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Ranchi News : रिम्स : जर्जर भवनों में चल रहा इलाज

Updated at : 04 May 2025 11:14 PM (IST)
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Ranchi News : रिम्स : जर्जर भवनों में चल रहा इलाज

जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में हुई घटना से सबक लेने की है जरूरत

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रांची. जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में शनिवार को हुई दुर्घटना ने राज्य भर के अस्पतालों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है. उक्त अस्पताल के मेडिसिन विभाग की छत गिरने से तीन लोगों की मौत हो गयी. इस दर्दनाक हादसे ने स्वास्थ्य संस्थानों के जर्जर भवनों और रख-रखाव में हो रही लापरवाही को उजागर कर दिया है. इसी क्रम में प्रभात खबर ने रविवार को राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स का जायजा लिया. इस दौरान यह सामने आया कि रिम्स के कई विभाग बेहद खराब हालत में हैं. ऑर्थो विभाग की छत पूरी तरह से जर्जर है, लोहे का सरिया बाहर झांक रहा है. इस भवन में हर दिन सैकड़ों मरीजों और डॉक्टरों की आवाजाही होती है, ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है. वर्षों पहले बने इस भवन की मरम्मत नहीं हुई है.

मेडिसिन विभाग व मुख्य भवन भी जर्जर

वहीं, मेडिसिन विभाग का फर्श कई जगहों पर टूटा हुआ है. इससे मरीजों को स्ट्रेचर से लाने में परेशानी होती है. बरसात के दिनों में यहां जल-जमाव आम बात है. वहीं, रिम्स के मुख्य भवन की खिड़की का छज्जा कई जगहों पर जर्जर है. सैकड़ों लोग मुख्य भवन के नीचे से आना-जाना करते हैं. ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.

न्यूरो विभाग : टूट कर गिर रहा प्लास्टर

न्यूरो विभाग की दीवारें और छतें भी टूट रही हैं. वहां तक जाने वाली सीढ़ियों के लोहे की रेलिंग में जंग लग चुका है और वे झूल रहे हैं. समय पर मरम्मत नहीं हुई, तो बड़ा हादसा हो सकता है.

शौचालय व आपातकालीन वार्ड की हालत खराब

शौचालयों की स्थिति बदतर है. छतों से पानी टपकता है. आपातकालीन वार्ड में अफरातफरी की स्थिति बनी रहती है. मरीजों और परिजनों के लिए यह विभाग किसी संघर्ष से कम नहीं है.

भोजन आपूर्ति में भी बाधा, फर्श पर गिर रहा खाना

मरीजों को भोजन पहुंचाने का रास्ता टूटा हुआ है. मेस कर्मचारियों ने बताया कि फर्श की जर्जर हालत के कारण ट्रॉलियों के पहिये फंस जाते हैं और कई बार खाना गिर भी जाता है. छतें भी गिरने की हालत में हैं. इससे कर्मचारियों को डर लगा रहता है.

टूटे फर्श से स्ट्रेचर लाने में भी दिक्कत

मरीज के परिजन मनोज साहू ने बताया कि जर्जर फर्श के कारण स्ट्रेचर पर लाते समय मरीजों को कई बार झटके लगते हैं. एक मरीज को पांच से छह बार ठोकर लग जाती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUNIL PRASAD

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By SUNIL PRASAD

SUNIL PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

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