Seraikela News : किसी निर्दोष पर कार्रवाई नहीं होगी गांव में शांति बहाल करें : एसडीएम
Published by : ATUL PATHAK Updated At : 06 May 2025 11:32 PM
किसी निर्दोष पर कार्रवाई नहीं होगी गांव में शांति बहाल करें : एसडीएम
चांडिल/चौका . सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड स्थित झिमड़ी गांव में लड़की का अपहरण के बाद हिंसक घटना हुई थी. गांव में करीब 10 दिनों से धारा 163 लागू है. गांव में शांति व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन प्रयासरत है. मंगलवार को चांडिल अनुमंडल कार्यालय में एसडीएम विकास कुमार राय की अध्यक्षता में शांति समिति की बैठक हुई.
एसडीएम ने गांव में शांति बहाल की अपील की. आपसी भाईचारा के साथ रहने की बात कही. सदस्यों ने निर्दोष लोगों पर पुलिसिया कार्रवाई नहीं करने का आग्रह किया. दोषी लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई की मांग की. एसडीओ ने आश्वस्त किया कि निश्चित रहें, जो घटना में संलिप्त नहीं थे उनपर कार्रवाई नहीं होगी. झामुमो नेता विश्वरंजन महतो उर्फ कार्तिक महतो ने कहा कि प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई करे.मैरेज सर्टिफिकेट की जांच कर गवाहों पर कार्रवाई हो:
बैठक में लोगों ने कहा कि मैरेज सर्टिफिकेट वायरल हो रहा है, उसका सही से जांच हो. उसमें दो लोग गवाह है, उनकी जांच कर कार्रवाई हो. यह मामला कहीं मानव तस्करी का तो नहीं है.
प्रभावित परिवारों को योजनाओं का लाभ मिला:
एसडीएम ने कहा कि प्रभावित परिवार को सरकारी योजना से एक गाय और बछड़ा, चार बकरियां, उसके बेटा को मिशन वात्सल्य योजना के तहत 18 वर्ष तक 4 हजार रुपये दिये जायेंगे. बच्ची की पढ़ाई में प्रशासन पूरी सहयोग करेगा. दूसरे प्रभावित लोगों को आपदा के तहत 1 लाख 20 हजार रुपये व एक अबुआ आवास स्वीकृत किया गया है. बैठक में एसडीपीओ अरविंद कुमार बिन्हा, जिला परिवहन पदाधिकारी गिरजा शंकर महतो, जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी सत्येंद्र महतो, नीमडीह बीडीओ व सीओ, ईचागढ़ बीडीओ वसीओ, कुकड़ू बीडीओ व सीओ, चांडिल सीओ सहित शांति समिति के सदस्य मौजूद थे.
आदिवासियों के आरक्षण पर अतिक्रमण न करें धर्म परिवर्तन करने वाले : चंपाई सोरेन
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सह सरायकेला विधायक चंपाई सोरेन ने सोशल साइट ‘एक्स’ पर एक बार फिर धर्मांतरण को गंभीर मुद्दा बताया है. उन्होंने लिखा कि आज एक नया शब्द सुना ‘कैथोलिक आदिवासी’. कोई इन्हें बताये कि या तो आप कैथोलिक हो सकते हैं या फिर आदिवासी. दोनों एक साथ संभव नहीं है. संविधान के हिसाब से आदिवासी अनुसूचित जनजाति में आते हैं, जबकि ईसाई अल्पसंख्यक में. नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था नहीं होती. धर्म परिवर्तन के साथ आप दलित आदिवासी होने की पहचान खो देते हैं. चंपाई सोरेन ने आगे लिखा कि आदिवासियों की पहचान उनकी विशिष्ट संस्कृति, परंपराओं, भाषा, और जीवनशैली में निहित है. हम पेड़ के नीचे बैठ कर पूजा करने वाले लोग हैं. जन्म से लेकर मृत्यु तक, हमारे जीवन के सभी संस्कारों को पाहन, पड़हा राजा, मानकी मुंडा एवं मांझी परगना पूरा करवाते हैं. धर्म परिवर्तन के बाद वे लोग चर्च में जाते हैं. जिसने धर्म परिवर्तन किया अथवा आदिवासी जीवनशैली का त्याग किया, उनसे हमें कोई दिक्कत नहीं है. आप जहां हैं, आराम से रहें. हम सुनिश्चित करेंगे कि भारतीय संविधान में आदिवासी समाज को मिले आरक्षण के अधिकार में आप अतिक्रमण न कर सकें.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










