झारखंड में मछुआरों की आय बढ़ाने को JMM सरकार का नया प्लान, मत्स्य शिकार के लिए मिलेगी स्पेशल ट्रेनिंग
Published by : Sameer Oraon Updated At : 29 May 2026 6:05 PM
डैम के पास मौजूद मछुआरे
Jharkhand Fisheries Survey: ICAR-CIFT मुंबई के वैज्ञानिक डॉ. श्रवण कुमार शर्मा के नेतृत्व में झारखंड के 6 प्रमुख जलाशयों का सर्वेक्षण किया गया. अब गेतलसूद, मैथन और हटिया जैसे जलाशयों में मछुआरों को सौर-विद्युत चालित नावों और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा.
रांची से मनोज कुमार सिंह की रिपोर्ट
Jharkhand Fisheries Survey, रांची : झारखंड के प्रमुख जलाशयों में मत्स्य पालन (Fisheries) और मछली पकड़ने की दक्षता को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है. राज्य के जलाशयों में मत्स्य शिकार की वर्तमान स्थिति और आधुनिक तकनीकों की संभावनाओं का आकलन करने के लिए एक विशेष क्षेत्रीय सर्वेक्षण संपन्न किया गया है. यह सर्वे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की विंग केंद्रीय मात्स्यिकी प्रौद्योगिकी संस्थान (CIFT), मुंबई अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. श्रवण कुमार शर्मा के नेतृत्व में पूरा हुआ.
सर्वेक्षण के लिए इन इलाकों में किया गया भ्रमण
विशेषज्ञों की टीम ने इस सर्वेक्षण के दौरान झारखंड के प्रमुख जलाशयों- गेतलसूद, तेनुघाट, कांके, हटिया, मैथन और पंचेत का विस्तृत भ्रमण किया. टीम ने वहां उपलब्ध मत्स्य संसाधनों, मछली पकड़ने की पारंपरिक पद्धतियों, इस्तेमाल हो रहे जालों, नावों और स्थानीय मछुआरों की बुनियादी समस्याओं का जमीनी अध्ययन किया. इसके साथ ही स्थानीय मछुआरों, मत्स्य सहकारी समितियों (Fisheries Co-operative Societies) और अन्य स्टेकहोल्डर्स से सीधा संवाद कर व्यावहारिक चुनौतियों व उनके संभावित तकनीकी समाधानों की सूची तैयार की.
संभावनाएं अपार, आधुनिक उपकरणों की भारी कमी
सर्वेक्षण की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि झारखंड के जलाशयों में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं. हालांकि, वैज्ञानिक मत्स्य शिकार तकनीकों की कमी, आधुनिक व चयनात्मक (Selective) जालों का अभाव, असुरक्षित नावें और उचित प्रशिक्षण न मिलना इस राह में सबसे बड़ी बाधाएं हैं. रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जलाशयों की भौगोलिक और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अब क्षेत्र विशेष (Region-Specific) की तकनीकों को अपनाने की सख्त जरूरत है.
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फ्यूल का खर्च बचाने के लिए चलेंगी ऊर्जा चालित नावें
इस व्यापक सर्वे के आधार पर अब राज्य के मछुआरों के लिए ‘उन्नत मत्स्य प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण कार्यक्रम’ शुरू करने का ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है. इसके तहत मछुआरों को निम्नलिखित तकनीकी पहलुओं पर विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी.
- साइंटिफिक तरीके से कम समय में ज्यादा मछली पकड़ने की विधा सिखाई जाएगी
- पर्यावरण और मत्स्य संपदा के अनुकूल चयनात्मक जालों का उपयोग.
- ईंधन का खर्च कम करने के लिए सौर (Solar) और विद्युत (Electric) ऊर्जा आधारित नावों का संचालन.
- गहरे पानी में नाव संचालन के दौरान सुरक्षा उपकरण और संसाधनों का सतत (Sustainable) उपयोग.
- भविष्य में चयनित जलाशयों में इन आधुनिक जालों और सौर नावों का लाइव डेमो (प्रदर्शन) भी किया जाएगा, जिससे मछुआरों की आय बढ़ेगी और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होगा.
मछली पालन से बढ़ेगा मुनाफा
इस संबंध में राज्य के मत्स्य निदेशक अमरेंद्र कुमार ने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों, सही प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरणों के जरिए झारखंड में मत्स्य उत्पादन के साथ-साथ मछुआरों की आजीविका में ऐतिहासिक सुधार लाया जा सकता है. स्थानीय जरूरतों को देखते हुए सीआइएफटी (CIFT) के सहयोग से इस तकनीकी प्रसार कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा. वहीं, डॉ. श्रवण शर्मा ने भरोसा जताया कि यह पहल झारखंड में स्वच्छ, ऊर्जा दक्ष और टिकाऊ (Sustainable) मत्स्य शिकार प्रणाली को बढ़ावा देने और मछुआरों के क्षमता निर्माण (Capacity Building) में मील का पत्थर साबित होगी.
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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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