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कोयला खदानों का जल बनेगा जीवनदायी, झारखंड में शुरूहोगा पायलट प्रोजेक्ट

Updated at : 16 Sep 2025 12:42 AM (IST)
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कोयला खदानों का जल बनेगा जीवनदायी, झारखंड में शुरूहोगा पायलट प्रोजेक्ट

प्रधानमंत्री के विशेष निर्देश के बाद वर्षों से राज्य के कोयला खदानों में जमा पानी को उपयोगी बनाया जायेगा.

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मनोज सिंह, रांची. प्रधानमंत्री के विशेष निर्देश के बाद वर्षों से राज्य के कोयला खदानों में जमा पानी को उपयोगी बनाया जायेगा. यह काम पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है. इन खदानों में 51 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा है. सभी खदानें कोल इंडिया की दो कंपनियों की हैं. इसमें सीसीएल की पांच और बीसीसीएल की तीन खदानों को चिन्हित किया गया है. सीएमपीडीआइ तकनीकी सलाहकार की भूमिका निभायेगी. प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद कोयला मंत्रालय ने झारखंड की सभी खदानों में जमा पानी का अध्ययन कराया था.

लगाया जायेगा ट्रिटमेंट प्लांट

इन खदानों में जमा पानी का ट्रिटमेंट किया जायेगा. इसके खर्च का वहन कोयला कंपनियां करेंगी. जिस कंपनी के क्षेत्र में खदान होगी, ट्रिटमेंट की जिम्मेदारी उसी की होगी. प्रति दिन 9900 किलोलीटर पानी के ट्रिटमेंट का लक्ष्य रखा गया है. ट्रिटमेंट के बाद इस पानी का घरेलू उपयोग, सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों में इस्तेमाल किया जायेगा. सीएमपीडीआइ के पूर्व अध्ययन में पाया गया है कि हल्का ट्रिटमेंट कर खदानों का पानी पीने योग्य बनाया जा सकता है. इसका लाभ स्थानीय लोगों को भी मिलेगा.

पायलट प्रोजेक्ट में चिन्हित खदानें

पायलट प्रोजेक्ट में सीसीएल की गिद्दी ए और सी, सौंदाडीह, भुरकुंडा और राय बचरा खदान को शामिल किया गया है. बीसीसीएल की सुदामडीह, लोहापट्टी और मुरलाडीह खदान भी चिन्हित की गयी है. प्रयोग सफल होने पर अन्य खदानों के जल का भी ट्रिटमेंट कर उपयोग किया जायेगा.

437 खदानों के जल का हुआ मूल्यांकन

प्रधानमंत्री के निर्देश पर कोल इंडिया ने सीएमपीडीआइ से सक्रिय और परित्यक्त 473 कोयला खदानों में मौजूद पानी का मूल्यांकन कराया. इससे पता चला कि प्रति वर्ष अनुमानित दो लाख 260 किलोलीटर अतिरिक्त जल मिल सकता है. अधिकांश खदानों का जल तुलनात्मक रूप से अच्छी गुणवत्ता का होता है. मामूली उपचार के बाद यह घरेलू, औद्योगिक और कृषि उपयोग के लिए उपयुक्त हो सकता है. उपचारित जल को स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी से बोतलबंद पानी के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है. इसके प्रदर्शन और अनुसंधान के लिए झारखंड सहित छह राज्यों में 22 पायलट परियोजनाओं की पहचान की गयी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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