सुरेंद्र कुमार और शंकर पोद्दार की ग्राउंड रिपोर्ट
Ansh Anshika Case: रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र से लापता पांच वर्षीय अंश और चार वर्षीय अंशिका की बरामदगी ने जहां पूरे राज्य को राहत दी, वहीं चितरपुर के खौरागढ़ा (अहमद नगर) क्षेत्र में सामने आयी सच्चाई ने लोगों को झकझोर कर रख दिया. जिस मकान में दोनों मासूमों को करीब दस दिनों तक रखा गया था, उसके ठीक सामने दर्जनों घर हैं और आसपास सैकड़ों की आबादी रहती है. इसके बावजूद किसी को भी बच्चों की मौजूदगी की भनक तक नहीं लगी, जो कई गंभीर आशंकाओं को जन्म दे रही है. स्थानीय लोगों का मानना है कि शातिर दंपत्ति ने दोनों बच्चों को नशीला पदार्थ खिलाकर रखा था. यही कारण रहा कि बच्चे न तो रो रहे थे, न ही बाहर निकलने या किसी तरह की हलचल कर पा रहे थे. ग्रामीणों के अनुसार, बच्चों को खाने-पीने के बाद लंबे समय तक सुलाए रखा जाता था, ताकि आसपास के लोगों को किसी तरह का संदेह न हो.
इस तरह रची गयी थी खामोशी की साजिश
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि जिस मकान में बच्चे रखे गये थे, वहां से न तो बच्चों की आवाज आती थी और न ही किसी तरह की गतिविधि नजर आती थी. शातिर दंपत्ति ने पूरी रणनीति के तहत बच्चों को कमरे के अंदर ही सीमित रखा. लोगों को अब आशंका है कि बच्चों की मानसिक और शारीरिक स्थिति को नियंत्रित करने के लिए उन्हें नशे की दवा दी जाती थी. हालांकि इसकी पुष्टि मेडिकल जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी. गिरफ्तार दंपत्ति ने अपना नाम सूरज और सोनम बताया है और खुद को बिहार का निवासी बताया. पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या दोनों किसी संगठित गिरोह से जुड़े हैं या यह मामला मानव तस्करी से संबंधित है. साथ ही इस तथ्य की भी जांच कर रही है कि अपहरणकर्ता के द्वारा बताये गये नाम पता सही है की नहीं. Ansh Anshika Case drugs given to children no one knew about it for 10 days read full story
एक हजार मासिक किराये पर दिया गया था मकान
इस मामले में मकान मालकिन रोशन आरा की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. रोशन आरा ने पुलिस और स्थानीय लोगों को बताया कि वह मूल रूप से रांची के कुच्चू कमता की रहने वाली है और कुछ वर्ष पूर्व उसने यह मकान चितरपुर के एक व्यक्ति से 30 हजार रुपये में खरीदा था. वर्तमान में वह अपनी नतिनी के साथ इस मकान में रह रही थी. रोशन आरा ने यहां बच्चों को लेकर पहुंचे दंपत्ति को एक हजार रुपये मासिक किराये पर मकान दिया था. हैरानी की बात यह है कि किरायेदारों का न तो कोई पुलिस सत्यापन कराया गया और न ही उनके बारे में आसपास के लोगों या मोहल्ला समिति को कोई सूचना दी गयी. स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने कम किराये पर मकान देकर बिना किसी पहचान पत्र की जांच किये अंजान लोगों को पनाह देना गंभीर लापरवाही है, जिसका खामियाजा पूरे इलाके को उठाना पड़ा. इससे पूरे इलाके की छवि धूमिल हुई है और लोगों में आक्रोश है.
सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का मुद्दा फिर आया सामने
इस घटना के बाद खौरागढ़ा पहाड़ी क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे अवैध अतिक्रमण का मुद्दा भी एक बार फिर सतह पर आ गया है. पंचायत के मुखिया भानु प्रकाश महतो सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि इस क्षेत्र में वन विभाग की लगभग 99 एकड़ भूमि है, जिस पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जा कर मकान बना लिए गये हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इनमें कुछ स्थानीय लोग हैं, लेकिन बड़ी संख्या में बाहरी और संदिग्ध लोग भी रह रहे हैं, जिनकी भाषा और रहन-सहन अलग है. चर्चा है कि इनमें से कुछ लोग बांग्लादेश और अन्य राज्यों से आये हुए हैं. ग्रामीणों ने बताया कि कई बार रामगढ़ उपायुक्त और डीएफओ को लिखित शिकायत देकर अतिक्रमण हटाने की मांग की गयी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. कुछ वर्ष पूर्व इसी क्षेत्र से फर्जी पासपोर्ट बनाने का मामला भी सामने आ चुका है, जिससे इलाके की संवेदनशीलता और बढ़ जाती है.
स्थानीय लोगों में आक्रोश, उठे कई सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की. भीम कुमार महतो ने कहा कि अवैध तरीके से बच्चों को यहां रखना एक गंभीर अपराध है और इसमें शामिल हर व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. रेणु देवी ने कहा कि यह पूरी तरह सुनियोजित साजिश थी, तभी इतने दिनों तक किसी को कुछ पता नहीं चला. आमना खातून ने कहा कि रोशन आरा को इलाके के लोग ठीक से नहीं जानते. वह कहां से आई, कैसे यहां रहने लगी, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है. इसके कारण पूरे मोहल्ले की बदनामी हो रही है. मो आरिफ ने कहा कि अंजान लोगों को अपने मकान में रखने की सूचना मस्जिद कमेटी या मोहल्ला समिति को देना जरूरी था, जो नहीं दी गयी.
अज्ञात को पनाह देना अपराध : शहजादा अनवर
घटना की जानकारी मिलते ही कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष शहजादा अनवर भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने कहा कि किसी भी अंजान व्यक्ति को बिना सत्यापन के मकान किराये पर देना गलत है. यदि इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए. उन्होंने बच्चों की सकुशल बरामदगी को झारखंड और रामगढ़ पुलिस की बड़ी उपलब्धि बताया.
नये साल की मायूसी, मकर संक्रांति पर लौटी मुस्कान
अंश और अंशिका के लापता होने के बाद नये साल की शुरुआत धुर्वा इलाके के लिए मायूसी और बेचैनी भरी रही. हर घर में चिंता थी, हर जुबां पर एक ही सवाल- बच्चे कहां हैं? 13 दिनों तक चले इस दर्दनाक इंतजार के बाद मकर संक्रांति के पावन अवसर पर जब दोनों मासूम सकुशल घर लौटे, तो मानो पूरे इलाके में खुशियों की पतंग उड़ गयी. पर्व की मिठास बच्चों की मुस्कान के साथ हर घर तक पहुंची.
रंग लायी प्रभात खबर की मुहिम
अंश और अंशिका की खोजबीन को लेकर प्रभात खबर ने शुरू से ही विशेष मुहिम चलायी. अखबार ने इस मामले को लगातार प्रमुखता से उठाया और पुलिस-प्रशासन के साथ-साथ समाज को भी झकझोरा. पाठकों से मिले इनपुट, स्थानीय सूचनाओं और जनभागीदारी ने खोज अभियान को मजबूती दी. मासूमों की सकुशल बरामदगी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सजग और जिम्मेदार पत्रकारिता समाज के लिए उम्मीद की सबसे मजबूत कड़ी होती है.
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