रात भर बिठाये रखा, बाथरूम तक जाने नहीं दिया

Updated at : 19 Sep 2017 5:24 AM (IST)
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रात भर बिठाये रखा, बाथरूम तक जाने नहीं दिया

साहिबगंज : रात भर जगे रहे सदर डीएसपी ललन प्रसाद, कार्यपालक पदाधिकारी भागीरथ महतो, राजमहल थाना प्रभारी मनोज कुमार, बोरियो थाना प्रभारी सुशील कुमार, नगर थाना प्रभारी अनूप प्रसाद व दर्जनों पुलिस बल. सुबह जैसे ही पत्रकारों की टीम पांगडो गांव पहुंची डीएसपी ने आपबीती बतायी. उनकी आंखें फूली हुई थी और चेहरे पर गुस्सा […]

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साहिबगंज : रात भर जगे रहे सदर डीएसपी ललन प्रसाद, कार्यपालक पदाधिकारी भागीरथ महतो, राजमहल थाना प्रभारी मनोज कुमार, बोरियो थाना प्रभारी सुशील कुमार, नगर थाना प्रभारी अनूप प्रसाद व दर्जनों पुलिस बल. सुबह जैसे ही पत्रकारों की टीम पांगडो गांव पहुंची डीएसपी ने आपबीती बतायी. उनकी आंखें फूली हुई थी और चेहरे पर गुस्सा दिख रहा था. उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने रात भर बैठाया रखा. ना खाने के खाना दिया ना ही पीने के लिए पानी. यहां तक की बाथरूम व शौच तक नहीं जाने दिया.

घटनाक्रम एक नजर में
संध्या 7 बजे जिरवाबाड़ी थाना के दो एएसआइ को ग्रामीणों ने बनाया बंधक
रात 8 बजे इंस्पेक्टर व थाना प्रभारी पहुंचे
रात 10:30 बजे पहुंचे डीएसपी व पुलिस बल के जवान
रात एक बजे पहुंचे कार्यपालक दंडाधिकारी भागीरथ महतो
सुबह 3 बजे पहुंचे राजमहल, बोरियो, नगर व जिरवाबाड़ी के पुलिस बल
सुबह चार बजे ग्राम प्रधान व अन्य नेताओं से हुई वार्ता
सुबह सात बजे पकड़े गये हत्यारोपित
सुबह 7:30 बजे सभी आरोपितों की पहचान करायी गयी
सुबह 8 बजे सभी पुलिस पदाधिकारी एक बार फिर पहुंचे गांव
सुबह 9 बजे ग्रामीणों के साथ समझौता व मांग मानने पर
मानने ग्रामीण और मुक्त हुए सब
दी चेतावनी : थाना प्रभारी को करें िनलंबित, वरना सरकार से शिकायत
सदर डीएसपी ललन प्रसाद ने सोमवार सुबह 7 बजे एसपी पी मुरूगन को दूरभाष पर बात की. उन्होंने कहा हमें थाना प्रभारी व अन्य पुलिस बल छोड़ कर भाग गये, ग्रामीण हमें घेरे हुए थे. हमें कोई मदद नहीं मिली. ऐसे में मेरी हत्या भी हो सकती थी. उन्होंने कहा कि रात में जब हम लोग आये तो थाना प्रभारी व अन्य लोग निकल पड़े. रात भर कुर्सी में बैठे रहे. सुबह 6:30 ब जे आदिवासी समाज के कुछ लोग बाहर पेशाब कराने ले गये. उन्होंने कहा कि यदि थाना प्रभारी को एसपी ने निलंबित नहीं किया तो हम सरकार को पत्र लिखेंगे और मुख्यालय में जाकर बैठ जायेंगे. वापस लौटने के बाद दिन भर डीएसपी अपने सरकारी आवास पर रहे. कार्यालय भी नहीं गये. उन्होंने कहा कि केस पुलिस पदाधिकारी व थानेदार तथा अनुसंधानकर्ता का मामला था.
, लेकिन हमें यहां छुड़ाने आये और हम ही फंस गये.
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