स्वस्थ हुए प्रभु जगन्नाथ, कल नेत्रोत्सव के बाद भक्तों को देंगे दर्शन, 27 को निकलेगी रथ यात्रा

हरिभंजा का जगन्नाथ मंदिर
Rath Yatra : कल गुरुवार को प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा का नेत्रोत्सव पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया जायेगा. नेत्रदान के बाद भक्तों को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा के नवयौवन रुप के दर्शन होंगे. धार्मिक मान्यता है कि नेत्र उत्सव में प्रभु के अलौकिक रुप के दर्शन मात्र से पुण्य मिलता है.
Rath Yatra | सरायकेला-खरसावां, शचिंद्र कुमार दाश: कल गुरुवार को प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा का नेत्रोत्सव पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया जायेगा. 15 दिनों के बाद गुरुवार को सरायकेला, खरसावां, हरिभंजा, सीनी समेत क्षेत्र के करीब एक दर्जन मंदिरों के पट खुलेंगे. नेत्रदान के बाद भक्तों को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा के नवयौवन रुप के दर्शन होंगे.
सरायकेला व खरसावां में रात को होगा नेत्रोत्सव
हरिभंजा के जगन्नाथ मंदिर में कल गुरुवार की दोपहर, जबकि सरायकेला व खरसावां में गुरुवार की रात नेत्रोत्सव होगा. इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा अर्चना की जायेगी. नेत्रोत्सव के पश्चात भंडारे का भी आयोजन होगा, जिसमें भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया जायेगा.
प्रभु के अलौकिक रुप के दर्शन मात्र से मिलता है पुण्य
धार्मिक मान्यता है कि नेत्र उत्सव में प्रभु के अलौकिक रुप के दर्शन मात्र से पुण्य मिलता है. सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार स्नान पुर्णिमा (11 जून ) के दिन अत्याधिक स्नान से प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा बीमार हो जाते हैं. इस दौरान, भगवान जगन्नाथ, उनके भाई-बहन भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की मूर्तियों को सार्वजनिक दृश्य से दूर रखा जाता है. कहा जाता है भगवान बुखार से पीड़ित हो जाते हैं और 15 दिनों के लिए एकांतवास में चले जाते हैं.
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एकांतवास के दौरान प्रभु का होता है उपचार
15 दिनों का यह एकांतवास काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि एकांतवास के दौरान देवता एक विशेष आहार और औषधीय जड़ी-बूटियों द्वारा आराम और स्वास्थ्य लाभ की अवधि से गुजरते हैं. मंदिर के अणसर गृह में देशी नुस्खों के साथ भगवान का उपचार किया जाता है. अलग-अलग प्रकार की जड़ी-बूटियों से दवा तैयार की जाती है.
27 जून को निकलेगी रथ यात्रा
अब प्रभु जगन्नाथ स्वस्थ्य हो गये है. इस दौरान अणसर गृह में ही मूर्तियों की रंगाई-पुताई की गयी है. नेत्र उत्सव के दिन भगवान पूरी तरह से स्वस्थ हो कर भक्तों को दर्शन देंगे. नेत्र उत्सव के एक दिन बाद 27 जून को प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र व देवी सुभद्रा रथ पर सवार हो कर गुंडिचा मंदिर के लिये प्रस्थान करेंगे. मौके पर भक्तों में प्रसाद का वितरण भी किया जायेगा. जिला में करीब एक दर्जन स्थानों पर रथ यात्रा का आयोजन किया जा रहा है.
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By Dipali Kumari
नमस्कार! मैं दीपाली कुमारी, एक समर्पित पत्रकार हूं और पिछले 3 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत हूं, जहां झारखंड राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक, राजनीतिक और जन सरोकार के मुद्दों पर आधारित खबरें लिखती हूं. इससे पूर्व दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट सहित अन्य प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों के साथ भी कार्य करने का अनुभव है.
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