तेज आंधी-पानी के बीच गढ़वा के मेराल में भैंस चरा रहा था युवक, बिजली गिरने से हो गई मौत

आसमान में चमकती बिजली. प्रतीकात्मक फोटो.
Garhwa News: गढ़वा के मेराल थाना क्षेत्र में तेज आंधी और बारिश के दौरान भैंस चरा रहे युवक उदय सिंह की वज्रपात की चपेट में आने से मौत हो गई. बहेरा पेड़ के नीचे खड़े युवक पर अचानक बिजली गिर गई. घटना के बाद परिवार और गांव में मातम पसरा हुआ है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
मेराल से संजय तिवारी की रिपोर्ट
Garhwa News: झारखंड के गढ़वा जिले के मेराल थाना क्षेत्र अंतर्गत बांनाजाघ गांव में शुक्रवार की सुबह तेज आंधी, गरज-चमक और मूसलाधार बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसा हो गया. जंगल में भैंस चरा रहे एक युवक की वज्रपात की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई. घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है और मृतक के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है.
मृतक की पहचान उदय सिंह के रूप में हुई
मृतक की पहचान बांनाजाघ गांव निवासी गजाधर सिंह के 35 वर्षीय पुत्र उदय सिंह के रूप में की गई है. बताया जा रहा है कि उदय सिंह परिवार के कमाऊ सदस्य थे और खेती-बाड़ी के साथ पशुपालन कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे. उनकी अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.
रोज की तरह भैंस चराने गया था युवक
जानकारी के अनुसार उदय सिंह शुक्रवार की सुबह रोज की तरह अपने घर के पास स्थित जंगल क्षेत्र में भैंस चराने के लिए गया हुआ था. सुबह के समय मौसम सामान्य था, लेकिन कुछ देर बाद अचानक मौसम का मिजाज बदल गया. देखते ही देखते तेज आंधी और तूफान शुरू हो गया. आसमान में काले बादल छा गए और तेज गरज के साथ बारिश होने लगी.
बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे लिया सहारा
अचानक मौसम खराब होने के बाद उदय सिंह खुद को बचाने के लिए पास में स्थित एक बहेरा के पेड़ के नीचे जाकर खड़ा हो गया. वह बारिश रुकने का इंतजार कर रहा था. इसी दौरान तेज गर्जना के साथ अचानक आकाशीय बिजली उसी पेड़ पर गिर गई. वज्रपात इतना तेज था कि पेड़ का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया.
मौके पर ही झुलसकर हुई मौत
बिजली गिरने की चपेट में आने से पेड़ के नीचे खड़े उदय सिंह गंभीर रूप से झुलस गए और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई. आसपास मौजूद लोगों ने जोरदार आवाज सुनी, जिसके बाद ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़े. वहां पहुंचने पर उन्होंने उदय सिंह को अचेत अवस्था में पड़ा देखा. ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना परिजनों और पुलिस को दी.
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस
घटना की जानकारी मिलते ही मेराल थाना के एएसआई राजेंद्र कुमार बैठा पुलिस बल के जवानों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. पुलिस ने ग्रामीणों के सहयोग से शव को कब्जे में लिया और आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी की. इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए गढ़वा सदर अस्पताल भेज दिया गया.
परिवार में पसरा मातम
उदय सिंह की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. ग्रामीणों के अनुसार उदय सिंह काफी मिलनसार और मेहनती व्यक्ति थे. गांव में उनकी पहचान एक शांत स्वभाव के इंसान के रूप में थी. घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और लोग परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं.
लोग नहीं बरत रहे सावधानी
लगातार बदलते मौसम और वज्रपात की घटनाओं को लेकर मौसम विभाग पहले ही अलर्ट जारी कर चुका है. इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बारिश और आंधी के दौरान खेतों और जंगलों में जाने को मजबूर हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि खराब मौसम के दौरान पेड़ के नीचे खड़ा होना बेहद खतरनाक हो सकता है, क्योंकि बिजली अक्सर ऊंचे पेड़ों पर गिरती है.
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प्रशासन से मुआवजे की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने प्रशासन से मृतक परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि उदय सिंह परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे और उनकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. स्थानीय लोगों ने सरकार से पीड़ित परिवार की मदद करने की अपील की है.
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लेखक के बारे में
By कुमार विश्वत सेन
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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