दुमका के मसलिया में साइबर अपराधियों का आतंक, वार्ड सदस्य का मोबाइल हैक
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 29 May 2026 2:58 PM
अंधेरे में बैठा साइबर अपराधी. प्रतीकात्मक फोटो
Dumka News: दुमका के मसलिया में साइबर अपराधियों ने वार्ड सदस्य दिलीप दे का मोबाइल हैक कर लोगों को क्यूआर कोड भेजकर पैसे मांगने की कोशिश की. जागरूक ग्रामीणों की सतर्कता से बड़ा साइबर फ्रॉड टल गया. साइबर विशेषज्ञों ने अनजान लिंक और एपीके फाइल से सावधान रहने की सलाह दी है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
दुमका से पवन पंडित की रिपोर्ट
Dumka News: झारखंड के दुमका जिले में इन दिनों साइबर अपराधियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. अब साइबर ठग आम लोगों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों को भी अपना निशाना बना रहे हैं. ताजा मामला मसलिया प्रखंड के गुमरो पंचायत का है, जहां एक वार्ड सदस्य का मोबाइल फोन हैक कर साइबर अपराधियों ने लोगों से पैसे ठगने की कोशिश की. घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और लोग दहशत में हैं.
वार्ड सदस्य दिलीप डे का मोबाइल किया गया हैक
जानकारी के अनुसार गुमरो पंचायत के वार्ड सदस्य दिलीप डे का मोबाइल फोन अचानक साइबर हैकरों के कब्जे में चला गया. मोबाइल हैक होते ही अपराधियों ने उनके फोन में मौजूद संपर्क सूची यानी कांटेक्ट लिस्ट तक पहुंच बना ली. इसके बाद हैकरों ने वार्ड सदस्य के नाम और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर उनके रिश्तेदारों, दोस्तों और ग्रामीणों को मैसेज भेजना शुरू कर दिया.
क्यूआर कोड भेजकर मांगे गए पैसे
हैकर्स ने व्हाट्सएप और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को एक क्यूआर कोड भेजा. मैसेज में लिखा गया कि अचानक इमरजेंसी आ गई है और तुरंत 2000 रुपये की जरूरत है. साथ ही यह भी कहा गया कि एक घंटे के अंदर पैसे वापस कर दिए जाएंगे. चूंकि मैसेज सीधे वार्ड सदस्य के मोबाइल नंबर से भेजा जा रहा था, इसलिए अधिकांश लोगों को शुरुआत में इस पर शक नहीं हुआ.
जागरूकता से टली बड़ी ठगी
कई ग्रामीण और परिचित लोग पैसे भेजने की तैयारी में थे. हालांकि कुछ जागरूक लोगों ने पहले वार्ड सदस्य दिलीप दे को फोन कर मामले की पुष्टि करने की कोशिश की. तब पता चला कि उनका मोबाइल पूरी तरह हैक हो चुका है और उन्होंने किसी से पैसे नहीं मांगे हैं. इसके बाद तुरंत लोगों को सतर्क किया गया और एक बड़ी साइबर ठगी होने से बच गई.
पीएम किसान योजना के नाम पर एपीके फाइल का इस्तेमाल
स्थानीय लोगों और साइबर मामलों के जानकारों का कहना है कि इन दिनों साइबर अपराधी पीएम किसान योजना या सरकारी योजनाओं के नाम पर एपीके फाइल भेज रहे हैं. जैसे ही कोई व्यक्ति उस फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल करता है, मोबाइल का एक्सेस हैकरों तक पहुंच जाता है. इसके बाद वे मोबाइल में मौजूद बैंकिंग जानकारी, कांटेक्ट लिस्ट और निजी डाटा का दुरुपयोग करने लगते हैं.
वार्ड सदस्य ने लोगों से की अपील
घटना के बाद वार्ड सदस्य दिलीप दे ने दूसरे माध्यमों से लोगों तक संदेश पहुंचाया और अपील की कि उनके नंबर से यदि किसी को भी क्यूआर कोड, लिंक या पैसों की मांग वाला कोई मैसेज आए तो उस पर भरोसा न करें. उन्होंने साफ कहा कि वे किसी से कोई पैसे नहीं मांग रहे हैं और उनका मोबाइल पूरी तरह हैक हो चुका है.
साइबर विशेषज्ञों ने दी सावधानी बरतने की सलाह
साइबर सेल से जुड़े जानकारों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान लिंक, एपीके फाइल या संदिग्ध मैसेज पर क्लिक नहीं करना चाहिए. यदि कोई परिचित व्यक्ति व्हाट्सएप या मैसेज के जरिए अचानक पैसे मांगता है, तो पहले सीधे फोन कर उसकी पुष्टि जरूर करें. बिना सत्यापन के पैसे भेजना भारी नुकसान का कारण बन सकता है.
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पुलिस और प्रशासन से कार्रवाई की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बढ़ रही साइबर घटनाओं से लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. वहीं प्रशासन से ऐसे मामलों में त्वरित जांच और जागरूकता अभियान चलाने की मांग भी उठ रही है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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