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रांची विवि में सटिर्फिकेट वेरिफिकेशन के नाम पर पास को फेल करने का खेल, हाईकोर्ट के आदेश पर कुलपति ने लिया एक्शन

Updated at : 06 Aug 2024 8:54 AM (IST)
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Ranchi University

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रांची विश्वविद्यालय से वर्ष 1997 में बीए ऑनर्स उत्तीर्ण विद्यार्थी संजीव कुमार दुबे की नौकरी लगी. नियोक्ता ने परीक्षा विभाग को इस माह उनका सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन के लिए भेजा.

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संजीव सिंह, रांची : रांची विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग में सटिर्फिकेट वेरिफिकेशन के नाम पर पास को फेल करने का मामला हाइकोर्ट के आदेश के बाद उजागर हुआ है. कुलपति डॉ अजीत कुमार सिन्हा को जब इस मामले की जानकारी हुई, तो उन्होंने संबंधित कर्मचारी बीके देवधरिया व निलंबित परीक्षा नियंत्रक डॉ आशीष कुमार झा को कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया है. उनसे पूछा गया है कि कैसे आपने उत्तीर्ण (पास) विद्यार्थी के फेल सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर कर दिया.

क्या है मामला

वहीं वीसी डॉ सिन्हा ने उक्त विद्यार्थी का उत्तीर्ण सर्टिफिकेट तैयार कर नियोक्ता के पास भेजा जहां उसकी नियुक्ति हुई. रांची विश्वविद्यालय से वर्ष 1997 में बीए ऑनर्स उत्तीर्ण विद्यार्थी संजीव कुमार दुबे की नौकरी लगी. नियोक्ता ने परीक्षा विभाग को इस माह उनका सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन के लिए भेजा. संबंधित कर्मचारी बीके देवधरिया ने उत्तीर्ण विद्यार्थी का दो सर्टिफिकेट तैयार किया. एक में उसे उत्तीर्ण व एक में अनुत्तीर्ण दिखाया. कर्मचारी ने संजीव के नियोक्ता के पास अनुत्तीर्णवाली रिपोर्ट भेज दी.

झारखंड हाईकोर्ट ने की मामले की सुनवाई

इसकी जानकारी जब चयनित विद्यार्थी संजीव को हुई, तो वह परीक्षा विभाग में रिपोर्ट सही कराने के लिए दौड़ने लगा. संजीव के अनुसार, उत्तीर्ण रिपोर्ट भेजने के एवज में उक्त कर्मचारी ने मोटी रकम मांगी. इसके बाद भी वह कई बार परीक्षा विभाग गया. लेकिन उसे निराशा हाथ लगी. उत्तीण सर्टिफिकेट नहीं मिलने पर वह न्याय की आस में हाईकोर्ट जा पहुंचा. झारखंड हाईकोर्ट में पूरे मामले की सुनवाई हुई. इसके बाद झारखंड हाईकोर्ट ने कुलपति को संजीव के पक्ष में फैसला सुनाते हुए निर्देश दिया. इसके बाद कुलपति को जब पूरे मामले की जानकारी हुई, तो उन्होंने उक्त कर्मचारी बीके देवधरिया को बुलाया जिनका कुछ माह पहले ही पीजी विभाग में स्थानांतरण हो गया था. उक्त कर्मचारी से जब कुलपति ने पूछताछ कि तो उसने संजीव की उत्तीर्णवाली रिपोर्ट कुलपति को दिखाते हुए कहा कि यही रिपोर्ट भेजी गयी है.

कर्मचारी ने दो रिपोर्ट की थी तैयार

जब कुलपति ने उससे टेबुलेशन रजिस्टर (टीआर) मांगा, तो पता चला कि उक्त कर्मचारी टीआर को अलमीरा में बंद कर रखा था. कुलपति ने जांच की, तो पाया कि विद्यार्थी 1996 में प्रोमोटेड हो गया था, पुन: 1997 में परीक्षा देकर उत्तीर्ण हुआ. लेकिन उक्त कर्मचारी की ओर से दो रिपोर्ट तैयार की गयी थी. वह नियोक्ता को प्रोमोटेड की जगह फेल का सर्टिफिकेट भेज देता था. समझा जाता है कि नोटिस के बाद विवि प्रशासन द्वारा प्रथम चरण में उक्त कर्मचारी के खिलाफ निलंबन तक की कार्रवाई की जा सकती है.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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