नौ दिन बाद तबीयत बिगड़ी तो लाया अस्पताल

Updated at : 05 Aug 2018 5:12 AM (IST)
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नौ दिन बाद तबीयत बिगड़ी तो लाया अस्पताल

सांप काटा तो फंसे रहे ओझा गुणी में आज भी पहाड़ी क्षेत्र के लोग सांप काटने पर झाड़ फूंक पर करते हैं ज्यादा विश्वास बीमार होने पर डॉक्टर की जगह पहुंच जाते हैं ओझा के पास साहिबगंज : सूबे की सरकार अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने की दिशा में लगातार काम कर रही है. […]

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सांप काटा तो फंसे रहे ओझा गुणी में

आज भी पहाड़ी क्षेत्र के लोग सांप काटने पर झाड़ फूंक पर करते हैं ज्यादा विश्वास
बीमार होने पर डॉक्टर की जगह पहुंच जाते हैं ओझा के पास
साहिबगंज : सूबे की सरकार अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने की दिशा में लगातार काम कर रही है. दर्जनों कल्याणकारी स्वास्थ्य योजना जिलों में चलाया जा रहा है. इसके अलावा प्रचार-प्रसार व जागरूकता अभियान भी ग्राम स्तर तक चलाया जा रहा है. लेकिन दुर्भाग्य है कि सूबे के अंतिम छोर पर बसा साहिबगंज जिला जिसका 60 प्रतिशत आबादी पहाड़ी व दियारा क्षेत्र में निवास करती है. वहां आज भी अंधविश्वास कायम है. किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर लोग ओझा व झाड़ फूंक करने वाले के पास पहुंच जाते हैं. फिर खेल शुरू हो जाता है. लेकिन ठीक होने के बजाय मरीज की स्थिति और बिगड़ने लगती है.
अंत में उक्त लोगों को सदर या अन्य अस्पतालों में जाना पड़ता है. लेकिन तब तक बहुत देर हो जाती है. इसकी बानगी शनिवार को जिला सदर अस्पताल मे देखने को मिला. हुआ यूं कि बोरियो प्रखंड के बड़ा रक्सो पंचायत के दोवनी पहाड़ निवासी बोदी नाथ पहाड़िया की 20 वर्षीय पुत्री एलिना पहाड़िन को 26 जुलाई को घर जाने के क्रम में रास्ते में सांप ने डंस लिया. एलिना ने अपने घर जाकर सांप काटने की जानकारी दी. उसके परिवार वाले उसे मदनशाही गांव में झाड़ फूंक करने वाले के पास लेकर गये. झाड़ फूंक की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी. लेकिन नौ दिनों तक एलिना को राहत मिलने के बजाय उसका पैर फूलने लगा और सर्पदंश की जगह से मवाद निकालने लगा. एलिना के पिता बोदी नाथ ने उसे इलाज के लिए जिला सदर अस्पताल में भर्ती कराया. जहां चिकित्सकों ने एलिना का इलाज शुरू कर दिया.
कहते हैं चिकित्सक
सर्पदंश गंभीर मामला है. इस तरह के केस में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. रही बात झाड़ फूंक की तो वैसे लोगों पर एफआइआर होनी चाहिए जो झाड़ फूंक के नाम पर लोगों को बरगला रहे हैं. इसके चक्कर में कई लोगों की जान तक चली जाती है. अगर समय पर मरीज अस्पताल पहुंचता है तो उसे जल्द से जल्द ठीक किया जा सकता है. देर से पहुंचने पर कई समस्या हो जाती है.
– डॉ मोहन पासवान, चिकित्सा पदाधिकारी, सदर अस्पताल
50 मिनट तक रेंगती रही गाड़ियां
यहां लगता है जाम
पूर्वी फाटक से सकरूगढ़ चैती दुर्गा मंदिर से भी आगे तक, पूर्वी फाटक से सकरूगढ़ मुड़ीकटवा काली से भी आगे तक, पूर्वी फाटक से जिरवाबाड़ी ओपी तक, पूर्वी फाटक से टाउन हॉल तक जाम लगा रहा है. माल गोदाम जाने के कारण सुबह 10 बजे स्टेशन चौक से पटेल चौक व स्टेशन चौक से ग्रीन होटल कॉलेज रोड, स्टेशन चौक से घाट रोड तक तक जाम में फंसे रहे शहरवासी.
ओवरब्रिज बनने के बाद ही मिलेगी राहत
पूर्वी व पश्चिम फाटक पर जाम का नजारा आम है. रेलवे की पटरी शहर को दो भागों में बांटती है. दोनों जगह ओवरब्रिज की जरूरत है. जाम में फंस कर कई मरीजों की जान जा चुकी है. समस्या का समाधान अब तक नहीं हुआ. रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने भी साहिबगंज आकर ओवरब्रिज निर्माण का भरोसा दिया था. अगस्त 2017 तक टेंडर होकर पूर्वी पश्चिमी फाटक समीप ओवरब्रिज बनने लगेगा. लेकिन एक साल बीतने के बाद भी अब तक प्रोसेस डीपीआर में है.
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