तेल की कीमतों में लगी आग, कच्चा तेल $106 के पार

कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल (Photo: Freepik)
Crude Oil Price Surge: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बाद तेल बाजार में खलबली मच गई है. सप्लाई बाधित होने के डर से ब्रेंट क्रूड और WTI की कीमतों में भारी उछाल आया है.
Crude Oil Price Surge: शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 की सुबह इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर खलबली मचा दी है. ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 106 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है, जो इन्वेस्टर्स के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. लगातार तीसरे दिन तेल की कीमतें 100 डॉलर के साइकलॉजिकल लेवल से ऊपर बनी हुई हैं. गुरुवार को तो ये 107.40 डॉलर का इंट्राडे हाई छू लिया था. वहीं, अमेरिकी तेल WTI भी 98 डॉलर के करीब पहुंच गया है, जबकि इसकी शुरुआत मात्र 92 डॉलर के आसपास हुई थी.
बाजार में यह तेजी किसी सामान्य मांग की वजह से नहीं, बल्कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण है. सप्लाई रुकने के डर से दुनिया भर के ट्रेडर्स डरे हुए हैं.
ट्रंप के कड़े आदेश से क्यों डरा तेल बाजार?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ताजा बयान ने ग्लोबल मार्केट में सनसनी फैला दी है. ट्रंप ने अमेरिकी नेवी को सख्त निर्देश दिए हैं कि अगर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में कोई भी नाव माइन (समुद्री बारूद) बिछाते हुए दिखे, तो उसे बिना किसी हिचकिचाहट के शूट कर दिया जाए. हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को कुछ समय के लिए बढ़ाया गया है ताकि शांति समझौते पर बात हो सके, लेकिन ट्रंप के इस कड़े रुख ने इन्वेस्टर्स को अलर्ट कर दिया है. इस इम्पॉर्टेंट समुद्री रास्ते से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल का व्यापार करता है. अगर यहां सैन्य कार्रवाई होती है, तो सप्लाई चेन पूरी तरह ठप हो सकती है, जिसका सीधा असर आपकी और हमारी जेब पर पड़ेगा.
इजरायल-लेबनान समझौते का क्या होगा असर?
मिडिल ईस्ट से एक और बड़ी खबर यह है कि इजरायल और लेबनान के बीच चल रहा सीजफायर अब तीन हफ्ते के लिए और बढ़ा दिया गया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि वह जल्द ही इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन की मेजबानी करेंगे. भले ही यह शांति की एक कोशिश है, लेकिन तेल बाजार अभी भी संशय में है. अमेरिका अब लेबनान की मदद करने और उसे हिजबुल्लाह से बचाने की बात कर रहा है. इन राजनीतिक दांव-पेंचों के बीच तेल की सप्लाई बाधित है, जिससे खाड़ी देशों से होने वाला एक्सपोर्ट प्रभावित हो रहा है और कीमतें नीचे आने का नाम नहीं ले रही हैं.
सोने की चमक क्यों हुई कम?
जहां एक तरफ तेल महंगा हो रहा है, वहीं सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है. न्यूयॉर्क के COMEX बाजार में सोना 4,705 डॉलर के लेवल पर ट्रेड कर रहा है. इसकी मुख्य वजह डॉलर की मजबूती है. दरअसल, जब अमेरिकी डॉलर (DXY) मजबूत होता है और उसकी डिमांड बढ़ती है, तो इन्वेस्टर्स सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों से पैसा निकालकर डॉलर में लगाने लगते हैं. साथ ही, ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की अनिश्चितता ने भी सोने पर दबाव बनाया है. फिलहाल ट्रेडर्स ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में हैं, क्योंकि मार्केट की दिशा पूरी तरह से मिडिल ईस्ट के हालातों पर टिकी है.
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By Soumya Shahdeo
सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.
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