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Jharkhand Weather: सरायकेला में खेती का काम धीमा, मॉनसून की बारिश के बावजूद केवल 12 फीसदी किसानों ने डाला बीज

Updated at : 05 Jul 2024 12:03 PM (IST)
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Jharkhand Weather: सरायकेला में खेती का काम धीमा, मॉनसून की बारिश के बावजूद केवल 12 फीसदी किसानों ने डाला बीज

लैंपस के माध्यम से किसानों को करीब 50 फिसदी अनुदानित मूल्य पर धान के बीज भी उपलब्ध कराये जा रहे हैं. जिला को 564.65 क्विंटल धान का बीज उपलब्ध कराया गया है.

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शचिंद्र कुमार दाश, खरसावां : मॉनसून की बारिश के साथ ही सरायकेला-खरसावां जिले में किसानों ने धान की खेती शुरू कर दी है. लेकिन इस वर्ष मॉनसून का आगाज काफी कमजोर रहा है. एक से चार जुलाई तक जिला में 133.7 एमएम बारिश का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है. इस कारण कृषि से जुड़े कार्य भी धीमी गति से हो रही है. किसान खेतों में हल जोत कर खेत तैयार करने में जुट गये हैं.

लेकिन अच्छी बारिश नहीं होने की वजह से धान की खेती प्रभावित हो रही है. ढलान वाली जमीन में छींटा विधि से धान की खेती होती है. किसान ढलान वाली जमीन में धान के बीज डाल रहे हैं. अब तक करीब 12 फिसदी किसानों ने खेतों में छींटा विधि से धान का बीज डाला है. पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं होने के कारण धान की खेती प्रभावित हो रही है.

564.65 क्विंटल धान का बीज कराया गया है उपलब्ध

लैंपस के माध्यम से किसानों को करीब 50 फिसदी अनुदानित मूल्य पर धान के बीज भी उपलब्ध कराये जा रहे हैं. जिला को 564.65 क्विंटल धान का बीज उपलब्ध कराया गया है. लैंपस में अनुदानित मूल्य आईआर-64 (ललाट) व एमटीयू1010 (स्वर्ण) किस्म के धान उपलब्ध है. आईआर-64 के 30 किलो के पैकट पर 630 रुपया का भुगतान करना पड़ रहा है. इसके अलावे खुले बाजार में अलग-अलग किस्म के धान के बीज उपलब्ध हैं. किसानों को बीज भंडारों में धान के बीज की खरीदारी करते देखा जा सकता है.

ट्रैक्टर से एक घंटे हल जोतने का किराया 1200

किसान ट्रैक्टर से धान के खेतों को जोत कर मिट्टी को खेती के लिए तैयार कर रहे हैं. ट्रैक्टर से एक घंटे का खेत जुताई का किराया 12 सौ रुपये है. साथ ही बैल से हल जुताई का किराया 500 रुपया है.

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सूखे पड़े हैं सिंचाई नहर

मॉनसून की बारिश के बावजूद भी जिला के अधिकांश जल स्रोत सूखे पड़े हुए हैं. नदी-तालाब में अब भी पानी न के बराबर है. नहर भी सूखे पड़े हुए हैं. अगर आने वाले दिनों में पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं हुई तो धान की खेती प्रभावित हो सकती है.

बोकारो में एक लाख हेक्टयर में धान की खेती का लक्ष्य

सरायकेला-खरसावां जिला में कृषि विभाग ने एक लाख हेक्टयर धान की खेती कराने का लक्ष्य रखा है. 27000 हेक्टयर जमीन पर हाइब्रिड धान, 46000 हेक्टयर से अधिक पर उपजशील धान व 27000 हेक्टयर पर उन्नत धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है. जिला में करीब 4.23 लाख लोग खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं. इसमें से 2,11,500 वृहद किसान, 1,22,886 लघु किसान व 88,614 सीमांत किसान हैं.

क्या कहते हैं जिले के किसान

इस वर्ष जून माह में भी बारिश नहीं हुई. मानसून काफी देर से पहुंची तथा मानसून की पहली बार भी अपेक्षाकृत काफी कमजोर रही. पर्याप्त वर्षा के अभाव में धान की खेती में देरी हो रही है.

शैलेश सिंह, किसान, खरसावां

बोकारो जिला के विभिन्न लैंपसों में धान के बीज उपलब्ध हैं. अनुदानित मूल्य पर किसानों को धान का बीज उपलब्ध कराया जा रहा है.

उमेश बोदरा, लैंपस अध्यक्ष, खरसावां

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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