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डरना या घुटने टेकना आदिवासियों के DNA में नहीं, घुटना टेकना आप जानते हैं, भानु प्रताप पर बरसे हेमंत सोरेन

Updated at : 11 Nov 2022 2:10 PM (IST)
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डरना या घुटने टेकना आदिवासियों के DNA में नहीं, घुटना टेकना आप जानते हैं, भानु प्रताप पर बरसे हेमंत सोरेन

Hemant Soren: हेमंत सोरेन ने कहा कि इस राज्य के लोग स्वाभिमानी होते हैं. मान-सम्मान से समझौता नहीं करते. मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसियां भाजपा की रिश्तेदार बन गयीं हैं. उन्होंने कहा कि लाखों-करोड़ों रुपये के साथ इनके लोग पकड़े जाते हैं, तो एजेंसियां उसे घर तक छोड़कर आती हैं.

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Hemant Soren: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक भानु प्रताप शाही को भी आड़े हाथ लिया. शुक्रवार को आहूत विधानसभा के एक दिन के विशेष सत्र के दौरान प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री भानु प्रताप शाही ने हंगामा किया, तो मुख्यमंत्री ने कहा, ‘इतना हल्ला करते हैं भानु जी, क्या खाकर आते हैं. समझ नहीं आता, बहुत व्यवधान डालते हैं.’ सत्र के दौरान हल्ला करने के लिए स्पीकर ने भी भानु प्रताप शाही को नसीहत दी. स्पीकर ने कहा कि कितना अच्छा होता, अगर आपने अपना संशोधन दिया होता.

भाजपा की गोद में बैठ गये भानु प्रताप शाही: हेमंत सोरेन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि भानु प्रताप शाही जब दूसरी पार्टी में थे, तब भारतीय जनता पार्टी की सरकार को पानी पी-पी कर कोसते थे. आज उनकी गोद में बैठ गये हैं और सदन में व्यवधान उत्पन्न कर रहे हैं. भानु प्रताप ने इस पर कुछ जवाब दिया, तो झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि डरना या घुटने टेकना आदिवासियों के डीएनए में नहीं है. घुटना टेकना आपलोग जानते हैं.

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केंद्रीय जांच एजेंसियां भाजपा की रिश्तेदार

हेमंत सोरेन ने कहा कि इस राज्य के लोग स्वाभिमानी होते हैं. मान-सम्मान से समझौता नहीं करते. मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसियां भाजपा की रिश्तेदार बन गयीं हैं. उन्होंने कहा कि लाखों-करोड़ों रुपये के साथ इनके लोग पकड़े जाते हैं, तो एजेंसियां उसे घर तक छोड़कर आती हैं. किसी के घर में चावल का एक दाना नहीं मिलता, उसे जेल में डाल देते हैं. उन्होंने कहा कि ‘रामचंद्र कह गये सिया से, ऐसा कलयुग आयेगा. हंस चुगेगा दाना तुनका, कौआ मोती खायेगा’ वाली हालत हो गयी है.

स्थानीय नीति और आरक्षण से जुड़े दो बिल पास

बता दें कि झारखंड मुक्ति मोर्चा-कांग्रेस-राष्ट्रीय जनता दल की महागठबंधन सरकार ने ‘झारखंड स्थानीय व्यक्तियों की परिभाषा, परिणामी, सामाजिक, संस्कृति एवं अन्य लाभ को ऐसे स्थानीय व्यक्तियों तक विस्तारित करने के लिए विधेयक 2022’ और ‘झारखंड पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों में आरक्षण संशोधन विधेयक 2022’ को पारित कराने के लिए 11 नवंबर 2022 को एक दिन का विशेष सत्र आहूत किया था. ध्वनिमत से दोनों विधेयकों को सदन ने पारित कर दिया. स्थानीय नीति में माले विधायक विनोद सिंह के प्रस्ताव को सरकार ने स्वीकार किया, बाकी संशोधनों को खारिज कर दिया गया.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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