एसडीओ करता था अवैध वसूली, बालू ढोनेवाले हर ट्रैक्टर से घूस का रेट 1500 रुपये प्रति ट्रैक्टर

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 04 Jun 2020 6:29 AM

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गुमला जिले के चैनपुर अनुमंडल के एसडीओ सत्य प्रकाश झा बालू ढोने में लगे वाहनों के मालिकों से अवैध वसूली करते हैं. प्रभात खबर के पास वसूली के लिए की गयी बातचीत की वह रिकॉर्डिंग मौजूद है

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शकील अख्तर, रांची : गुमला जिले के चैनपुर अनुमंडल के एसडीओ सत्य प्रकाश झा बालू ढोने में लगे वाहनों के मालिकों से अवैध वसूली करते हैं. प्रभात खबर के पास वसूली के लिए की गयी बातचीत की वह रिकॉर्डिंग मौजूद है, जिससे इसकी पुष्टि होती है. एसडीओ ने बालू ढोनेवाले हर ट्रैक्टर से प्रति माह 1500 रुपये घूस तय कर रखा है और महीना पूरा होने पर वह ट्रैक्टर मालिक को फोन कर तगादा भी करते हैं. बातचीत में यह भी साफ होता है कि घूस में बार्गेनिंग भी होता है.

रिकॉर्डिंग में सुनायी दे रहा है कि एसडीओ लॉकडाउन खत्म होने का हवाला देते हुए ट्रैक्टर मालिक को मुलाकात के लिए बुला रहे हैं. ट्रैक्टर मालिक जब यह कहता है कि उसे रेट याद नहीं, तो एसडीओ उसे पूर्व में किये जा चुके भुगतान की याद भी दिला रहे हैं. वे ट्रैक्टर मालिक से फरवरी और मई का बकाया प्रति ट्रैक्टर 1500 रुपये की दर से मांग रहे हैं.

गाड़ीवाले द्वारा ट्रैक्टरों की संख्या दो से बढ़ा कर तीन करने की बात कहने पर वह तीनों ट्रैक्टर के लिए 4000 रुपये प्रति माह देने की मांग कर रहे हैं. बातचीत के दौरान ट्रैक्टर मालिक द्वारा बालू ढोने में किसी तरह की पाबंदी नहीं होने की बात करने पर एसडीओ उसे यह भी बता रहे हैं कि बिना चालान के बालू नहीं ढोया जा सकता है. चालान नहीं रहने की स्थिति में ही गाड़ियां पकड़ी जाती हैं और उन पर फाइन लगाया जाता है.

वाहन मालिक उपायुक्त से कर चुके हैं शिकायत

वर्ष 2019 में भी कुछ वाहन मालिकों ने एसडीओ द्वारा की गयी वसूली की शिकायत उपायुक्त से की थी. पर, इसका कोई नतीजा नहीं निकला. ट्रैक्टर मालिक और एसडीओ के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग से इस बात की जानकारी मिलती है कि वह बालू ढुलाई के काम में लगी गाड़ियों और उसके मालिकों का ब्योरा लिख कर रखते हैं.

बालू ढोने में लगे वाहन मालिकों से फोन पर घूस की बात करते एसडीओ का अॉडियो

फोन पर हुई बातचीत

एसडी : हैलो…!

ट्रैक्टर मालिक : हैलो…! आप कौन बोल रहे हैं?

एसडीओ : हम एसडीओ बोल रहे हैं.

ट्रैक्टर मालिक : कहां का?

एसडीओ : एसडीओ चैनपुर बोल रहे हैं. तुम्हारा ट्रैक्टर चलता है ना रायडीह के तरफ.

ट्रैक्टर मालिक : मेरा ट्रैक्टर? हां…! हां…! चलता है.

एसडीओ : हां! तो हम उसी के बारे में बात कर रहे हैं.

ट्रैक्टर मालिक : लेकिन, रायडीह की तरफ मेरा नहीं चलता है.

एसडीओ : हां! हां! गुमला-रायडीह चलता है. तुम तो एक-दो बार भेंट किया है ना. पटेल चौक में मिलता है ना तुम. भूल गया?

ट्रैक्टर मालिक : अच्छ, हां! हां! बोलिए.

एसडीओ : तुम्हारा घर उधरे है ना, गुमला रोड में?

ट्रैक्टर मालिक : हां! टाउने में है.

एसडीओ : हां! तो, अब लॉकडाउन खत्म हो गया है. भेंट मुलाकात नहीं करेगा?

ट्रैक्टर मालिक : अच्छा, चलिये ना सर. एक तारीख होने दीजिये ना सर.

एसडीओ : एक तारीख नहीं. और इस महीना का. मई महीना का.

ट्रैक्टर मालिक : अच्छा, देखते हैं सर.

मई महीना खत्म होने के बाद की बातचीत

एसडीओ : तुम कल आया नहीं?

ट्रैक्टर मालिक : कौन बोल रहे हैं?

