संक्रमितों को बचाने में पूरी तरह सक्षम नहीं झारखंड को मिला पीएम केयर्स का वेंटिलेटर, इन चीजों की है कमी
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 20 May 2021 10:53 AM
राजधानी के क्रिटिकल केयर के विशषज्ञों का कहना है कि गंभीर संक्रमित (70 से 80 फीसदी खराब हो चुके फेफड़ा) में इंवेजिव वेंटिलेटर व नॉन इंवेजिव वेंटिलेटर ऑक्सीजन सेचुरेशन की स्थिति के हिसाब से पड़ती होती है, लेकिन इस वेंटिलेटर में उतनी क्षमता नहीं है कि मरीज को इसपर रख दिया जाये. पीएम केयर्स से मिला वेंटिलेटर 1.5 लाख से चार लाख रुपये तक का है.
Jharkhand PM Cares Ventilator Default रांची : झारखंड को ‘पीएम केयर्स’ से मिला अधिकांश वेंटिलेटर गंभीर संक्रमितों को बचाने में पूरी तरह सक्षम नहीं है. वेंटिलेटर में अत्याधुनिक सुविधाएं व विशेषताएं नहीं हैं, जिससे यह गंभीर संक्रमितों के लिए यह उपयोगी साबित नहीं हो रहा है. आइसीयू में गंभीर संक्रमितों को इलाज के लिए जब इस वेंटिलेटर का उपयोग किया जा रहा है, तो पता चलता है कि यह काम के लायक नहीं है.
राजधानी के क्रिटिकल केयर के विशषज्ञों का कहना है कि गंभीर संक्रमित (70 से 80 फीसदी खराब हो चुके फेफड़ा) में इंवेजिव वेंटिलेटर व नॉन इंवेजिव वेंटिलेटर ऑक्सीजन सेचुरेशन की स्थिति के हिसाब से पड़ती होती है, लेकिन इस वेंटिलेटर में उतनी क्षमता नहीं है कि मरीज को इसपर रख दिया जाये. पीएम केयर्स से मिला वेंटिलेटर 1.5 लाख से चार लाख रुपये तक का है.
वहीं एडवांस वेंटिलेटर 10 से 15 लाख रुपये में आता है, जिसमें सभी सुविधा रहती हैं. मरीज में जिस तकनीक का उपयोग करने की जरूरत होती है वह उसमें होता है. ऐसे में इस वेंटिलेटर का उपयोग करने से संक्रमित को धोखा देने के बराबर होगा.
सरकारी अस्पताल के एक विशेषज्ञ डॉक्टर ने बताया कि जब अस्पताल में मशीन की खरीद होती है, तो कंपनी के प्रतिनिधि मशीन को इंस्टॉल करते हैं. मशीन की सुविधा व विशेषताएं के बारे में सीनियर व जूनियर डॉक्टरों को अवगत कराते है. टेक्निशियन तक को प्रशिक्षित किया जाता है. इसके बाद मशीन का ड्राइ रन किया जाता है.
वेंटिलेटर में मरीजों को लंबे समय तक रखा जाता है, इसलिए ऐसे मशीन को एक सप्ताह तक चला कर छोड़ा जाता है. यह देखा जाता है कि मशीन बीच में तो काम करना बंद तो नहीं कर रहा है. इन सभी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही कंपनी को अस्पताल द्वारा एनओसी दिया जाता है. जबकि पीएम केयर से राज्य में दिये गये वेंटिलेटर के बारे में ऐसा कुछ नहीं हुआ. कंपनी मशीन देने के प्रतिनिधि पूछने तक नहीं आये.
कोरोना के गंभीर संक्रमितों में हमेशा इंवेजिव व नॉन इंवेजिव की सुविधा युक्त वेंटिलेटर की जरूरत होती है, लेेकिन कई कंपनियों द्वारा सामान्य वेंटिलेटर दिया गया है. यानी इसमें सामान्य सुविधा ही है. विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि इस वेंटिलेटर से सिर्फ ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा सकती है. मरीज का जीवन नहीं बचाया जा सकता है. यही कारण है कि गंभीर अवस्था के मरीज में यह सामान्य वेंटिलेटर बेकार है.
पीएम केयर्स फंड से मिला वेंटिलेटर 1.5 लाख से चार लाख रुपये तक का है. एडवांस वेंटिलेटर 10 से 15 लाख रुपये में आता है, जिसमें सभी सुविधा रहती हैं
प्रेशर नहीं बनने की समस्या
कुछ वेंटीलेटर में ट्यूबिंग नहीं है
ऑक्सीजन की टोटी नहीं है
कंप्रेशर में नहीं है
कई में नॉट बोल्ट नहीं है
पीएम केयर से आये वेंटिलेटर को किराया पर निजी अस्पतालों को उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन वहां भी यह कारगर साबित नहीं हो रहा है. हालांकि कोरोना काल में छाेटे निजी अस्पताल वेंटिलेटर की सुविधा होने की बात कह कर संक्रमितों को भर्ती कर लेते हैं. संक्रमित व उनके परिजन को जानकारी नहीं होती है, इसलिए वह कहीं शिकायत भी नहीं कर पाते हैं.
Posted By : Sameer Oraon
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