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इचा खरकई बांध परियोजना का विरोध तेज, ग्रामीण बोले- आदिवासियों के अस्तित्व व जमीन पर हमला कर रही सरकार

Updated at : 07 Jun 2025 7:58 PM (IST)
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Icha Kharkai Dam Project Protest seraikela

बांध के विरोध में एकजुट हुए ग्रामीण. फोटो : प्रभात खबर

Icha Kharkai Dam Project Protest: सरायकेला-खरसावां जिले के इचा खरकई बांध परियोजना का ग्रामीणों ने विरोध तेज कर दिया है. आज एक बैठक में कोल्हान इचा-खरकई बांध विरोधी संघ ने एक स्वर में कहा कि इस आंदोलन को और तेज किया जायेगा. संघ के उपाध्यक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाये. कहा कि यह सरकार उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए डैम का निर्माण करवा रही है.

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Icha Kharkai Project Protest: सरायकेला, प्रताप मिश्रा : सरायकेला-खरसावां जिले में इचा खरकई बांध परियोजना का विरोध तेज हो गया है. ग्रामीणों ने कहा है कि सरकार आदिवासियों के अस्तित्व और जमीन पर हमला कर रही है. राजनगर प्रखंड के हेरमा पंचायत अंतर्गत धोलाडीह गांव में इचा-खरकई डैम निर्माण के खिलाफ शनिवार को कोल्हान इचा-खरकई बांध विरोधी संघ की बैठक हुई. धोलाडीह गांव के मुंडा सीदिऊ पड़ेया ने बैठक की अध्यक्षता की.

संघ के उपाध्यक्ष रेयांश सामड भी बैठक में हुए शामिल

बैठक में हाथीसेरेंग, यादूडीह और दीरिबांडी सहित कई गांवों के ग्रामीण शामिल हुए. बैठक में संघ के उपाध्यक्ष रेयांश सामड भी उपस्थित थे. उन्होंने खरकाई बांध निर्माण पर राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि इचा डैम के पुनर्निर्माण का फैसला सरकार ने केवल उद्योगपतियों के हितों को ध्यान में रखकर लिया है.

बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है सरकार – सामड

उन्होंने कहा कि डैम से सबसे अधिक फायदा रूंगटा और टाटा जैसी कंपनियों को होगा. इन्हीं कंपनियों ने सरकार को आर्थिक लाभ पहुंचाया है. रेयांश सामड ने कहा कि हेमंत सोरेन ने अपने संघर्ष यात्रा के दौरान सोसोहातु में कहा था कि सीने पर गोली खा लेंगे, लेकिन डैम नहीं बनने देंगे. आज वही नेता सत्ता में आकर आदिवासियों की जमीन और अस्तित्व पर हमला कर रहे हैं.

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डैम निर्माण के विरोध में तेज करना होगा आंदोलन – मारकंडो

बैठक में वरिष्ठ आंदोलनकारी मरकंडो बारी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि शहीद गंगाराम कालुंडिया की तरह हमें एकजुट होकर फिर से आंदोलन करना होगा. जब तक हमारे प्रतिनिधि हमारे वोट की ताकत नहीं समझेंगे, तब तक यह विनाशकारी परियोजना नहीं रुकेगी.

सभा को इन लोगों ने भी किया संबोधित

सभा को कोषाध्यक्ष गुलिया कालुंडिया, सह सचिव बिरसा गोडसोरा, मीडिया सचिव रॉबिन आलडा, सक्रिय सदस्य कृष्णा बानरा, सिंगराय जामुदा, मार्शल गोडसोरा ने भी संबोधित किया. सभी ने एक स्वर में इचा डैम परियोजना को वापस लेने की मांग की और आंदोलन को तेज करने का संकल्प लिया.

कार्यक्रम में ये लोग भी थे उपस्थित

कार्यक्रम में यदुदीह ग्राम प्रधान लक्ष्मण महतो, कांडे सोय, जगमोहन बानरा, मालती सवैया, जानकी देवगम, गुरुचरण महतो, सरस्वती गोडसोरा व अन्य उपस्थित थे.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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