प्रकृति से छेड़छाड़ ही भीषण गरमी की वजह
Updated at : 23 Apr 2016 9:02 AM (IST)
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साहिबगंज : प्रकृति किसी को भी छेड़छाड़ की इजाजत नहीं देती है. मानव छेड़छाड़ के दु:साहस का ही नतीजा है भीषण गरमी. ये बातें साहिबगंज महाविद्यालय में भूगर्भ शास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो इमाम रिजवी ने प्रभात खबर से कहा कि श्री रिजवी ने कहा कि पृथ्वी पर जो गरमी का प्रकोप बढ़ रहा है. उसका […]
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साहिबगंज : प्रकृति किसी को भी छेड़छाड़ की इजाजत नहीं देती है. मानव छेड़छाड़ के दु:साहस का ही नतीजा है भीषण गरमी. ये बातें साहिबगंज महाविद्यालय में भूगर्भ शास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो इमाम रिजवी ने प्रभात खबर से कहा कि श्री रिजवी ने कहा कि पृथ्वी पर जो गरमी का प्रकोप बढ़ रहा है.
उसका कारण हम मानवजाति ही है, जो अनावश्यक रूप से केवल अपने स्वार्थों की पूर्ति करने के लिए प्रकृति से छेड़छाड़ करते हैं, जितनी तेजी से पृथ्वी पर पेड़ों की कटाई हो रही है. साहिबगंज इस मामले में पीछे नहीं है. कभी सरकार के विकास योजना के कारण तो कभी पेड़ तस्करी के कारण या फिर पहाड़ों पर पहाड़िया या ग्रामीणों द्वारा जंगल की सफाई कर खेती करने के नाम पर या फिर उत्खनन के कारण पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है.
कुछ पेड़ को यदि लगाया भी जा रहा है, तो उसे बढ़ने में कुछ समय लग जायेगा. इस प्रकार एक फेज ऐसा आयेगा कि पृथ्वी पर पेड़ों की संख्या अप्रत्याशित रूप से कम हो जायेगी. इसका नतीजा सीधे धरती के गिरते जलस्तर और बढ़ती गरमी का कारण है. प्रो रिजवी ने बताया कि इससे बचने का सीधा तरीका है कि हम प्रकृति से छेड़छाड़ नहीं करें और खुद को प्रकृति के अनुरूप ढालें.
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