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Seraikela Kharsawan News : श्रद्धालुओं ने लगायी आस्था की डुबकी

Updated at : 15 Jan 2026 12:39 AM (IST)
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Seraikela Kharsawan News : श्रद्धालुओं ने लगायी आस्था की डुबकी

मकर संक्रांति. नदियों में स्नान के बाद मंदिरों में पूजा-अर्चना, उमड़ा आस्था का सैलाब

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सरायकेला-खरसावां. सरायकेला-खरसावां जिले के खरसावां, चांडिल, सरायकेला, राजनगर समेत अन्य क्षेत्रों में बुधवार को मकर संक्रांति पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया. मकर पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा गया. बड़ी संख्या में लोग अहले सुबह नदी-तालाबों में स्नान कर भगवान सूर्य देव को अर्घ्य दिया और मंदिरों में मत्था टेका. इसके बाद दही-चूड़ा व तिलकुट का आनंद लिया गया. इस अवसर पर क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और आध्यात्म का अनोखा संगम देखा गया.

खरसावां : सोना नदी में स्नान और मंदिरों में पूजा-अर्चना

खरसावां में लोगों ने सूर्योदय से पूर्व सोना नदी में मकर स्नान किया. इसके पश्चात जगन्नाथ मंदिर, शिव मंदिर और कृष्ण मंदिर में पूजा-अर्चना की गयी. हरिभंजा के जगन्नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली. लोग घर पर भी परिवार के साथ मकर संक्रांति पर्व मनाते हुए विशेष व्यंजन जैसे गुड़ पीठा, चकुली पीठा आदि का आनंद उठाते रहे. शाम को आस-पास के क्षेत्रों में आयोजित मकर मेलों में लोगों ने भाग लेकर उत्सव को और खास बनाया.

चांडिल के जयदा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

चांडिल के जयदा में सबसे अधिक भीड़ मकर स्नान के लिए देखी गयी. श्रद्धालुओं ने सुवर्णरेखा नदी में स्नान कर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया. साधु-संत भी यहां पहुंचे और प्राचीन जयदा शिव मंदिर में जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की. स्नान और पूजा के बाद परिवार के साथ तिलकुट, दही-चूड़ा, गुड़-पीठा जैसे व्यंजन खाकर पर्व मनाया. मान्यता है कि जयदा स्थित सुवर्णरेखा नदी में डुबकी लगाने से मन्नतें पूरी होती हैं.

राजनगर के भीमखंदा में मकर स्नान और पूजा

राजनगर प्रखंड में भीमखंडा स्थित बोंबोगा नदी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गयी. लोगों ने नदी, नाले, तालाबों एवं जलाशयों में स्नान कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की. पर्व के दौरान गुड़ पीठा, दही-चूड़ा और तिलकुट का आनंद लिया. महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार विशेष पकवान बनाकर उत्सव में शामिल हुईं.

अघीरा जलाकर बच्चों ने मनायी खुशियां

ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों ने अघीरा जलाकर ठंड से बचते हुए खुशियां मनायीं. बड़े-बड़े पेड़ों की डाली, पत्तियां और सूखा पुआल एकत्र कर आग जलायी गयी. इसके बाद तिलकुट और गुड़ पीठा खाकर घर के बड़े-बड़ों से आशीर्वाद लिया. घरों के सामने आकर्षक रंगोली बनायी गयी.

मकर संक्रांति का महत्व

धार्मिक दृष्टि से मकर संक्रांति का विशेष महत्व है. इसे देवताओं का सूर्योदय माना जाता है. यह पर्व नकारात्मक विचारों को छोड़कर सकारात्मक विचार अपनाने का संदेश देता है. सूर्य का मकर राशि में प्रवेश मकर संक्रांति कहलाता है. इसके साथ ही सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं और दिन बड़े, रात छोटी होने लगती है.

सरायकेला में प्रभु जगन्नाथ की पूजा

सरायकेला में ब्रम्ह मुहूर्त में मकर स्नान के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी. खरकई नदी के माजणाघाट, जगन्नाथ घाट और कुदरसाई घाट में श्रद्धालुओं ने स्नान किया. इसके बाद जगन्नाथ मंदिर में प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा की गयी. स्थानीय परंपरा के अनुसार, लोग नये वस्त्र पहने और दान पुण्य की रस्म निभायी. वहीं जयदा के अलावा चांडिल डैम, ईचागढ़, करकरी नदी, शोभा नदी, तिरुलडीह, बामनी नदी समेत कई नदी तालाबों में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगायी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ATUL PATHAK

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By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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