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''आवास योजना’ के रहते कच्चे घरों में रहने को विवश है आदिवासी परिवार

Updated at : 29 Dec 2024 6:38 PM (IST)
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''आवास योजना’ के रहते कच्चे घरों में रहने को विवश है आदिवासी परिवार

प्रखंड के मचवाटांड़ के आदिवासी परिवार 'आवास योजना’ के रहते कच्चे घरों में रहने को विवश हैं.

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29 खलारी 01 :-अपने कच्चे मकान के बाहर खड़े बलदेव मुंडा.

प्रतिनिधि, खलारी. प्रखंड के मचवाटांड़ के आदिवासी परिवार ”आवास योजना’ के रहते कच्चे घरों में रहने को विवश हैं. प्रखंड के चुरी दक्षिणी पंचायत के मचवाटांड़ में 30 घर आदिवासी परिवार रहते हैं. सभी का घर मिट्टी का है. ज्ञात हो कि प्रखंड में प्रधानमंत्री आवास, अबुआ आवास, आंबेडकर आवास योजना के तहत सैकड़ों लोगों का आवास बना है. अभी हाल ही में झारखंड सरकार द्वारा शुरू की गयी अबुआ आवास योजना के तहत 500 लोगों का चयन हुआ, पर जिसको जरूरत थी, आज वह मिट्टी के घरों में रहा है. इस योजना के माध्यम से उन्हें छत प्रदान करना है, जो बेघर हैं. यानी वैसे लोग जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े हैं और जिनके पास मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं, लोग आज भी इस योजना से वंचित हैं. इसकी वजह से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. गांव की महिला अनिता देवी ने बताया कि कच्चे घरों में बार-बार लिपाई-पुताई करनी पड़ती है. इस काम में व्यस्तता के कारण लड़कियों की शिक्षा प्रभावित होती है. अगर समय पर लिपाई-पुताई न हो तो घर में सांप या अन्य छोटे विषैले जानवरों के आने का खतरा बना रहता है. बारिश के मौसम में खतरा और भी ज्यादा हो जाता है. गांव की लड़कियां कहती हैं कि हमें कच्चे घर में रहना अच्छा नहीं लगता है, लेकिन आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि हम पक्के मकानों में रह सकें. बताती हैं कि हमें बार-बार इसकी लिपाई करनी पड़ती है और उसके लिए मिट्टी लेने बहुत दूर जाना पड़ता है. बारिश के दिनों में हमारे घरों में पानी टपकता रहता है. जिससे पूरी जमीन गीली हो जाती है. हम परिवार के लोग किसी प्रकार रात काटते हैं. यदि कभी रात में तेज आंधी तूफान और भारी बारिश होती है तो वह हमारे लिए सबसे मुश्किल का समय होता है. उस समय हमारे लिए उस घर का होना और नहीं होना, सब बराबर हो जाता है. वहीं गर्मी के दिनों में चलनेवाली लू से भी हमारी दिनचर्या अस्त-व्यस्त हो जाती है. तेज लू के कारण हमें खाना बनाने में बहुत दिक्कत होती है. बताती हैं कि बारिश के मौसम में हमें कई दिनों तक भूखा भी रहना पड़ता है. घर के अंदर भी हर जगह पानी टपकने के कारण हमें खाना बनाने में काफी कठिनाई होती है.

आर्थिक रूप से पिछड़ा है समाज :

पंचू मुंडा, मेघु मुंडा, राजेश मुंडा, बलदेव मुंडा ने बताया कि हमारा गांव आर्थिक और सामाजिक रूप से बहुत पिछड़ा हुआ है. समाज में साक्षरता की दर भी बहुत कम है. अधिकतर पुरुष दिहाड़ी करते हैं. वहीं महिला साक्षरता की बात करें तो यह चिंताजनक स्थिति में है. ऐसे में इस समाज को अबुआ आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण जानकारी का अभाव है. यही कारण है कि वर्षों से यह समाज कच्चे घरों में रहने को विवश हैं. कच्चे घर होने के कारण हमें शादी-ब्याह जैसे उत्सवों में भी कई तरह की दिक्कतों सामना करना पड़ता है. बताया कि पंचायत के मुखिया से भी कई बार गांव के लोगों ने इस समस्या के बारे में अवगत कराया, पर आज तक इसका लाभ नही मिला.

क्या कहते हैं मुखिया :

मुखिया मलका मुंडा ने बताया कि अबुआ आवास के लिए गांव के लोगों को फार्म दिया गया था. पर लोग फार्म भर कर जमा नहीं किये. जिसके कारण इसका लाभ नहीं मिला. मुखिया ने कहा कि बीडीओ से बात कर इनलोगों को आवास दिलवाने का प्रयास करेंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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