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विश्व अंगदान दिवस: रिम्स में 95 ने किए नेत्रदान, 250 को किडनी का इंतजार, झारखंड में 32 ने किए किडनी दान

Updated at : 13 Aug 2023 7:20 AM (IST)
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विश्व अंगदान दिवस: रिम्स में 95 ने किए नेत्रदान, 250 को किडनी का इंतजार, झारखंड में 32 ने किए किडनी दान

हर वर्ष 13 अगस्त को ‍विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को अंगदान को लेकर जागरूक किया जा सके. इससे जरूरतमंदों को नया जीवन मिलता है. अंगदान के तहत लोग रिम्स में नेत्रदान (कॉर्निया) कर रहे हैं.

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रांची: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) में पिछले पांच साल में 95 लोगों ने अंगदान किए हैं. निधन के बाद इनका नेत्रदान (कॉर्निया) किया गया है. इससे लोगों को नयी जिंदगी मिली है. मौत के बाद भी इनकी आंखों से लोग दुनिया देख रहे हैं. करीब 250 लोग ऐसे हैं, जिन्हें किडनी की जरूरत है. इन्हें किडनीदाता का इंतजार है. झारखंड में 2019 से लेकर अब तक करीब 32 लोगों ने किडनी दान किए हैं. इसके तहत पारिवारिक सदस्यों को किडनी ट्रांसप्लांट किए गए हैं.

13 अगस्त को ‍विश्व अंगदान दिवस

हर वर्ष 13 अगस्त को ‍विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को अंगदान को लेकर जागरूक किया जा सके. इससे जरूरतमंदों को नया जीवन मिलता है. अंगदान के तहत लोग रिम्स में नेत्रदान (कॉर्निया) कर रहे हैं. झारखंड में किडनी ट्रांसप्लांट किए जा रहे हैं.

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अंगदान में किन-किन अंगों का होता है दान

अंगदान में फेफड़ा (लंग्स), हृदय (हार्ट), यकृत (लीवर), पैंक्रियाज (अग्नाशय), गुर्दा (किडनी) एवं छोटी आंत समेत अन्य का दान किया जाता है. आपको बता दें कि अंगदान की प्रक्रिया पूरी करने के बाद परिजन मृतक का अंतिम संस्कार करते हैं.

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टिश्यू (उत्तक) दान में किन-किन अंगों का होता है दान

टिश्यू (उत्तक) दान के तहत कॉर्निया (आंख), स्किन, हार्ट वॉल्व, हड्डी, कार्टलेज, लिगामेंट समेत अन्य का दान किया जाता है.

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रिम्स में 95 लोगों ने किया कॉर्नियादान (नेत्रदान)

रिम्स में 2018 से लेकर अब तक करीब 95 लोगों ने कॉर्निया दान कर लोगों को नयी जिंदगी दी है. मौत के बाद भी उनकी आंखें दुनिया देख रही हैं. पिछले दिनों नमन दिवस पर रिम्स ने नेत्रदान करनेवालों को मरणोपरांत सम्मानित किया था. इनके परिजनों को रिम्स में सम्मानित किया गया था. दानदाताओं के परिजनों ने ये सम्मान ग्रहण किया था. इस दौरान परिजन काफी भावुक हो गए थे.

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32 लोगों ने किया किडनी दान

झारखंड में 2019 से लेकर अब तक करीब 32 लोगों ने किडनी दान किए हैं. इसमें पारिवारिक सदस्यों को किडनी ट्रांसप्लांट किए गए हैं.

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ऐसे लें अंगदान का संकल्प

अंगदान के लिए रिम्स की वेबसाइट (https://www.rimsranchi.ac.in/) पर संकल्प (प्लेज) फॉर्म उपलब्ध है. इसके लिए ऑर्गन डोनेशन प्लेज पर जाकर क्लिक करें. हिंदी व अंग्रेजी में संकल्प फॉर्म दिया गया है. इसमें अंगदान की पूरी जानकारी दी गयी है. एक पेज का फॉर्म होता है. इसके लिए विस्तृत जानकारी के लिए रिम्स से भी संपर्क किया जा सकता है. इसमें फॉर्म-7 भरना होता है. पारिवारिक सदस्य व दोस्त गवाह के रूप में जरूरी होते हैं.

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250 लोगों को चाहिए किडनी

ऐसे कई लोग हैं, जिन्हें अच्छी जिंदगी के लिए किडनी की जरूरत है. रिम्स के पदाधिकारियों की मानें, तो करीब 250 लोगों को किडनी का इंतजार है. ये वेटिंग लिस्ट में हैं.

रिम्स में 95 लोगों ने किए हैं नेत्रदान

रिम्स के पीआरओ राजीव रंजन प्रभात खबर डॉट कॉम से बातचीत में कहते हैं कि पिछले पांच साल में 95 लोगों ने नेत्रदान किए हैं. जल्द ही इसकी संख्या 100 होने को है. पिछले दिनों नमन दिवस पर रिम्स ने नेत्रदान करनेवालों को मरणोपरांत सम्मानित किया था. स्वेच्छा से लोग अंगदान कर सकते हैं, ताकि किसी को नयी जिंदगी मिल सके.

अंगदान से एक कदम आगे बढ़कर लोग कर रहे देहदान

रिम्स में 48 लोगों ने देहदान का संकल्प लिया है. छह लोगों ने देहदान कर दिया है. उसका उपयोग मेडिकल की पढ़ाई करनेवाले छात्र कर भी रहे हैं. आपको बता दें कि देहदान में पूरा शरीर निधन के बाद परिवारवाले दान कर देते हैं.

चमारी राम और उनकी पत्नी लिया देहदान का संकल्प

चतरा जिले के पथलगड़ा गांव के 80 वर्षीय निवासी चमारी राम और उनकी पत्नी ने निधन के बाद अपना शरीर राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान के मेडिकल छात्रों की पढ़ाई के लिए दान करने का निर्णय लिया है. देहदान करने के लिए संकल्प लेने वालों की संख्या 48 हो गयी है. इनमें से 6 देह रिम्स को प्राप्त हो चुकी है.

कौन हैं चमारी राम

आपको बता दें कि चमारी राम चतरा जिले के सिद्धो प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद से वर्ष 2000 में सेवानिवृत हुए हैं. पर्यावरण संरक्षण के लिए उन्होंने अपने इलाके में कई कदम उठाए हैं. समय-समय पर पौधरोपण करते रहते हैं. चमारी महतो और उनकी धर्मपत्नी की इच्छा थी कि उनकी देह समाज के कल्याण के लिए काम आ सके. इसलिए उन्होंने देहदान का निर्णय लिया.

ऐसे लें देहदान का संकल्प

एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों को शारीरिक संरचना की शिक्षा देने में इनके शरीर का उपयोग किया जाएगा. एनाटॉमी विभाग में छात्रों को शरीर का वाह्य, आंतरिक और सूक्ष्मदर्शी अध्ययन कराया जाएगा. रिम्स की वेबसाइट पर देहदान (बॉडी डोनेशन) फॉर्म उपलब्ध है. देहदान के इच्छुक लोग इस फॉर्म को दो सेट में भरकर रिम्स के एनाटोमी विभाग में जमा कर सकते हैं. संकल्प लेनेवाले लोगों में किसी की मृत्यु के बाद सूचना मिलने पर रिम्स से एम्बुलेंस भेजी जाती है. परिजनों से इसके लिए पैसे नहीं लिए जाते हैं.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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