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नहीं सुधर रही रांची रिम्स की स्थिति, गलियारे में गर्मी की तपिश झेलकर इलाज कराने को विवश हुए मरीज

Updated at : 13 May 2023 10:56 AM (IST)
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नहीं सुधर रही रांची रिम्स की स्थिति, गलियारे में गर्मी की तपिश झेलकर इलाज कराने को विवश हुए मरीज

रिम्स प्रबंधन ने न्यूरो सर्जरी के गलियारे में फर्श पर भर्ती मरीजों के लिए बेड उपलब्ध कराने की पहल की थी. नेत्र विभाग के वार्ड में खाली बेड पर फर्श वाले मरीजों को शिफ्ट किया गया था

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रिम्स में न्यूरो सर्जरी विभाग के गलियारे में भर्ती मरीजों को भीषण गर्मी की तपिश झेलनी पड़ रही है. यह मरीज पहले से ही गंभीर बीमारी की पीड़ा से जूझ रहे हैं. उस पर से गलियारे में गर्म हवाओं से बचाने के लिए परिजनों को मशक्कत करनी पड़ रही है. परिजन चादर का पर्दा बनाकर किसी तरह मरीज को बचा रहे हैं. एक परिजन ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि दोपहर के बाद यहां रहना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि गर्म हवा बहने लगती है.

गंभीर मरीज हैं, इसलिए इनको इधर-ऊधर खींच भी नहीं सकते. ऐसी स्थिति कई बार रिम्स के मेडिसिन और शिशु विभाग के गलियारे में देखने को मिलती है. हालांकि, रिम्स प्रबंधन ने न्यूरो सर्जरी के गलियारे में फर्श पर भर्ती मरीजों के लिए बेड उपलब्ध कराने की पहल की थी. नेत्र विभाग के वार्ड में खाली बेड पर फर्श वाले मरीजों को शिफ्ट किया गया था, लेकिन नेत्र विभाग के डॉक्टरों द्वारा विरोध किये जाने पर उन्हें दोबारा फर्श पर शिफ्ट कर दिया गया.

नेत्र विभाग को शिफ्ट करने में लगेगा समय, रहेगी परेशानी

शासी परिषद की 55 वीं बैठक में नेत्र विभाग को यथाशीघ्र क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में शिफ्ट करने की योजना बनायी गयी है. हालांकि क्षेत्रीय नेत्र संस्थान को तैयार करने में अभी करीब एक साल से ज्यादा का समय लगेगा. ऐसे में फर्श पर भर्ती मरीजों को अभी परेशानी झेलनी पड़ेगी. यह रिम्स के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है.

आठ साल में भी नहीं बन सका क्षेत्रीय नेत्र संस्थान

रिम्स में 39 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला क्षेत्रीय नेत्र संस्थान आठ साल में भी मूर्त रूप नहीं ले सका है. भवन तो खड़ा हो गया है, लेकिन आंतरिक संरचना का पूरा काम बाकी है. भवन को पूरी तरह से तैयार करने में करीब 40 करोड़ रुपये और खर्च होने का अनुमान है. वहीं, काम पूरा कराने के लिए नयी एजेंसी का चयन करना होगा. क्योंकि, पुरानी एजेंसी ने पहले के रेट पर आगे का काम करने से इनकार कर दिया है.

वहीं, पुरानी एजेंसी को बकाया मद में दो करोड़ रुपये देने पर जीबी में सहमति बनी है. नेत्र संस्थान के निर्माण की अनुमति वर्ष 2014 में दी गयी थी. सात तल्ला क्षेत्रीय नेत्र संस्थान को कार्यादेश देने के दो साल के भीतर ही तैयार कर लेना था, लेकिन लागत राशि बढ़ती रही, पर काम नहीं हुआ. वहीं, क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के बनने से रिम्स में आंखों की जटिल सर्जरी संभव हो सकेगी. संस्थान में रेटिना, ग्लूकोमा, पीडियाट्रिक, कम्युनिटी ऑपथैल्मोलॉजी की बीमारी से संबंधित विभाग खोले जायेंगे.

ऐसी व्यवस्था होगी क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में : क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में 75 बेड का अस्पताल होगा. वहीं, 150 से 200 विद्यार्थियों के पढ़ने की व्यवस्था होगी. पहले तल पर ओपीडी और सभी विभागों का रिसेप्शन होगा. वहीं, दूसरे व तीसरे तल पर मॉड्यूलर व सेमी मॉड्यूलर ओटी, चौथे और पांचवें तल पर मरीजों के लिए वार्ड होगा. छठे तल पर सेमिनार हॉल होगा. इसके अलावा यहां आई बैंक भी होगा.

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