17 मार्च को 600 कलाकारों के साथ लोक गायकों की पलटन पहुंचेगी डालटेनगंज, आपको पहुंचना है?

Updated at : 01 Mar 2023 11:28 PM (IST)
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17 मार्च को 600 कलाकारों के साथ लोक गायकों की पलटन पहुंचेगी डालटेनगंज, आपको पहुंचना है?

इप्टा राष्ट्रीय समिति के उपाध्यक्ष और बिहार इप्टा के महासचिव तनवीर अख्तर ने कहा कि इप्टा का 15वां राष्ट्रीय सम्मेलन एक ऐसे दौर में हो रहा है, जब संविधान और संवैधानिक मूल्य खतरे में है. अभिव्यक्ति की आजादी पर हमले बढ़े हैं, नफरत की राजनीति अपने चरम पर है और सांस्कृतिक मूल्य नष्ट किए जा रहे हैं.

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रांची : झारखंड और इसके आसपास के राज्यों के लोक संगीत प्रेमियों के लिए एक लटकाऊ-झटकाऊ खबर है और वह यह है कि झारखंड के डालटेनगंज में आगामी 17 मार्च से 19 मार्च तक भारतीय जननाट्य संघ ( इप्टा ) का 15वां राष्ट्रीय महाधिवेशन शुरू होने जा रहा है, जिसमें पूरे झारखंड के लोक गायकों के एकत्रित होने की संभावना है. यह महाधिवेशन 17 से 19 मार्च तक आयोजित किया जाएगा. इसका नाम नीलांबर-पितांबर लोक महोत्सव दिया गया है. इसमें देश भर के कलाकारों की लोक प्रस्तुति की झलक दिखलाई पड़ेगी. बुधवार को इप्टा राष्ट्रीय सम्मेलन सह जन-सांस्कृतिक समारोह आयोजन समिति की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी गई.

पूरे देश से 600 से अधिक कलाकार होंगे शामिल

आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ अरुण शुक्ला ने कहा कि समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व की हिफाजत करने, समाज में फैली दुश्मनी को दूर करने और प्रेम के संदेश को लेकर यह आयोजन किया जा रहा है. यह पलामू जिले के लिए गर्व की बात है कि देश के सबसे बड़े सांस्कृतिक संगठन का राष्ट्रीय सम्मेलन डालटेनगंज शहर में हो रहा है. जिसमें देश भर से 600 से अधिक कलाकार और संस्कृतिकर्मी हिस्सा लेकर भारत की बहुआयामी लोकपरंपरा की विविध साझी सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत करेंगे.

अभिव्यक्ति की आजादी पर हमले बढ़े

इप्टा राष्ट्रीय समिति के उपाध्यक्ष और बिहार इप्टा के महासचिव तनवीर अख्तर ने कहा कि इप्टा का 15वां राष्ट्रीय सम्मेलन एक ऐसे दौर में हो रहा है, जब संविधान और संवैधानिक मूल्य खतरे में है. अभिव्यक्ति की आजादी पर हमले बढ़े हैं, नफरत की राजनीति अपने चरम पर है और सांस्कृतिक मूल्य नष्ट किए जा रहे हैं. इसलिए यह इप्टा ने अपने राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए ‘समता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व के रास्ते, आओ कि कोई ख्वाब बुनें कल के वास्ते’ का नारा दिया है.

जनांदोलनों को किया जाएगा मजबूत

तनवीर अख्तर ने कहा कि इप्टा अपने शुरुआती काल से ही कलाकारों की आवाज को बुलंद करता रहा है. हम जनांदोलनों और मजबूत करेंगे और इस सम्मेलन के जरिए खेती-किसानी, सामाजिक न्याय, वैज्ञानिक चेतना और महिलाओं, युवाओं और जेंडर जैसे मुद्दे पर खुलकर बातचीत कर आगे की सांस्कृतिक रणनीति तय करेंगे.

धीरेंद्र मजूमदार की ‘मां’ का होगा प्रदर्शन

इप्टा के राज्य महासचिव उपेंद्र मिश्रा ने बताया कि सम्मेलन के पूर्व संध्या पर 16 मार्च की शाम कर्टेन रेजर के रूप में इंदौर इप्टा की नाट्य प्रस्तुति धीरेंद्र मजूमदार की ‘मां’ का मंचन गांधी स्मृति टाउन हॉल में संध्या 6 बजे से किया जाएगा. 17 मार्च को 15 नगाड़ों की गूंज और झारखंड समेत अलग-अलग राज्यों की विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच जन सांस्कृतिक मार्च (रंग यात्रा) के साथ तीन दिवसीय महाधिवेशन का आगाज होगा. इसके बाद शिवाजी मैदान में आम सभा आयोजित होगी.

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डालटेनगंज के लोग कर रहे आयोजन

उपेंद्र मिश्रा ने कहा कि भले ही यह सम्मेलन इप्टा का है, लेकिन यह पूरा आयोजन शहरवासियों का है. इसके लिए एक विस्तारित स्वागत समिति बनाई गई है. उन्होंने सभी लोगों से सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सहयोग की अपील की है. आयोजन समिति के संरक्षक मंडल के सदस्य नवल तुलस्यान, कार्यकारी अध्यक्ष प्रेम भसीन, अध्यक्ष मंडल की सदस्य शीला श्रीवास्तव, महासचिव शैलेन्द्र कुमार, पंकज श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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