एसडीओ : हम सिविल एसडीओ चैनपुर बैल रहे हैं. तुम्हारा ट्रैक्टर चलता है ना?

ट्रैक्टर मालिक : ट्रैक्टर तो चलता ही है.

एसडीओ : हां, तो हमको लगता है कि आप तो पहले भेंट किये हुए हैं.

ट्रैक्टर मालिक : भेंट तो कई बार हुआ है. तो क्या करना है. बोलिये ना?

एसडीओ : अभी कहां है. गुमला में या बाहर?

ट्रैक्टर मालिक : गुमला में हैं.

एसडीओ : हूं. हम भी तो गुमला में हैं. बोले थे भेंट करेंगे नहीं किये?

ट्रैक्टर मालिक : काहे के लिए. बोलियेगा तब ना सर?

एसडीओ : अरे! ट्रैक्टर से बालू-वालू ढोता है ना जी?

ट्रैक्टर मालिक : हां. बालू तो ढोते हैं.

एसडीओ : तो?

ट्रैक्टर मालिक : बालू ढोता है, तो उसमें क्या करना है?

एसडीओ : बालू नहीं ना ढोना है जी. इसीलिए ना फाइन-वाइन होता है.

ट्रैक्टर मालिक : अच्छा! बालू नहीं ढोना है.

एसडीओ : नहीं.

ट्रैक्टर मालिक : ऐसा तो कुछ नहीं है.

एसडीओ : पहले तो भेंट किया है. फिर ऐसा कैसे बोल रहा है?

ट्रैक्टर मालिक : सर! भेंट-वेट तो होते रहता है. लेकिन बालू ढोने में कोई पाबंदी तो नहीं है.

एसडीओ : बालू का बिना चालान काटे या बिना रॉयल्टी काटे नहीं निकालना है. उसी में तो फाइन होता है. गाड़ी पकड़ाता है.

ट्रैक्टर मालिक : अच्छा…! हां…! हां…!

एसडीओ : तब, वही तो हम लोगों को चेकिंग करना है.

ट्रैक्टर मालिक : तो क्या करना है. बोलिये?

एसडीओ : आप तो भेंट किये हुए हैं पहले से. बोलते हैं का करना है. का करना है?

ट्रैक्टर मालिक : हां! तो इधर का कहां बचल है. कब का बचल है. उधर का तो दे ही दिये थे ना सर.

एसडीओ : लॉकिंग पीरियड का पेंडिंग है. फरवरी का भी पेंडिंग है.

ट्रैक्टर मालिक : कितना दिये थे. यादो नहीं है.

एसडीओ : फरवरी का भी नहीं दिये है. मार्च अप्रैल का नहीं जोड़ रहे हैं.

ट्रैक्टर मालिक : अच्छा तो कितना हो जायेगा सर? बताइये ना…

एसडीओ : आप बताइये. आप तो दिये हुए हैं.

ट्रैक्टर मालिक : याद नहीं आ रहा है. बताइये ना सर.

एसडीओ : आप तो तीन हजार देते हैं.

ट्रैक्टर मालिक : महीना तीन हजार सर…?

एसडीओ : हां! आपका दो गो गाड़ी है.

ट्रैक्टर मालिक : हां! गाड़ी तो है दो गो. अभी तो चाचा का भी ले आये हैं. तो तीन गो हो गया.

एसडीओ : चाचा को छोड़िये ना. चाचा को अलग देखेंगा ना.

ट्रैक्टर मालिक : अच्छा!

एसडीओ : चाचा का ले आये हैं, तो चाचा का भी आप ही कर दीजिये. चाचा को काहे बोलेंगे.

ट्रैक्टर मालिक : हां! तो तीन गो का 15 सौ के हिसाब से हो जायेगा.

एसडीओ : हां! तो तीन गो हो गया, तो कम से कम चार हजार तो देना पड़ेगा ना. दिन भर में तो कितना फेरा लगाते हैं आप लोग?

ट्रैक्टर मालिक : अच्छा…! अच्छा…! कहां हैं सर? गुमला में हैं.

एसडीओ : हां! गुमला में हैं अभी हम. निकल रहे हैं रायडीह की तरफ. मांझो टोली तरफ निकल रहे हैं.

ट्रैक्टर मालिक : अच्छा हम जरा टेंशन में हैं. बाद में फोन करते हैं.

एसडीओ : कितना देर में?

ट्रैक्टर मालिक : आज नहीं कल बात करते हैं.

एसडीओ : कल. कल तो संडे है. संडे को गुमले में काहे नहीं भेंट कर लेते हैं. पार्क के पास आ जाइये. पार्के के पास भेंट कर लीजिए.

मैं बेकार की बात नहीं करता : एसडीओ

वाहनों के अवैध वसूली के सिलसिले में उनका पक्ष पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि रिपोर्टर को तो सब पता है. मैं बेकार की बात नहीं करता. इसके बाद उन्होंने फोन काट दिया. काफी देर तक उनके फोन व्यस्त बताता रहा.

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लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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