय लोग इस स्थान पर पांडवों के ठहरने की बात करते हैं. मान्यता है कि पांडवों ने पत्थरों के बीच चूल्हा बनाया, जिस पर द्रौपदी ने खाना पकाया था.

भीम के पांव के निशान लोगों की कौतुहल बढ़ाता है

भीमखंदा में पत्थरों के बीच बना छोटा चूल्हा, भीम के पांव के निशान और शिलालेख लोगों की कौतुहल बढ़ाता है. हालांकि, पत्थरों पर किस लिपि में लिखा गया है, कोई इसे पढ़ नहीं पाया. रख-रखाव के अभाव में पत्थरों पर लिखे शब्द धीरे-धीरे मिटते जा रहे हैं. यहां एक पेड़ है, जिसे अर्जुन वृक्ष कहा जाता है. लोगों के मुताबिक, इसमें सालों से कोई परिवर्तन नहीं हुआ. वृक्ष में एक डाली से पांच टहनियां निकली हैं, जिन्हें पांडवों का प्रतीक माना जाता है. यहां एक जामुन का वृक्ष भी है. उसे भी काफी पुराना माना जाता है. भीमखंदा में जमशेदपुर व आसपास के लोग काफी संख्या में पिकनिक मनाने के लिए पहुंचते हैं. झारखंड सरकार इस स्थान को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही है.

कैसे पहुंचे

भीमखंदा जिला मुख्यालय सरायकेला से करीब 20 किमी दूर है. सड़क मार्ग से सरायकेला या राजनगर से यहां पहुंचा जा सकता है. चाईबासा-जमशेदपुर मार्ग पर राजनगर से करीब 15 किमी की दूरी पर यह स्थित है.

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लेखक के बारे में

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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