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सरायकेला के बलदेवपुर जंगल में हथिनी की मौत, डॉक्टरों की टीम ने किया पोस्टमार्टम

Updated at : 30 Nov 2017 2:56 PM (IST)
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सरायकेला के बलदेवपुर जंगल में हथिनी की मौत, डॉक्टरों की टीम ने किया पोस्टमार्टम

!!शचिंद्र कुमार दाश @ खरसावां!! सरायकेला वन क्षेत्र के बलदेवपुर (पानारोल) गांव के पास स्थित जंगल में एक जंगली मादा हाथी की मौत हो गयी. घटना की जानकारी मिलने के पश्चात वन विभाग के अधिकारी घटना स्थल पर पहुंच कर पूरे मामले की जानकारी ली. पशु चिकित्सक डॉ संतोष अग्रवाल व डॉ नरेंद्र सिंह की […]

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!!शचिंद्र कुमार दाश @ खरसावां!!

सरायकेला वन क्षेत्र के बलदेवपुर (पानारोल) गांव के पास स्थित जंगल में एक जंगली मादा हाथी की मौत हो गयी. घटना की जानकारी मिलने के पश्चात वन विभाग के अधिकारी घटना स्थल पर पहुंच कर पूरे मामले की जानकारी ली. पशु चिकित्सक डॉ संतोष अग्रवाल व डॉ नरेंद्र सिंह की टीम ने पोष्टमाटम किया. हथिनी के शरीर से पांच बोटल खुन का सेंपल ले कर जांच के लिये रांची भेजा गया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पत चल सकेगा.
क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक सुनील कुमार गुप्ता, वन संरक्षक वेंकेटश्वरलू, वन प्रमंडल पदाधिकारी ए एक्का, वन क्षेत्र पदाधिकारी सुरेश कुमार व केके साह घटना स्थल पर पहुंच कर पूरे मामले की जानकारी ली. समाचार लिखे जाने तक सभी अधिकारी घटन स्थल पर ही मौजूद है. हथिनी की मौत की खबर सुनने के बाद बडी संख्या में लोग घटना स्थल पर पहुंचे. इस दौरान लोगों ने फूल व अगरबत्ती चढ़ा कर मृत हथिनी की पूजा भी की. नौ नवंबर को भी खरसावां वन क्षेत्र के सिदमाकुदर गांव में एक हाथिनी की मौत हुई थी. चालू वित्तीय वर्ष में सरायकेला वन प्रमंडल में कुल दो हाथिनियों की मौत हुई है. परंतु मौत के कारणों का अब तक पता नहीं चल सका है.
सरायकेला वन प्रमंडल : 14 साल में हुई 39 हाथियों की मौत
सरायकेला वन प्रमंडल में हाथियों की मौत से वन विभाग सकते है. पिछले 14 सालों में अलग अलग कारणों से सरायकेला वन प्रमंडल में 39 हाथियों की मौत हुई है. सरायकेला वन प्रमंडल में वित्तीय वर्ष 2004-05 में चार, 2005-06 में पांच, 2006-07 में दो, 2007-08 में छह, 2008-09 में सात, 2009-10 में चार, 2010-11 में तीन, 2011-12 में चार, 2013-14 व 2014-15 में एक-एक हाथी की मौत हुई है.
सरायकेला वन क्षेत्र में जमा है 35 हाथियों का झुंड
सरायकेला वन क्षेत्र में इन दिनों 35 हाथियों का झुंड जमा हुआ है. शाम होते ही ये जंगली हाथी गांवों में जा कर उत्पात मचा रहे है. खेतों में धान के फसल बर्बाद करन के साथ खिलहान में भी रखे धान के फसलों को बर्बाद कर रहे है. शाम होते ही हाथियों के चींघाड़ से गांव दहल रहे है. खेतों में धान के फसल को हाथी अपने पैरों तले रौंद कर बर्बाद कर रहे है.
मंचान में रात गुजार कर फसल की रखवाली कर रहे हैं किसान
गांव में आ रहे हाथियों की टोह लेने तथा खेतों से हाथियों को खदेडने के लिए जगह जगह मंचान बनाया गया है. किसान इन्हीं मंचानों पर रातजगा रह करअपनी फसल की रखवाली कर रहे है. गांव या खेतों पर हाथी आने की स्थिति में ग्रामीण इन्हीं मंचान के उतर कर खदेड़ने का कार्य कर रहे है.
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