राजनगर अस्पताल में मां-बच्चे की मौत पर भाजपा का धरना-प्रदर्शन, मोबाइल की रोशनी में प्रसव की कोशिश

राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर प्रदर्शन करते भाजपा के नेता.
Seraikela News: सरायकेला खरसावां जिले के राजनगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मोबाइल की रोशनी में प्रसव कराने की कोशिश के दौरान मां-बच्चे की मौत के मामले में राजनीतिक तूल पकड़ लिया है. सोमवार को भाजपा के नेताओं ने अस्पताल के बाहर धरना-प्रदर्शन किया. इन नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान संस्थागत हत्या का आरोप भी लगाया है. उन्होंने अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर भी सवाल खड़े किए हैं. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
Seraikela News: झारखंड के सरायकेला खरसावां जिले के राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मोबाइल की रोशनी में प्रसव कराने की कोशिश के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत ने पूरे इलाके में खड़ा कर दिया है. मृतका की पहचान विनीता बानरा के रूप में की गई है. इस घटना के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को राजनगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया. कार्यक्रम का नेतृत्व जिला अध्यक्ष हरे कृष्ण प्रधान ने किया. इस धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय लोग इसमें शामिल हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.
अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं का अभाव
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जिसके कारण यह दर्दनाक घटना हुई. उन्होंने कहा कि अगर बिजली और उचित चिकित्सा व्यवस्था होती, तो माँ और बच्चे की जान बचाई जा सकती थी.
गीता कोड़ा ने सरकार पर बोला हमला
प्रदर्शन के दौरान पूर्व सांसद और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष गीता कोड़ा ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था खुद बीमार हो चुकी है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री केवल औपचारिकता निभा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कोई सुधार नहीं हो रहा. उन्होंने इस घटना को बेहद शर्मनाक बताते हुए कहा कि 21वीं सदी में भी अस्पतालों में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव होना सरकार की विफलता को दर्शाता है.
संस्थागत हत्या का आरोप
भाजपा नेताओं ने इस घटना को महज दुर्घटना नहीं, बल्कि संस्थागत हत्या करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया है कि यह मौत सिस्टम की लापरवाही और बदहाल व्यवस्था का नतीजा है. प्रदेश मंत्री शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि प्रशासन का रवैया और भी चिंताजनक है. उन्होंने आरोप लगाया कि दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है. एफआईआर दर्ज न करना और सच्चाई को छिपाना पीड़ित परिवार के साथ अन्याय है.
मुआवजा और कार्रवाई की मांग
भाजपा ने सरकार से कई मांगें रखीं. पार्टी ने मृतका के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की. इसके अलावा, इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने और सख्त सजा देने की भी मांग की गई. प्रदर्शन के दौरान मृतका के पति ने भी इंसाफ की गुहार लगाई.
पुरानी घटनाएं भी आईं सामने
जिलाध्यक्ष हरे कृष्ण प्रधान ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है. उन्होंने चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी लीपापोती की कोशिश हुई थी. उनका आरोप था कि राज्य का स्वास्थ्य विभाग लगातार विवादों में रहा है, लेकिन सुधार के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए.
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प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने अनुमंडल पदाधिकारी के माध्यम से उपायुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा. इसमें घटना की जांच और कार्रवाई की मांग दोहराई गई. इस मौके पर प्रदेश मंत्री शैलेन्द्र सिंह, पूर्व विधायक अनंत राम टुडू, जिला महामंत्री राकेश मिश्रा, जिला मंत्री सूर्या देवी सहित कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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