ranchi news : रांची स्थित मोरहाबादी के दीक्षांत मंडप में सरहुल पूर्व संध्या समारोह, 35 समूह हुए शामिल, परंपरा के उत्सव में लोकगीतों की मधुर धुन

Updated at : 01 Apr 2025 12:39 AM (IST)
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ranchi news : रांची स्थित मोरहाबादी के दीक्षांत मंडप में सरहुल पूर्व संध्या समारोह, 35 समूह हुए शामिल, परंपरा के उत्सव में लोकगीतों की मधुर धुन

दीक्षांत मंडप मोरहाबादी में सरना नवयुवक संघ द्वारा आयोजित सरहुल पूर्व संध्या समारोह में सोमवार को 35 समूहों/एकल गायकों ने अपने नृत्य और गीत का प्रदर्शन किया.

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रांची.

दीक्षांत मंडप मोरहाबादी में सरना नवयुवक संघ द्वारा आयोजित सरहुल पूर्व संध्या समारोह में सोमवार को 35 समूहों/एकल गायकों ने अपने नृत्य और गीत का प्रदर्शन किया. समारोह स्थल लाल पाड़ की साड़ी पहनी युवतियों व सफेद धोती-गंजी में मांदर, ढाक व बांसुरी के साथ मौजूद युवाओं से गुलजार था. सभी के चेहरे पर मुस्कान थी और अपने नृत्य व गीतों के प्रदर्शन की उत्सुकता भी. पहली प्रस्तुति दीपशिखा आदिवासी बालिका पीजी छात्रावास की छात्राओं ने कुड़ुख गीत छक छक ना बींडो पगा..गीत से की. इसका अर्थ है : सुंदर-सुंदर पगड़ी बांधे हो और जंगल की ओर लकड़ी लाने जाते हो…आकांक्षा बालिका कॉलेज की छात्राओं ने भी कुड़ुख गीत चरा भोखा गे बाड़ा मन भला एका पर नृत्य किया. इसका अर्थ है चारा रखने के लिए बड़ा पेड़ नहीं है तुम कौन से राज्य में जाओगी मैना? स्नातकोत्तर मुंडारी विभाग की छात्राओं ने मुंडा गीत सरजोम बा हिजु दोरेम हिजु तना..अलो रेम बगे लेआ रे..गीत की मनमोहक प्रस्तुति की. संताली समूह के छात्र-छात्राओं ने बाहा गीत-मानवा बोन जानाम एना जा गोसाई धरती मा ताला रे, बोंगा बुरू को उपेल एना जा गोसाई जाहेर बुटो रे..अर्थात मनुष्य का जन्म हुआ धरती में देवी-देवता का जन्म हुआ सरना स्थल में गीत पर नृत्य किया.

नयी पीढ़ी को भी गहराई से जानना होगा आदिवासी संस्कृति को

मुख्य अतिथि कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि हमारे पुरखों ने जो संस्कृति हमें सौंपी वह कितना बचा है, आज इसे देखने आया हूं. जब हम छात्र जीवन में थे, तो ऐसे आयोजनों में हमारी भागीदारी होती थी. अब आप युवाओं की बारी है. सरहुल हमारी पहचान है. कहीं न कहीं हमारी संस्कृति का क्षरण हो रहा है, इसलिए इस बार विभाग की ओर से हमलोगों ने विधायकों, मंत्रियों को मांदर दिया. अभी भी आदिवासी संस्कृति से जुड़ी चीजों पर बहुत शोध नहीं हुआ है. नयी पीढ़ी को जानना-समझना होगा कि हमारी संस्कृति क्या है? साथ ही आदिवासी आध्यात्मिकता को भी समझना होगा. मौके पर रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अजीत कुमार सिन्हा भी उपस्थित थे.

प्रतिभागियों को दिया प्रोत्साहन राशि

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बंधु तिर्की ने समारोह में शामिल होनेवाले सभी समूहों को दो-दो हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि सरहुल सिर्फ नाच-गान या मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि समाज को दिशा देने के लिए भी है. आप जैसे युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी है. युवा संस्कृति के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी बढ़ें और संविधान की जानकारी भी रखें.

गांव-टोलों में हो रहा मिलन समारोह

संघ के अध्यक्ष डॉ हरि उरांव ने कहा कि आज गांव-टोलों सहित देश के कई राज्यों में सरहुल मिलन समारोह हो रहे हैं. इसका श्रेय सरना नवयुवक संघ को जाता है. दीक्षांत मंडप में होनेवाले समारोह को दुनियाभर में यूट्यूब पर देखा जा रहा है. सचिव बीरेंद्र उरांव, अतिथि, बीरेंद्र सोय ने भी संबोधित किया. कार्यक्रम में सरना फूल पत्रिका के 46वें अंक का भी विमोचन किया गया.

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