आय से अधिक संपत्ति मामले में बीएसएनएल अधिकारी को तीन साल की सजा, 25 लाख का जुर्माना
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 29 May 2026 5:25 PM
सीबीआई की विशेष अदालत ने सजा सुनाई. प्रतीकात्मक फोटो.
Ranchi News: आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने बीएसएनएल अधिकारी राम विनोद सिंह को तीन साल की सजा सुनाई है. अदालत ने उन पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. सीबीआई जांच में 34 लाख रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
रांची से प्रवीण मुंडा की रिपोर्ट
Ranchi News: आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश की अदालत ने बीएसएनएल के अधिकारी राम विनोद सिंह को दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा सुनाई है. अदालत ने अभियुक्त पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना नहीं देने की स्थिति में एक वर्ष की साधारण कैद अतिरिक्त रूप से भुगतनी होगी.
बीएसएनएल हजारीबाग में था पदस्थापित
जानकारी के अनुसार अभियुक्त राम विनोद सिंह बीएसएनएल हजारीबाग में कार्यरत था. जांच के दौरान यह सामने आया कि उसने अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की थी. सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 1983 से 2007 के बीच उसने लगभग 34 लाख रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति जमा की थी.
2007 में दर्ज हुआ था मामला
इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई ने वर्ष 2007 में केस दर्ज किया था. आरोप था कि सरकारी पद पर रहते हुए राम विनोद सिंह ने अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की और उसे छिपाने का प्रयास किया. मामला दर्ज होने के बाद सीबीआई की टीम ने अभियुक्त के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की थी. जांच एजेंसी को रेड के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और संपत्ति से जुड़े कागजात मिले थे.
छापेमारी में मिले थे नकद और दस्तावेज
सीबीआई की छापेमारी के दौरान अभियुक्त के आवास से 68 हजार रुपये नकद बरामद किए गए थे. इसके अलावा कई अचल संपत्तियों और निवेश से संबंधित दस्तावेज भी जब्त किए गए थे. जांच एजेंसी ने इन दस्तावेजों के आधार पर आय और संपत्ति का विस्तृत आकलन किया था. सीबीआई के अनुसार अभियुक्त की घोषित आय और वास्तविक संपत्ति में भारी अंतर पाया गया था. इसी आधार पर अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई थी.
65 गवाहों की हुई थी गवाही
मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से अदालत में 65 गवाहों की गवाही कराई गई. गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त को दोषी माना और सजा सुनाई. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सरकारी पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करना गंभीर अपराध है. ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे.
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फैसले को माना जा रहा महत्वपूर्ण
सीबीआई कोर्ट के इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है. कानूनी जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में सजा मिलने से सरकारी तंत्र में गलत तरीके से संपत्ति अर्जित करने वालों को कड़ा संदेश जाएगा.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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