जनमन आवास के लाभुकों की अटकी किस्त, महीनों से अधूरे पड़े कई आवास

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 29 May 2026 4:56 PM

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सोनी महारानी का कच्चा मकान (ऊपर) और महीनों से अधूरा पड़ा उसका जनमन आवास (नीचे). फोटो: प्रभात खबर

Dumka News: दुमका के काठीकुंड में पीएम जनमन आवास योजना के कई लाभुक महीनों से दूसरी और तीसरी किस्त का इंतजार कर रहे हैं. भुगतान नहीं मिलने से सैकड़ों आवास अधूरे पड़े हैं और बरसात से पहले गरीब परिवारों की चिंता बढ़ गई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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काठीकुंड से अभिषेक कुमार की रिपोर्ट

Dumka News: बरसात का मौसम नजदीक है, लेकिन दुमका जिले के काठीकुंड प्रखंड में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के तहत बनने वाले कई आवास अब तक अधूरे पड़े हुए हैं. विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह यानी पीवीटीजी परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में लाभुकों को समय पर किस्त नहीं मिलने से निर्माण कार्य ठप पड़ गया है. कई परिवार आज भी मिट्टी और खपरैल के पुराने घरों में रहने को मजबूर हैं.

दूसरी और तीसरी किस्त के इंतजार में लाभुक

लाभुकों का कहना है कि दूसरी और तीसरी किस्त के लिए महीनों पहले जियो टैगिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी, लेकिन अब तक राशि उनके खाते में नहीं पहुंची है. इसके कारण अधूरे घरों का निर्माण कार्य रुक गया है. लाभुक पंचायत से लेकर प्रखंड कार्यालय तक लगातार चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है. प्रखंड आवास कॉर्डिनेटर से मिली जानकारी के अनुसार काठीकुंड प्रखंड में वर्तमान में जनमन आवास योजना के तहत 500 से अधिक आवास स्वीकृत हैं. इनमें से अब तक करीब 140 आवास ही पूर्ण हो पाए हैं. बड़ी संख्या में आवास अधूरे पड़े हुए हैं. विभाग की ओर से राशि की कमी और तकनीकी प्रक्रिया में त्रुटियों को इसकी मुख्य वजह बताया जा रहा है.

डुमरिया गांव में महीनों से रुका निर्माण

बड़ा चापुड़िया पंचायत अंतर्गत डुमरिया गांव की लाभुक सोनी महारानी का आवास पिछले सात से आठ महीने से अधूरा पड़ा हुआ है. वर्तमान में वह अपने पुराने मिट्टी के मकान में रह रही हैं. उन्होंने बताया कि अब तक उनका घर बन जाना चाहिए था, लेकिन किस्त नहीं मिलने से निर्माण कार्य रुक गया है. बरसात आने से उन्हें डर सता रहा है कि कहीं पुराना घर ढह न जाए. इसी गांव के लाभुक बाबूलाल देहरी और संतोष कुमार देहरी ने बताया कि तीसरी किस्त के लिए जियो टैग हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हुआ है. इससे उनका आवास निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है.

पुसाल्डी गांव के लाभुक भी परेशान

बड़ा चापुड़िया पंचायत के पुसाल्डी गांव में भी कई लाभुक इसी समस्या से जूझ रहे हैं. लाभुक फुलमुनी देवी और सत्येंद्र देहरी ने बताया कि तीसरी किस्त के लिए सात से आठ महीने पहले जियो टैगिंग की गई थी, लेकिन अब तक खाते में राशि नहीं आई है. वहीं फुलमुनी रानी, रामी रानी, पूना देहरी और रविशंकर गृही ने कहा कि दूसरी किस्त के लिए कई महीने पहले प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी, लेकिन भुगतान नहीं मिलने के कारण उनका आवास निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है.

एक साल से लंबित है भुगतान

बांझीआम गांव के लाभुक वीरेंद्र देहरी ने बताया कि दूसरी किस्त के लिए लगभग एक वर्ष पहले जियो टैगिंग हो चुकी है, लेकिन आज तक भुगतान नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अपने स्तर से निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं.

लाभुकों ने सुनाई अपनी पीड़ा

लाभुक लक्ष्मी रानी ने बताया कि तीसरी किस्त के लिए जियो टैग कई महीने पहले ही पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक राशि खाते में नहीं पहुंची है. उन्होंने कहा कि बरसात नजदीक आने से परिवार की चिंता बढ़ गई है और कार्यालय का चक्कर लगाने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल रहा है. वहीं सत्येंद्र देहरी ने कहा कि मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है. किस्त नहीं मिलने से घर की ढलाई तक नहीं हो पा रही है. उन्होंने प्रशासन से जल्द राशि जारी करने की मांग की ताकि बारिश से पहले सिर छिपाने के लिए छत मिल सके.

मुखिया ने उठाए सवाल

बड़ाचापुड़िया पंचायत की मुखिया चांदनी देवी ने कहा कि पंचायत में कई लाभुक ऐसे हैं जिनका महीनों पहले जियो टैग हो चुका है, लेकिन भुगतान नहीं हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि जब आवास कॉर्डिनेटर से जानकारी मांगी जाती है तो हर बार मामला जिला स्तर पर लंबित बताकर पल्ला झाड़ लिया जाता है. उन्होंने कहा कि बरसात का मौसम सिर पर है और गरीब परिवारों के घर अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं. ऐसे में यदि किसी परिवार को नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा.

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बीडीओ ने तकनीकी कारण बताया

काठीकुंड के बीडीओ सौरव कुमार ने कहा कि कुछ तकनीकी खामियों और अन्य कारणों से कभी-कभी किस्त भुगतान में देरी हो जाती है. उन्होंने बताया कि संबंधित कर्मियों को लंबित मामलों का जल्द निष्पादन करने का निर्देश दिया गया है ताकि लाभुकों को जल्द राशि उपलब्ध कराई जा सके.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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