Ranchi News : दीपों से जगमगायेंगे घर, प्रदोष काल में करें मां लक्ष्मी की आराधना

Published by : Raj Kumar Updated At : 19 Oct 2025 7:42 PM

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धन वैभव और सुख समृद्धि का त्योहार दीपावली आज है. इसको लेकर घर को सजा-संवार लिया गया है.

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आज दोपहर 2:55 बजे से अमावस्या, शाम 5:17 से 7:56 तक रहेगा लक्ष्मी पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त, वृष लग्न गृहस्थों के लिए, सिंह लग्न व्यापारियों के लिए शुभ

भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की आराधना से घर में आयेगा धन-वैभव

रांची. धन वैभव और सुख समृद्धि का त्योहार दीपावली आज है. इसको लेकर घर को सजा-संवार लिया गया है. शाम में घरों को दीपों से रौशन करने का कार्य शुरू किया जायेगा. इससे पूर्व मंदिर, जलाशय और गोशाला आदि को रौशन किया जायेगा. सोमवार की दोपहर 2.55 बजे के बाद से अमावस्या लग रहा है, जो मंगलवार की शाम 4.26 बजे तक रहेगा. वहीं, मंगलवार को स्नान-दान की अमावस्या है. बुधवार को चौथे दिन गोवर्द्धन पूजा होगी. अंतिम दिन भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा होगी. पंडित कौशल कुमार मिश्र ने कहा कि मां लक्ष्मी की पूजा के लिए प्रदोष काल और वृष लग्न को प्राथमिकता दी जाती है. गृहस्थों के लिए यह पूजा का बेहतर समय है. वहीं, व्यापारिक प्रतिष्ठान वालों के लिए सिंह लग्न का समय उपयुक्त माना गया है. हालांकि लोग अपनी सुविधा के अनुसार भी पूजा-अर्चना कर सकते हैं. पंडित श्यामानंद पांडेय ने कहा कि प्रदोष काल से पूजा शुरू हो जायेगी. हालांकि जो लोग दिन में पूजा-अर्चना करना चाहते हैं. वे कुंभ लग्न में पूजा कर सकते हैं. यह स्थिर लग्न है. मां लक्ष्मी की पूजा में स्थिर लग्न को प्रधानता दी जाती है. वहीं, व्यापारिक प्रतिष्ठान वाले के लिए सिंह लग्न में पूजा करना बेहतर माना गया है.

दीपावली के दिन प्रदोष काल :

शाम 5:17 से 7:56. कुंभ : दिन के 2:01 से 3:34. वृष : 6:44 से 8:43. सिंह : रात 1:12 से 3:24 बजे तक. निशिथ काल रात 11:33 से 12:23 बजे तक है.

चौघड़िया दिन : चर : 12:59-2:25. लाभ 2:25 से 3:51. अमृत 3:51 से 5:17.चौघड़िया रात : चर 5:17 से 6:51. लाभ रात 9:59 से 11:33. शुभ 1:07 से 2:41. अमृत 2:41 से 4:15. चर 4:15 से 5:49.

कैसे करें मां लक्ष्मी की आराधना

मां लक्ष्मी की आराधना स्वयं अथवा पंडित जी के माध्यम से की जा सकती है. पंडित श्यामानंद पांडेय ने कहा कि यदि स्वयं से पूजन कर रहे हैं तो सर्व प्रथम पूजनीय भगवान गणेश और धन की देवी माता लक्ष्मी के पूजन स्थल को गंगा जल से पवित्र कर अपने परिवार जन के साथ बैठ कर शांत चितभाव से पूजन करें. पूजा शुरू करने से पहले सभी पूजन सामग्री को एक जगह एकत्रित कर लें ताकि पूजा के समय परेशान न होना पड़े. पूजा के लिए चौकी अथवा तख्त ले लें. यदि यह दोनों नहीं है तो रंगीन कागज के ऊपर आसन बिछाकर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति अथवा तस्वीर रख लें. उसके बाद उनके सामने एक कलश रखें. इसमें सिक्का, पंचपल्लव सहित अक्षत डालकर उसके ऊपर नारियल रखें. भगवान गणेश जी का ध्यान करें. कलश स्थापना करें. षोडश्मात्रिका, नवग्रह, दस दिगपाल, पांच लोकपाल का आह्वान कर उनकी पूजा करें. गणेश-लक्ष्मी की पूजा के बाद माता काली, मां सरस्वती और अपने कुलदेवी की पूजा करें. पूजा-अर्चना के बाद संभव हो तो हवन कर लें नहीं तो आरती कर माता के आगे शीश झुका लें. पूजा के बाद अपने परिवार के बड़े को प्रणाम कर आशीर्वाद ले लें. इसके बाद अपने से सभी छोटे को दिवाली की शुभकामना देकर प्रसाद का वितरण कर अतिशबाजी आदि कर खुशी का इजहार करें.

इससे पूर्व ॐ गणेशाय नमः, ॐ लक्ष्मीनारायणाय नमः समेत अन्य मंत्रों का जाप कर लें. पंडित जी के नाम का दक्षिणा निकालकर किसी पंडित जी अथवा जरूरतमंद अथवा दान पेटी में डाल दें.

पूजन सामग्री : अक्षत, द्रव्य, पंचपल्लव, कलश, ढक्कन, दीपक, कौड़ी, हल्दी, पोटली, कमलगट्टा, जनेउ, घी व तेल, गंगाजल, शुद्ध जल, शालू कपड़ा, आसन, भगवान का कपड़ा, माला समेत अन्य सामाग्री.

प्रसाद : विभिन्न तरह के मौसमी फल, मिठाई, खीर, बताशे, लावा, मूरही समेत अन्य कुछ.

फूल : गेंदा, कमल समेत अन्य फूल.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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