वाहनों के धुएं से पर्यावरण पर संकट

Updated at : 01 Sep 2017 5:45 AM (IST)
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वाहनों के धुएं से पर्यावरण पर संकट

साहिबगंज : साहिबगंज इलाके में दर्जनों वाहन ऐसे है जो वर्षों पुराने होकर खटारा हो गये हैं. ऐसे वाहन प्रदूषण भी फैला रहे हैं. लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं. लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. ऐसे वाहनों के परिचालन की वजह है कि यहां प्रदूषण जांच की सुविधा […]

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साहिबगंज : साहिबगंज इलाके में दर्जनों वाहन ऐसे है जो वर्षों पुराने होकर खटारा हो गये हैं. ऐसे वाहन प्रदूषण भी फैला रहे हैं. लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं. लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. ऐसे वाहनों के परिचालन की वजह है कि यहां प्रदूषण जांच की सुविधा नहीं है. नियम के अनुसार जो वाहन प्रदूषण जांच के दौरान मानकों को पूरा नहीं करते हैं उन्हें परिचालन की स्वीकृति नहीं है. लेकिन यहां काेई रोक-टोक नहीं है. साहिबगंज की सड़कों पर 56755

से ज्यादा टू वीलर, कार, जीप टैक्सी, थ्री वीलर, ट्रैक्टर, ट्रेलर, ट्रक, बस का लोड है. मेंटनेंस के अभाव में साहिबगंज में निजी व कॉमर्शियल वाहन काफी प्रदूषण फैला रहे हैं. संताल परगना प्रमंडल में सिर्फ दुमका में वाहनों के प्रदूषण को जांच होती है. ऐसे में अधिकांश वाहन चालक दूरी के अभाव में वाहन चालक के प्रदूषण को जांच नहीं कराते हैं. केंद्रीय मोटर यान नियम, 1989 के नियम 115/7 के प्रावधानों को लागू करने का मतलब था कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित व प्रदूषण जांच केंद्रों को प्राथमिक करना, इनके कार्य संचालन की प्रक्रिया निर्धारित करने के लिये कई योजना बनायी गयी, लेकिन शत प्रतिशत धरातल पर नहीं उतर पायी.

पत्थर उद्योग में ज्यादातर पुराने वाहन : क्रशर, खदान क्षेत्र में पुराने वाहन धड़ल्ले से चल रहे हैं. जबकि शहर में ई रिक्शा, वैन व मोटरसाइकिल के मोटर से बना वैन बिना लाइसेंस व छोटे-छोटे बच्चों द्वारा चलाया जा रहा है. जिससे आये दिन दुर्घटना हाेने की स्थिति बनी रहती है.
ध्वनि प्रदूषण का हो रहे शिकार
वैज्ञानिक प्रगति के कारण वाहनों में तेज हार्न के उपयोग का क्रेज बढ़ा है. मनुष्य को अपना क्षमता 80 रेसियल होती है. 25 रेसियल पर शांति का वातावरण होता है. 80 रेडियल से अधिक शोर होने पर मनुष्य में अस्वस्थता आ जाती है या बेचैनी होने लगती है. 130-140 रेसियल का शोर अत्यंत घातक होता है. इससे अधिक शोर होने पर मनुष्य में बहरा होने का खतरा होता है.
कहते हैं डीटीओ
वाहनों के प्रदूषण का जांच अनिवार्य है. बगैर प्रदूषण की जांच कराये वाहनों का परिचालन करने वालों से दंड वसूलने का प्रावधान है. साहिबगंज में प्रदूषण जांच के लिए कोई केंद्र नहीं है. दुमका के अलावा गिरीडीह व धनबाद में प्रदूषण जांच का प्रमाण पत्र ले सकते हैं. अगर कोई व्यक्ति प्रदूषण जांच केंद्र खोलना चाहता है तो विभाग उसे मदद करेगा.
भागीरथ महतो, डीटीओ, साहिबगंज
कितने हैं वाहन
ट्रक 1413
बस 79
कार/स्टेशन वैगन 425
टैक्सी 483
जीप 990
तीनपहिया 1069
दो पहिया 48809
ट्रैक्टर 1889
टेलर 859
अन्य छोटे वाहन 741
वायु प्रदूषण से बीमारी का खतरा
वाहनों में डीजल, पेट्रोल, मिट्टी का तेल के जलने से कार्बन डाइऑक्साइड, मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन व अन्य गैस वायु में मिल कर उसे प्रदूषित करती हैं. बिषैले पदार्थ वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं. इससे मानव शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. बीमारी का खतरा बना रहता है.
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