झारखंड के ग्रामीण इलाकों की सुधरेगी दशा, 4000 करोड़ से बनेंगे सड़क व पुल, PMGSY से मिली इतने की स्वीकृति
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 02 Jan 2023 8:36 AM
मुख्यमंत्री सड़क योजना से हर विधायक के क्षेत्र में 10 करोड़ रुपये की सड़क योजना देनी है. इसका डीपीआर तैयार हो गया है. सारे विधायकों से अनुशंसा लेकर सड़क योजनाओं को स्वीकृति दी जा रही है.
झारखंड के ग्रामीण इलाकों में एक साथ चार हजार करोड़ से अधिक की सड़क और पुल योजना शुरू होगी. दो से तीन महीने में सारी योजनाओं पर काम शुरू हो जायेगा. इसमें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2308 करोड़ की सड़क और पुल योजना है. इसमें से 2037 करोड़ की सड़क और 271 करोड़ की पुल योजना पर काम होगा. ग्रामीण इलाकों की सड़कों के अपग्रेडेशन का काम होना है. यानी जो सड़कें खराब हालत हैं, उन्हें बेहतर किया जायेगा. भारत सरकार ने इसकी स्वीकृति आदेश झारखंड को भेज दिया है.
वहीं मुख्यमंत्री सड़क योजना से हर विधायक के क्षेत्र में 10 करोड़ रुपये की सड़क योजना देनी है. इसका डीपीआर तैयार हो गया है. सारे विधायकों से अनुशंसा लेकर सड़क योजनाओं को स्वीकृति दी जा रही है. इन पर राज्य मद से जल्द ही काम शुरू होना है. इसके अलावा मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना से भी हर विधायक को 10 करोड़ की पुल योजना देनी है. 50 से ज्यादा विधायकों की अनुशंसा लेकर योजनाओं को स्वीकृति दे दी गयी है. अब योजनाओं का टेंडर किया जायेगा. जल्द ही इस पर काम शुरू होना है. इन दोनों योजनाओं से करीब 1700 करोड़ की योजनाओं पर काम होना है.
केंद्र ने काफी मशक्कत के बाद पीएम ग्राम सड़क योजना से 3106 किमी की सड़क योजना दी है. इसके तहत 336 सड़क और 143 पुल योजना पर काम होना है. इनका टेंडर झारखंड स्टेट रूरल रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी को करना है. लेकिन अभी अथॉरिटी में मुख्य अभियंता का पद खाली पड़ा है. मुख्य अभियंता जेपी सिंह प्रभारी व्यवस्था के तहत थे.
वह अधीक्षण अभियंता स्तर के हैं, पर पथ विभाग में प्रभारी अभियंता प्रमुख के रूप में पोस्टिंग थी. अब उन्हें हटा दिया गया है. इस तरह वह दोनों पद से हटा दिये गये हैं. ऐसे में पहले मुख्य अभियंता की पोस्टिंग करनी होगी, क्योंकि बिना उनके टेंडर का निबटारा संभव नहीं है. टेंडर सहित सारे महत्वपूर्ण कार्यों के निबटारे की जिम्मेवारी मुख्य अभियंता की होती है. पिछली बार पीएमजीएसवाइ के टेंडर निबटारा में बड़ी गड़बड़ी हुई थी.
बड़ी संख्या में विभाग को इसकी शिकायतें मिली थीं. इसके आलोक में जांच का निर्देश दिया गया था. अभी भी इसकी जांच अधूरी है. ऐसे में अब फिर टेंडर का निबटारा पारदर्शिता के साथ कराना चुनौती होगा, हालांकि विभाग ने यह फैसला लिया है कि छवि को सुधारा जायेगा.
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