रांची : निर्माण कार्यों की वजह से बढ़ता प्रदुषण, वायु गुणवत्ता हो रही है खराब

Updated at : 27 Nov 2023 2:34 PM (IST)
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रांची : निर्माण कार्यों की वजह से बढ़ता प्रदुषण, वायु गुणवत्ता हो रही है खराब

झारखंड सरकार के प्रदूषण बोर्ड के साथ काम कर रही संस्था सीड के प्रदूषण विशेषज्ञ मनीष कुमार का कहना है कि जाड़े के दिनों में प्रदूषण बढ़ जाता है. क्योंकि, इस समय हवा बहुत दूर तक नहीं जा पाती है. इस कारण वातावरण में कण जमा ही रहता है.

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राजधानी रांची के कई इलाकों की आबोहवा खराब हो रही है. जिन इलाकों में निर्माण कार्य हो रहा है, वहां की स्थिति ज्यादा खराब है. वायु प्रदूषण के कारण वहां की हवा स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है. आम तौर पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआइ) 100 के आसपास रहने से वातावरण को संतोषजनक माना जाता है. लेकिन, यहां कई स्थानों पर एक्यूआइ 200 के करीब पहुंच जा रहा है. कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण वायुमंडल में पीएम-2.5 तथा पीएम-10 की मात्र सामान्य से अधिक हो गयी है.

ढुमसाटोली-नयाटोली वाले इलाके ज्यादा प्रदूषित : कई वेबसाइट एयर क्वालिटी इंडेक्स का डाटा जारी करती है. प्रति घंटा से लेकर दिन भर का डाटा जारी किया जाता है. साइट से प्राप्त एक्यूआइ के अनुसार, राजधानी में सबसे अधिक प्रदूषण ढुमसाटोली, नयाटोली और कोकर वाले इलाके में है. कांके रोड वाले इलाके में कम प्रदूषण दिख रहा है. इन इलाकों में पीएम-10 (वातावरण में बड़े कण) की मात्रा अधिक हो जा रही है. कई तरह के निर्माण कार्य के कारण जाम भी लग जाता है. जाम में वाहनों की लंबी कतार लग जाती है. इससे वाहन से होनेवाले प्रदूषण की मात्रा बढ़ जाती है. वाहनों के धुएं से पीएम-2.5 (वातावरण में छोटे कण) का प्रदूषण ज्यादा होता है. शनिवार को ढुमसाटोली और नयाटोली में एक्यूआइ शाम के समय 155-170 तक पहुंच गया था. वहीं, रविवार को छुट्टी होने के कारण इन दोनों इलाकों का एक्यूआइ 100 के आसपास ही रहा. वहीं, कांके रोड वाले इलाके का एक्यूआइ रविवार को 70 तथा अन्य दिनों में 100 के आसपास रह रहा है.


क्या कहते हैं विशेषज्ञ

झारखंड सरकार के प्रदूषण बोर्ड के साथ काम कर रही संस्था सीड के प्रदूषण विशेषज्ञ मनीष कुमार का कहना है कि जाड़े के दिनों में प्रदूषण बढ़ जाता है. क्योंकि, इस समय हवा बहुत दूर तक नहीं जा पाती है. इस कारण वातावरण में कण जमा ही रहता है. जहां निर्माण कार्य हो रहा है, वहां अगर तय प्रावधानों का पालन नहीं होगा, तो पीएम-10 और पीएम-2.5 दोनों बढ़ेगा. निर्माण कार्य के डस्ट से पीएम-10 और जाम से पीएम 2.5 बढ़ेगा.

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