4 माह बाद रांची नगर निगम की बैठक, लेकिन मेयर आशा लकड़ा नदारद, 2 साल से लटक रहीं योजनाएं पारित

Published by : Sameer Oraon Updated At : 10 Feb 2023 9:07 AM

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रांची नगर निगम में दो वर्षों तक महाभारत होता रहा. तत्कालीन नगर आयुक्त मुकेश कुमार के कार्यकाल में इन योजनाओं पर काम हुआ था. वह बोर्ड की हर बैठक में प्रस्ताव लाते और मेयर उसे खारिज कर देती थीं.

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रांची, उत्तम महतो: चार माह बाद रांची नगर निगम बोर्ड की बैठक आठ फरवरी को हुई. इसमें मेयर आशा लकड़ा नहीं थीं. उनकी अनुपस्थिति में डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने बैठक की अध्यक्षता की. इस बैठक की खास बात यह रही कि पिछले दो वर्षों से लटक रहे 577 करोड़ की 298 योजनाएं पारित हो गयीं. यह वही योजनाएं थी, जो मेयर के विरोध के कारण बोर्ड में पास नहीं हो रही थी.

इन योजनाओं को लेकर नगर आयुक्त रहे मुकेश कुमार से उनकी कभी नहीं बनी. नगर निगम में दो वर्षों तक महाभारत होता रहा. तत्कालीन नगर आयुक्त मुकेश कुमार के कार्यकाल में इन योजनाओं पर काम हुआ था. वह बोर्ड की हर बैठक में प्रस्ताव लाते और मेयर उसे खारिज कर देती थीं. इस बार बोर्ड की बैठक में दृश्य बदला हुआ था. 577 करोड़ की योजनाएं फटाफट पास हो गयी.

काम कर चुके ठेकेदारों ने राहत की सांस ली. उक्त ठेकेदार पिछले दो वर्षों से मेयर व निगम का दरवाजा खटखटा रहे थे. आठ फरवरी को उनकी मुराद पूरी हुई. पहले बोर्ड की बैठक में शामिल नहीं होने पर मेयर तिथि बढ़ा देती थीं, इस बार उन्होंने अपनी अनुपस्थिति में डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय को अध्यक्षता करने का आदेश दिया.

दिल्ली तक मामले को लेकर गयी थीं मेयर :

तत्कालीन नगर आयुक्त मुकेश कुमार की शिकायत मेयर आशा लकड़ा ने केंद्रीय मंत्रियों तक से कर दी थी़ं उन्होंने नगर आयुक्त की शिकायत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से भी की थी.

अपनी शिकायत में मेयर ने कहा था कि आदिवासी महिला होने के कारण नगर आयुक्त हम पर उन योजनाओं को स्वीकृति देने का दबाव बना रहे हैं. इसे उन्होंने मनमाने तरीके से धरातल पर उतार दिया है. इन योजनाओं की स्वीकृति न तो निगम बोर्ड से ली गयी है, न ही इसकी चर्चा कभी की गयी है. इसके बाद भी अनावश्यक रूप से इन योजनाओं को स्वीकृति देने का दबाव बनाया जा रहा है. मेयर की इस शिकायत पर आयोग द्वारा राज्य के मुख्य सचिव व नगर विकास सचिव को इस मामले की जांच का आदेश दिया गया था. जिसकी जांच अब तक चल रही है.

15वें वित्त आयोग की राशि से हुआ है शहर में सारा काम

राजधानी के निगम क्षेत्र में 15वें वित्त आयोग की राशि से काम हुआ है़ इसमें शहर के प्रमुख सड़कों में पेवर-ब्लॉक बिछाने के अलावा, गली-मुहल्ले में विकास के कार्य हुए हैं. निगम क्षेत्र के सभी वार्ड में इस राशि से काम हुआ है. इसके अलावा शहर के सौंदर्यीकरण में पैसा लगाया गया है.

नगर निगम बोर्ड की बैठक बुधवार को हुई है. इसकी जानकारी है. बैठक में क्या हुआ है, इसकी जानकारी नहीं है. अभी मैं रांची से बाहर हूं. जब रांची वापस आऊंगी, तभी इस पर कुछ कह सकूंगी.

आशा लकड़ा, मेयर नगर निगम

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लेखक के बारे में

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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