रिम्स जमीन फर्जीवाड़ा मामले में आरोपी बिल्डर शुभम को जोर का झटका, ACB कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

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रिम्स जमीन फर्जीवाड़े के आरोपी को कोर्ट से झटका

रिम्स जमीन फर्जीवाड़े के आरोपी को कोर्ट से झटका

रिम्स की अधिग्रहित जमीन पर हुए बहुचर्चित फर्जीवाड़ा मामले में बिल्डर शुभम साबू की मुश्किलें बढ़ गई हैं. एसीबी की विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है. यह मामला 9.65 एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ा है.

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RIMS Land Scam, रांची : झारखंड हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद रिम्स की अधिग्रहित जमीन पर हुए बहुचर्चित फर्जीवाड़ा मामले में फंसे बिल्डर शुभम साबू को एसीबी अदालत से जोरदार झटका लगा है. एसीबी की विशेष अदालत ने शुभम साबू की जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं. लकी कंस्ट्रक्शन के शुभम साबू को एसीबी की टीम ने इसी वर्ष 28 जून को गिरफ्तार किया था. उन पर मोरहाबादी और कोकर मौजा स्थित रिम्स की लगभग 9.65 एकड़ विवादित सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से आलीशान अपार्टमेंट के निर्माण का आरोप है. एसीबी की जांच में यह बात निकलकर सामने आई है कि इस अवैध निर्माण कार्य में अब तक लगभग 14 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया गया था.

9.65 एकड़ सरकारी जमीन पर फर्जी वंशावली से अवैध कब्जा

यह पूरा मामला वर्ष 1964-65 के दौरान रिम्स (तत्कालीन मेडिकल कॉलेज) के लिए अधिग्रहित की गई भूमि से जुड़ा है. आरोप है कि भू-माफियाओं और बिल्डरों ने सुनियोजित साजिश के तहत मिलीभगत कर फर्जी वंशावली तैयार की और इस कीमती सरकारी जमीन को निजी संपत्ति के रूप में दिखाकर उस पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया. जमीन पर धड़ल्ले से आलीशान अपार्टमेंट, दुकानें और कई मकान खड़े कर दिए गए. झारखंड हाईकोर्ट द्वारा इस गंभीर मामले में सख्त रुख अपनाए जाने के बाद एसीबी ने पांच जनवरी, 2026 को प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी.

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एसीबी की कार्रवाई में अब तक 4 आरोपी भेजे जा चुके हैं जेल

एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद तेजी से कार्रवाई करते हुए सात अप्रैल को इस घोटाले में शामिल चार प्रमुख आरोपियों राजकिशोर बड़ाइक, कार्तिक बड़ाइक, राजेश झा और चेतन कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. एसीबी की जांच में अब तक इस पूरे फर्जीवाड़े और घोटाले में आधा दर्जन से अधिक लोगों को नामजद आरोपी बनाया जा चुका है. शुभम साबू की जमानत याचिका खारिज होने के बाद एसीबी मामले में आगे की जांच लगातार जारी रखे हुए है.

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समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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