'बाबूजी धीरे चलना... 40 गड्ढों में जरा संभलकर चलना', साहिबगंज में एनएच-80 की बदहाली पर फूटा लोगों का गुस्सा

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साहिबगंज के नेशनल हाईवे पर गड्ढे में गिरे वाहन चालक को बाहर निकालते लोग. फोटो: प्रभात खबर

साहिबगंज के नेशनल हाईवे पर गड्ढे में गिरे वाहन चालक को बाहर निकालते लोग. फोटो: प्रभात खबर

साहिबगंज के मदनशाही से सकरीगली NH-80 मार्ग की बदहाल स्थिति पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है. करीब ढाई किलोमीटर सड़क पर 40 बड़े और सैकड़ों छोटे गड्ढे दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं, जिससे स्थानीय लोग परेशान हैं.

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साहिबगंज से इमरान की रिपोर्ट

Sahibganj News: "बाबूजी धीरे चलना... 40 गड्ढों में जरा संभलकर चलना." यह कोई फिल्मी गीत नहीं, बल्कि साहिबगंज जिले के मदनशाही से सकरीगली के बीच एनएच-80 की बदहाल सड़क की सच्चाई बन चुकी है. करीब ढाई किलोमीटर लंबा यह मार्ग पिछले पांच वर्षों से जर्जर हालत में पड़ा है और अब लोगों के लिए दुर्घटनाओं का पर्याय बन गया है. सड़क पर करीब 40 बड़े और सैकड़ों छोटे गड्ढे हैं, जिनकी वजह से हर दिन छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं. शुक्रवार सुबह एक ट्रैक्टर दुर्घटना के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और ग्रामीणों ने मदनशाही में बांस-बल्ला लगाकर कई घंटे तक मुख्य सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया.

ट्रैक्टर हादसे के बाद सड़क पर उतरे ग्रामीण

शुक्रवार सुबह हुई ट्रैक्टर दुर्घटना ने स्थानीय लोगों के धैर्य का बांध तोड़ दिया. बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों ने बांस-बल्ला लगाकर आवागमन पूरी तरह बाधित कर दिया. उनका आरोप था कि वर्षों से सड़क की मरम्मत की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने लंबे समय तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया. ग्रामीणों का कहना था कि बरसात के मौसम में सड़क की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि पैदल चलना भी जोखिम भरा हो जाता है.

40 बड़े और सैकड़ों छोटे गड्ढे, हर दिन हो रहे हादसे

स्थानीय लोगों के अनुसार, ढाई किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर लगभग 40 बड़े और सैकड़ों छोटे गड्ढे हैं. जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी सड़क पर जमा रहता है. पानी भर जाने से गड्ढे दिखाई नहीं देते और वाहन चालक सीधे उनमें फंस जाते हैं. ग्रामीणों का दावा है कि प्रतिदिन औसतन आधा दर्जन छोटे-बड़े हादसे इस सड़क पर होते हैं. टेंपो, टोटो, बाइक, स्कूटी और साइकिल सवार सबसे अधिक दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं. कई मामलों में घायल लोगों को स्थानीय लोगों की मदद से सदर अस्पताल या आसपास के मेडिकल स्टोर तक पहुंचाया जाता है.

वर्षों के आंदोलन के बाद मिली निर्माण की मंजूरी

ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क के निर्माण को लेकर कई वर्षों से आंदोलन, धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन का सिलसिला जारी था. प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से लगातार गुहार लगाने के बाद आखिरकार जिला प्रशासन ने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड से करीब 9 करोड़ रुपये की लागत से सड़क और ड्रेन निर्माण की स्वीकृति दी. पिछले महीने इसका टेंडर जारी किया गया और अब निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है. हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि केवल काम शुरू होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे तय समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाना चाहिए.

कई इलाकों की लाइफलाइन है यह सड़क

मदनशाही से सकरीगली के बीच का यह मार्ग साहिबगंज मुख्यालय को सकरीगली, महाराजपुर, तालझारी, राजमहल सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जोड़ता है. प्रतिदिन इस सड़क से करीब 500 से अधिक छोटे और बड़े वाहनों का आवागमन होता है. सड़क के किनारे सरकारी विद्यालय होने के कारण स्कूली बच्चों को भी इसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है. इसके अलावा मंदिर और मस्जिद आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यही मुख्य मार्ग है. बारिश के दौरान कीचड़ और गड्ढों के कारण सभी को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

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निर्माण में तेजी और सुरक्षा व्यवस्था की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण शुरू होने से वर्षों पुरानी समस्या के समाधान की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन जब तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक दुर्घटनाओं का खतरा बना रहेगा. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए, गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए और काम पूरा होने तक सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं. उनका कहना है कि यदि सड़क जल्द पूरी नहीं हुई तो हादसों का सिलसिला जारी रहेगा और आम लोगों की परेशानी कम होने के बजाय और बढ़ सकती है.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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