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RANCHI NEWS : झारखंड के कुछ जिलों में अब भी 40 फीसदी बच्चे घरों में ले रहे जन्म

Updated at : 04 Nov 2024 12:49 AM (IST)
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नीति आयोग की रिपोर्ट में खुलासा

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बिपिन सिंह, रांचीझारखंड के कुछ जिलों में संस्थागत प्रसव का अब भी बुरा हाल है. राज्य के कुछ जिलों में 60 प्रतिशत महिलाओं का ही संस्थागत प्रसव हो रहा है. यानी करीब 40% प्रतिशत बच्चे अब भी घरों में ही जन्म ले रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में अब भी अस्पतालों की जगह घरेलू दाई प्रसव करा रही हैं, जो सुरक्षित नहीं है. इस बात का खुलासा स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा रिपोर्ट में हुई है. विभाग ने हाल ही में हेल्थ मैनेजमेंट इंर्फोमेशन सिस्टम (एचएमआइएस) में दर्ज की जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं का विश्लेषण के बाद यह खुलासा किया है. इसमें झारखंड के मातृत्व स्वास्थ्य, शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार नियोजन और छोटे-बड़े अस्पतालों के ओपीडी और आइपीडी के आंकड़ों को खंगाला गया. इसमें ऑपरेशन से कराये जाने वाले सी-सेक्शन से होने वाले नवजात के आंकड़े शामिल हैं. अध्ययन के निष्कर्ष में कहा गया है कि प्रसव सुविधाओं में वृद्धि के बावजूद इन क्षेत्रों में नवजात और शिशु मृत्यु दर उच्च बनी हुई है. रिपोर्ट सामने आने के बाद एनएचएम के अभियान निदेशक ने सभी सिविल सर्जन को पत्र लिखकर सुधार लाने के निर्देश दिये हैं. आपको बता दें कि भारत में सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करने की शुरुआत हुए डेढ़ दशक हो चुका है.

नीति आयोग को कार्यक्रम तैयार करने में हो रही परेशानी

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के इन आंकड़ों का उपयोग समय-समय पर नीति आयोग द्वारा कार्यक्रम तैयार करने के लिए उपयोग में लाया जाता है. रिपोर्ट की पड़ताल के बाद वित्तीय वर्ष 2024 से मार्च 2025 के अप्रैल से सितंबर महीने के आधार पर तैयार स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ. इसमें कुछ जिलों का परिणाम औसत से कहीं नीचे दर्ज है. ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव का उपयोग सबसे कम हो रहा है.

राज्य के ज्यादातर जिलों का औसत बेहतर

वहीं, राज्य के ज्यादातर जिलों में औसतन 80 प्रतिशत महिलाओं का संस्थागत प्रसव हो रहा है. रिपोर्ट के अनुसार रांची में औसत के करीब ही संस्थागत प्रसव हो रहे हैं. यहां करीब 84 प्रतिशत संस्थागत प्रसव हुये हैं. वहीं, धनबाद, दुमका, गढ़वा, हजारीबाग जैसे जिलों का प्रदर्शन रांची से बेहतर है. यहां पिछले कुछ महीनों के दौरान करीब 90% संस्थागत प्रसव हुए हैं. राज्य में सबसे अधिक संस्थागत प्रसव 41,862 (98%) गढ़वा में हुआ है. दो जिले लोहरदगा और कोल्हान में सरायकेला-खरसावां में भी राज्य में औसतन से कम संस्थागत प्रसव हुए हैं. दोनों जिले में 75-77 प्रतिशत संस्थागत प्रसव हुए.

संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने में सहिया की अहम भूमिका

जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने में स्वास्थ्य सहियाओं का भी अहम योगदान रहा है. गांव स्तर पर गर्भवती महिलाओं के नियमित टीकाकरण से लेकर उनके संस्थागत प्रसव तक में सहियाओं की अहम भूमिका रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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