सरायकेला-खरसावां: आम में मंजर की बहार, कीट प्रबंधन से मिलेगी बंपर पैदावार; 4000 एकड़ में हैं हजारों पेड़

आम के पेड़ पर लगे मंजर
Kharsawan: सरायकेला-खरसावां जिले में आम के बागानों में इस बार मंजरों की भरपूर बहार देखने को मिल रही है. जिले में करीब 4000 एकड़ क्षेत्र में फैले हजारों आम के पेड़ों पर अच्छी मात्रा में मंजर आने से किसानों को बंपर पैदावार की उम्मीद है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार समय पर कीट प्रबंधन और उचित देखभाल से आम उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है.
शचिंद्र कुमार दाश
Kharsawan: सरायकेला-खरसावां जिले में इस साल आम के पेड़ों में बड़े पैमाने पर मंजर आने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं. जिस तरह पेड़ों पर मंजर लगे हैं, उसे देखकर किसानों को बंपर आम उत्पादन की उम्मीद है. पिछले साल भी जिले में आम का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था, जिससे किसानों को अच्छा फायदा हुआ था. जिले में हजारों की संख्या में आम के पेड़ लगे हुए हैं, जिनमें मालदा, आम्रपाली, गुलाबखास, मल्लिका, अल्फांसो, दशहरी, सुकुल सहित कई उन्नत किस्में शामिल हैं. यदि मंजरों की सही तरीके से देखभाल की जाए, तो इस साल आम की पैदावार काफी अच्छी हो सकती है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिलने की संभावना है.
3000 एकड़ से अधिक रैयती जमीन पर आम की बागवानी
सरायकेला-खरसावां जिले में बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक तरीके से आम की खेती कर रहे हैं. इसके साथ ही जिले में 3000 एकड़ से अधिक रैयती भूमि पर आम की बागवानी की जा चुकी है. राज्य सरकार की बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत वर्ष 2020-21 से लगातार रैयती भूमि पर आम के पौधे लगाये जा रहे हैं. वर्ष 2023-24 से पूर्व लगाये गये पौधों में भी इस बार बड़े पैमाने पर मंजर निकल आए हैं. किसान मंजरों को बचाने में जुटे हैं, ताकि अधिक उपज हो सके.
उद्यान विभाग के बागान में भी बेहतर उत्पादन की उम्मीद
जिले में उद्यान विभाग की ओर से सरायकेला, कुचाई, खरसावां सहित अन्य क्षेत्रों में आम के बागान विकसित किए गए हैं. सरायकेला स्थित उद्यान विभाग के बागान में मालदा, आम्रपाली, गुलाबखास, मल्लिका, अल्फांसो और सुकुल किस्म के करीब 250 आम के पेड़ लगे हुए हैं. लगभग 25 एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस बागान से भी इस वर्ष बेहतर उत्पादन की संभावना जतायी जा रही है. अन्य बागान में भी आम के पेड़ लगे हैं, जिनकी नीलामी की जाती है.
बाजार व्यवस्था पर निर्भर करेगी किसानों की आय
जिले में आम की फसल जून माह तक तैयार हो जाएगी. मौसम अनुकूल रहने पर लंगड़ा, आम्रपाली, दशहरी, बैगनपल्ली, सिंदूरी और हेमसागर किस्म के आम मई के अंतिम सप्ताह से ही बाजार में आने लगेंगे. हालांकि, किसानों का कहना है कि आम की बिक्री के लिए बेहतर बाजार व्यवस्था की जरूरत है. वर्तमान में अधिकतर किसान स्थानीय हाट-बाजारों में ही आम बेचते हैं, जिससे उन्हें सीमित दाम ही मिल पाते हैं.
किसानों को भरोसा, इस साल भी होगी बंपर पैदावार
आम के पेड़ों में आए मंजर को देखकर किसानों में खासा उत्साह है. आम उत्पादक किसान शैलेश सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष आम की उपज काफी अच्छी रही थी और इस वर्ष पेड़ों में उससे भी अधिक मंजर आए हैं. किसान राजेंद्र राय और मनोज महतो का कहना है कि इस बार आम की पैदावार पिछले वर्ष से भी अधिक होने की संभावना है. किसानों का मानना है कि आम फलों का राजा है और इसकी मांग हमेशा बनी रहती है.
तापमान अनुकूल, मंजर आने का सही समय
कृषि विशेषज्ञ कालीपद महतो के अनुसार, जब दिन का तापमान लगभग 25 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 14 डिग्री सेल्सियस रहता है, तब आम के पेड़ों में मंजर आने की प्रक्रिया तेज होती है. वर्तमान समय मंजर आने के लिए सबसे अनुकूल है. उन्होंने बताया कि इस समय अत्यधिक सिंचाई नहीं करनी चाहिए और किसी भी प्रकार के दवा स्प्रे से पहले विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए. निर्धारित मात्रा से अधिक दवा का उपयोग नुकसानदेह हो सकता है. छिड़काव सुबह या शाम के समय ही करना चाहिए.
मंजर को कीटों से कैसे बचाएं
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार मंजर आने के दौरान हॉपर और मिलीबग जैसे रस चूसक कीटों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे मंजर कमजोर होकर झड़ सकता है. इसके लिए कृषि विशेषज्ञों ने कुछ बचाव के उपाय बताए हैं.
- मंजर के समय साइपरमेथ्रिन एक एमएल प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें.
- फूल-फल झड़ने से बचाव के लिए बोरोन 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें.
- फल मटर के दाने के बराबर होने तक कीटनाशक का प्रयोग न करें, ताकि परागण प्रभावित न हो.
- फल थोड़ा बड़ा होने पर निर्धारित मात्रा में साइपरमेथ्रिन, ब्लिटॉक्स, मिराकुलन, बोरोन आदि का छिड़काव करें.
- सल्फेट ऑफ पोटाश के छिड़काव से फल का आकार और चमक बढ़ती है.
- फल और बड़ा होने पर ह्यूमिक एसिड, एनपीके, केचुआ खाद के साथ सिंचाई लाभकारी होती है.
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By AmleshNandan Sinha
अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.
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