रांची के मधुकम 50-60 साल से रहने वालों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, अतिक्रमण हटाने का आदेश लिया वापस

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झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो

झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो

रांची के मधुकम में 50-60 वर्षों से बसे गैर-आदिवासी परिवारों को बड़ी राहत मिली है. झारखंड हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का पुराना आदेश वापस ले लिया है. इस फैसले ने सैकड़ों परिवारों को बेघर होने से बचाया है.

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रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने रांची के रातू रोड स्थित मधुकम क्षेत्र में 50-60 वर्षों से घर बनाकर रह रहे गैर आदिवासी परिवारों को बड़ी राहत दी है. अदालत ने महादेव उरांव की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए पहले जारी अतिक्रमण हटाने के आदेश को वापस ले लिया. साथ ही, अदालत ने याचिकाकर्ता पर 12 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. यह राशि मामले से प्रभावित 12 परिवारों को एक-एक लाख रुपये के रूप में दी जाएगी. अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि याचिकाकर्ता महादेव उरांव ने न्यायालय के समक्ष महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया और शपथ पत्र में भ्रामक जानकारी देकर अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया. कोर्ट ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की गंभीर श्रेणी में माना और इस पर कड़ी नाराजगी जताई.

एकल पीठ के आदेश पर दायर की थी अवमानना याचिका

महादेव उरांव ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर एकल पीठ के उस आदेश का अनुपालन कराने की मांग की थी, जिसमें हेहल के अंचलाधिकारी को मधुकम की जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था. इसी आदेश के आधार पर प्रशासन ने खादगड़ा शिवदुर्गा मंदिर रोड के समीप मुंडारी प्रकृति की जमीन पर बने 12 मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू की थी.

सुनवाई में सामने आया करोड़ों रुपये के लेनदेन का तथ्य

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि याचिकाकर्ता ने संबंधित लोगों से एक करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय लेनदेन की जानकारी अदालत से छुपाई थी. इतना ही नहीं, जिन 12 परिवारों पर कार्रवाई का सीधा असर पड़ रहा था, उन्हें मूल रिट याचिका में प्रतिवादी भी नहीं बनाया गया था. अदालत ने माना कि यदि यह तथ्य पहले सामने होते, तो मामले की सुनवाई का स्वरूप अलग हो सकता था.

प्रभावित परिवारों को राहत, बेदखली पर लगी रोक

हाईकोर्ट के फैसले के बाद उन 12 परिवारों को तत्काल राहत मिली है, जो पिछले कई दशकों से मधुकम क्षेत्र में रह रहे हैं. अदालत ने अतिक्रमण हटाने के पूर्व आदेश को वापस लेते हुए स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और सभी पक्षों को सुनने के सिद्धांत के आधार पर ही आगे बढ़नी चाहिए.

पीड़ितों ने बताया था खरीदकर बनाया था घर

मामले में प्रभावित परिवारों का कहना था कि वे 50-60 वर्षों से इस इलाके में रह रहे हैं. उनके अनुसार उन्होंने संबंधित भूमि मालिक को प्रति डिसमिल 5.25 लाख रुपये की दर से भुगतान कर जमीन खरीदी थी और उसके बाद मकान बनाकर रह रहे हैं. उनका आरोप था कि भुगतान के बावजूद उन्हें अवैध कब्जाधारी बताकर बेदखल करने की कार्रवाई की जा रही थी, जिसका उन्होंने विरोध किया था.

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अदालत की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि न्यायालय के सामने तथ्य छुपाना और झूठा शपथ पत्र दाखिल करना गंभीर मामला है. अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी पक्ष न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर दूसरे पक्ष के अधिकारों का हनन नहीं कर सकता. इसी कारण याचिकाकर्ता पर 12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसे 12 प्रभावित परिवारों के बीच समान रूप से वितरित करने का निर्देश दिया गया. इस फैसले को मधुकम मामले में प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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