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जनजातीय अस्मिता की आवाज हमेशा के लिए हुई खामोश

Updated at : 06 Aug 2025 9:27 PM (IST)
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जनजातीय अस्मिता की आवाज हमेशा के लिए हुई खामोश

संघर्ष, न्याय और समानता की आवाज थमते ही एक युग का अंत हो गया.

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रातू.

संघर्ष, न्याय और समानता की आवाज थमते ही एक युग का अंत हो गया. झारखंड आंदोलन के महानायक दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन राज्य के लिए अपूरणीय क्षति है. उन्होंने सामाजिक चेतना और संघर्ष की जो विरासत छोड़ी है, वह झारखंड के इतिहास में सदैव जीवित रहेगी. उक्त बातें पॉवर लिफ्टिंग एसोसिएशन झारखंड के चेयरमैन सह शाहदेव युवा संगठन छोटानागपुर के अध्यक्ष लाल धर्मराज नाथ शाहदेव (पिंकू लाल) ने झारखंड के माटी के लाल शिबू सोरेन के लिए आयोजित श्रद्धांजलि सभा में कही. उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन ने झारखंड की पहचान, अस्तित्व और स्वायत्तता के लिए पूरा जीवन समर्पित कर दिया. उनके योगदान की नींव पर आज का झारखंड खड़ा है. उन्होंने हमेशा जल, जंगल व जमीन के अधिकार एवं आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए आजीवन संघर्ष किया. मौके पर सुधा देवी, रंजन लाल, शिवकुमार, रोहित उरांव, बिना देवी, राजेश उरांव आदि उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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CHANDRASHEKHAR UPADHEY

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