US का प्लान: खाड़ी देशों में तोड़-फोड़ का हर्जाना भरेगा ईरान, बांटी जाएगी फ्रीज की हुईं ईरानी संपत्तियां
Published by : Anant Narayan Shukla Updated At : 07 Jun 2026 10:50 AM
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों पर हमले किए थे.
US Iranian Assets Gulf Countries: अमेरिका ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों का उपयोग खाड़ी देशों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए करने पर विचार कर रहा है. ईरान के लगभग 24 बिलियन डॉलर के एसेट्स पश्चिमी देशों में हैं. ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष-विराम के बावजूद सैन्य तनाव जारी है. वहीं ताजा अपडेट के अनुसार पाकिस्तान अब भी मध्यस्थता की कोशिशों में जुटा हुआ है.
US Iranian Assets Gulf Countries: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत अभी दूर दिखाई दे रहे हैं. संघर्षविराम लागू होने के बावजूद दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां जारी हैं. इसी बीच एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ईरानी संपत्तियों का इस्तेमाल अपने खाड़ी सहयोगियों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए करने की संभावना पर विचार कर रहा है. अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट के इस प्लान से मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ सकता है, क्योंकि ईरान ने अपनी जब्त संपत्ति को डिफ्रीज करना, अमेरिका के साथ किसी भी संभावित डील का अहम मुद्दा बताया है.
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि प्रस्ताव के तहत; केवल पहले हुए नुकसान का मुआवजा ही नहीं, बल्कि भविष्य में संभावित हमलों से होने वाले नुकसान की भरपाई को भी इन्हीं फ्रीज ईरानी एसेट्स से करने की भी योजना बना रहा है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन ईरानी संपत्तियों को इस योजना में शामिल किया जा सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चर्चा केवल अमेरिका द्वारा फ्रीज की गई संपत्तियों तक सीमित नहीं दिखती.
किन ईरानी संपत्तियों पर है नजर?
सूत्र के अनुसार, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अधिकारियों को यह आकलन करने का निर्देश दिया है कि खाड़ी देशों में ईरान से जुड़े हमलों के कारण अब तक कितना नुकसान हुआ है. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या ईरानी संपत्तियों का उपयोग उन क्षतियों की भरपाई के लिए किया जा सकता है.
विश्लेषकों का मानना है कि अगर, ऐसा कदम उठाया जाता है तो वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पहले से चल रही कूटनीतिक वार्ताओं पर इसका असर पड़ सकता है. ईरान लंबे समय से विदेशों में रोकी गई अपनी लगभग 24 अरब डॉलर की संपत्तियों को मुक्त करने की मांग करता रहा है.
संघर्ष-विराम के बावजूद जारी हैं हमले
यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब संघर्ष-विराम लागू होने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई जारी है. बीते शनिवार तड़के अमेरिकी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित गोरुक और केश्म द्वीप पर ईरानी तटीय रडार प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक यह कार्रवाई उन ईरानी ड्रोन को रोकने के बाद की गई, जिन्हें समुद्री यातायात के लिए खतरा माना गया था.
इसके जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की दिशा में मिसाइलें दागीं. ईरान ने 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष से पहले ही कहा था कि अगर उसके ऊपर हमला हुआ, तो वह खाड़ी देशों में अमेरिकी हितों को निशाना बनाएगा. 8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर से पहले ईरान ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, जॉर्डन समेत अन्य खाड़ी देशों पर जवाबी हमला किया था.
पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका
सैन्य तनाव के बावजूद कूटनीतिक प्रयास जारी हैं. इस प्रक्रिया में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में उभरकर सामने आया है. पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को तेहरान पहुंचे. ईरानी मीडिया के अनुसार वह पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व की ओर से ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के लिए विशेष संदेश लेकर गए थे. वहीं, लेबनानी सेना प्रमुख जनरल रुडोल्फ हायकल पाकिस्तान सेना प्रमुख के निमंत्रण पर पाकिस्तान पहुंचे. ये दौरे ऐसे समय हुए हैं, जब दोनों पक्षों- ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की रफ्तार धीमी पड़ने की खबरें सामने आईं हैं.
ईरान की प्रमुख मांगें क्या हैं?
रिपोर्टों के अनुसार ईरान अब भी कई अहम मुद्दों पर रियायत चाहता है. इनमें विदेशों में रोकी गई संपत्तियों तक पहुंच, तेल निर्यात और बंदरगाहों पर लगे प्रतिबंधों में राहत तथा होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर अधिक प्रभाव शामिल हैं. ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा था कि अमेरिका द्वारा फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर की संपत्तियों की रिहाई, किसी भी संभावित शांति समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी.
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लेबनान मोर्चे पर भी जारी है हिंसा
तनाव केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं है. लेबनान में भी संघर्षविराम के बावजूद हिंसा जारी है. लेबनानी सेना के अनुसार दक्षिणी लेबनान में एक सैन्य वाहन पर हुए इजरायली हमले में सेना के तीन सदस्य मारे गए, जिनमें दो अधिकारी शामिल थे. लेबनान का मोर्चा भी अमेरिका-ईरान कूटनीति से जुड़ा है. तेहरान ने वॉशिंगटन के साथ वार्ता में प्रगति को इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्षविराम से जोड़ा है, जबकि इजरायल ने संकेत दिए हैं कि वह अपने सैन्य अभियान जारी रखेगा.
शांति समझौते की राह अब भी कठिन
मध्य पूर्व में जारी घटनाक्रम से ऐसा लग रहा है कि मौजूदा संघर्षविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलना आसान नहीं होगा. एक ओर सैन्य टकराव जारी है, तो दूसरी ओर संपत्तियों, प्रतिबंधों और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दों पर मतभेद अब भी बने हुए हैं.
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लेखक के बारे में
By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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