इंस्टिट्यूट फॉर एजुकेशन पहुंचे पूर्व सांसद प्रो राकेश सिन्हा, जीएसटी 2.0 का बताया उद्देश्य

सरायकेला के इंस्टिट्यूट फॉर एजुकेशन में पूर्व सांसद प्रो राकेश सिन्हा (बीच में). फोटो: प्रभात खबर
Seraikela News: सरायकेला में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में पूर्व सांसद राकेश सिन्हा ने जीएसटी 2.0 के उद्देश्य और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा की. विशेषज्ञों ने ग्रामीण-शहरी आजीविका, रोजगार और शिक्षा पर विचार साझा किए. सम्मेलन में शोध पत्र, जर्नल विमोचन और सरकारी योजनाओं पर भी विस्तृत जानकारी दी गई. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
Seraikela News: झारखंड के सरायकेला के दुगनी स्थित इंस्टिट्यूट फॉर एजुकेशन में ‘जीएसटी सुधारों एवं ग्रामीण व शहरी आजीविका और रोजगार पर प्रभाव’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस शनिवार को समापन हुआ. नई दिल्ली के इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (आईसीएसएसआर) के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भाग लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए. मुख्य अतिथि के रुप में मौजूद पूर्व राज्यसभा सांसद प्रो राकेश सिन्हा ने जीएसटी सुधारों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए 1968 तक के विभिन्न आर्थिक सुधारों की चर्चा की.
अर्थव्यवस्था का आधार बना जीएसटी
पूर्व सांसद राकेश सिन्हा कहा कि जीएसटी देश की अर्थव्यवस्था का आधार बन चुका है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वस्तुओं को दो श्रेणियों- मेरिट गुड्स और डिमेरिट गुड्स में बांटा जाता है. डिमेरिट गुड्स जैसे सिगरेट और तंबाकू स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं, इसलिए उन पर अधिक टैक्स लगाया जाता है. वहीं, दवाइयों और खाद्य सामग्रियों जैसी आवश्यक वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त रखा गया है या उन पर कर में काफी कमी की गई है. उन्होंने बताया कि सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए जीएसटी दरों में कटौती की है. जीएसटी रिफॉर्म 2.0 का उद्देश्य ‘स्वदेशी ग्रो एंड मल्टीनेशनल गो’ को साकार करना है.
कृषि के विकास का युग
कृषि क्षेत्र पर बोलते हुए प्रो. राकेश सिन्हा ने कहा कि आज 43% लोग कृषि कार्य से जुड़े हैं और वर्तमान समय कृषि के विकास का युग है. झारखंड के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यहां के लोगों को जल, जंगल और जमीन से अलग नहीं किया जा सकता. भूमि स्वामित्व के मुद्दे पर उन्होंने प्राकृतिक अधिकारों की भी चर्चा की. छात्र-छात्राओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में शिक्षा, रोजगार और आर्थिक स्थिरता के साथ-साथ अपने गांव और समाज के विकास के लिए भी योगदान देना जरूरी है.
डॉ विभा पांडेय ने बताईं सरकारी योजनाओं की प्राथमिकता
झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की उप निदेशक डॉ विभा पांडेय ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में इस स्तर का सम्मेलन होना सराहनीय पहल है. उन्होंने राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि एनईटी और जेईटी योग्य विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है. उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में नियुक्तियों की प्रक्रिया भी जारी है और बेहतर प्रदर्शन करने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों को सरकार की ओर से वित्तीय सहायता दी जाएगी.
ग्रामीण-शहरी अर्थव्यवस्था को संतुलन: प्रो संजय कुमार झा
रामचंद्र चंद्रवंशी यूनिवर्सिटी, पलामू के कुलपति प्रो (डॉ) संजय कुमार झा ने कहा कि भारत में जीएसटी कोई नई अवधारणा नहीं है, लेकिन इसके लागू होने से व्यापारिक ढांचे में व्यापक सुधार हुआ है. उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों के व्यापारियों को लाभ मिलने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं.
फाइनेंशियल लिटरेसी में सुधार जरूरी: डॉ रंजीत प्रसाद
कोल्हान विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य डॉ रंजीत प्रसाद ने कहा कि भारत में डिजिटल और फाइनेंशियल लिटरेसी की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है. उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद छोटे से लेकर बड़े उद्योगों को बढ़ावा मिला है. उन्होंने सुझाव दिया कि इस तरह के कार्यक्रमों को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए, जिससे डिजिटल साक्षरता के माध्यम से लघु एवं गृह उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिल सके.
रिपोर्ट और जर्नल का विमोचन
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के साथ कॉलेज के निदेशक आरएन महांती, सम्मेलन की कन्वेनर एवं कोल्हान यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति प्रो (डॉ) शुक्ला महांती, चेयरपर्सन किंसुक महांती और प्रिंसिपल डॉ. स्वीटी सिन्हा द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया. निदेशक आरएन महांती ने स्वागत भाषण में कहा कि दो दिनों तक चले विचार-मंथन की रिपोर्ट शिक्षा, शोध और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी. प्रो (डॉ) शुक्ला महांती ने सम्मेलन को शैक्षणिक और आर्थिक दृष्टि से मील का पत्थर बताया. समारोह में एसोसिएट प्रोफेसर रश्मि शर्मा ने सम्मेलन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की. डॉ. मनीष झा और प्रो. जेबी कोमरै ने प्रतिभागियों से प्राप्त फीडबैक साझा किया.
इस दौरान 9 और 10 जनवरी 2026 को आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के जर्नल ‘ईमर्जिंग फ्रंटीयर इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी’ का विमोचन भी किया गया. प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जबकि धन्यवाद ज्ञापन एसोसिएट प्रोफेसर श्वेता रंजन ने किया.
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तकनीकी सत्रों में गहन शोध प्रस्तुति
- कीमतें, खपत और आजीविका: झारखंड, बिहार सहित देशभर के पांच प्रतिभागियों ने शोधपत्र प्रस्तुत किए. एक्सएलआरआई के प्रो पिंगाली वेन्यूगोपाल की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में रिसोर्स पर्सन बीएचयू के जेबी कोमरै और मुंगेर यूनिवर्सिटी की डॉ. नवलता रहीं. रिपोर्टिंयर शरबानी मुखर्जी थीं.
- कारोबारी माहौल और स्थानीय विकास: बीएचयू के जेबी कोमरै की अध्यक्षता आयोजित इस सत्र में इस सत्र में सात प्रतिभागियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए. रिसोर्स पर्सन एक्सएलआरआई के प्रो. पिंगाली वेन्यूगोपाल और डॉ. मिथिलेश चौबे थे, जबकि रिपोर्टिंयर असिस्टेंट प्रोफेसर अर्चना रहीं.
- नीति सबक और भविष्य का मार्ग: एनआईटी जमशेदपुर के डॉ मनीष झा की अध्यक्षता अंतिम सत्र में नीति और भविष्य की दिशा पर चर्चा हुई. रिसोर्स पर्सन के रूप में डॉ. सुहिता चटर्जी (द ग्रेजुएट स्कूल कॉलेज फॉर वीमेन), स्टेट टैक्स (जीएसटी) के सेवानिवृत्त एडिशनल कमिश्नर डॉ राजेश कुमार, एनआईपीए अफ्रीका की प्रो आरती श्रीवास्तव और इग्नू देवघर के क्षेत्रीय डिप्टी डायरेक्टर डॉ सरोज मिश्रा शामिल रहे. रिपोर्टिंयर निशा रानी ब्रह्म थीं.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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