Ranchi News : दवाओं की निर्भरता घटाने में पहला कदम योग

Published by :MUNNA KUMAR SINGH
Published at :19 Jun 2025 12:37 AM (IST)
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Ranchi News : दवाओं की निर्भरता घटाने में पहला कदम योग

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और असंतुलित खानपान से लोग छोटी उम्र में ही डायबिटीज, हाइ ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं.

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कम उम्र में डायबिटीज, हाइ बीपी और हार्ट अटैक का बढ़ता खतरा

योग से दवाओं पर निर्भरता घटती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है

एलोपैथी डॉक्टर भी रोगियों को योग अपनाने की दे रहे सलाह

नियमित योग से अनिद्रा, तनाव, मोटापा और शुगर में राहत

यौगिक आहार से योग का प्रभाव और बढ़ता है

बच्चों को शुरू से ही योग से जोड़ने पर भविष्य में बीमारियों से सुरक्षा

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और असंतुलित खानपान से लोग छोटी उम्र में ही डायबिटीज, हाइ ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं. पहले जो बीमारियां उम्र बढ़ने के साथ होती थीं, अब 20-25 की उम्र में भी आम हो गयी हैं. ऐसे में योग एकमात्र ऐसा माध्यम है, जो न सिर्फ इन बीमारियों से बचाव करता है बल्कि दवाओं पर निर्भरता भी कम कर सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चों को शुरुआती उम्र से ही योग से जोड़ा जाये, तो उन्हें भविष्य में कई बीमारियों से बचाया जा सकता है. वहीं, दवा की निर्भरता को भी कम कर सकता है. बस इसे सही समय में अपनाने की जरूरत है.

पढ़िये मुख्य संवाददाता राजीव पांडेय की रिपोर्ट…

योग प्रशिक्षिका सह शोधार्थी अनिता कुमारी बताती हैं कि महर्षि पतंजलि ने अपने योग सूत्र में स्पष्ट किया है कि योग दवा से कहीं अधिक प्रभावशाली है. योग से व्यक्ति न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी स्वस्थ रहता है. यह मन और आत्मा को जोड़ने का माध्यम है, जिससे इंद्रियां नियंत्रित होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. नियमित अभ्यास करने पर थायराइड, शुगर, बीपी और एंग्जाइटी जैसी बीमारियों में मरीजों की दवाएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं.

योग से दीर्घायु हुए संत

योग को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने वालों में देवराहा बाबा और स्वामी शिवानंद जैसे महापुरुष प्रमुख उदाहरण हैं. कहा जाता है कि देवराहा बाबा का जीवनकाल 250 से लेकर 900 वर्ष तक बताया जाता है. वहीं, स्वामी शिवानंद ने 128 वर्ष की उम्र में बिना दवाओं के स्वस्थ जीवन जिया.

दर्जनों बीमारियों में असरदार

योग का नियमित अभ्यास नॉन-कम्यूनिकेबल डिजीज जैसे बीपी, डायबिटीज, थायराइड, अस्थमा, डिप्रेशन, बैक पेन, मोटापा, इनफर्टिलिटी, अनिद्रा और माइग्रेन जैसी बीमारियों में अत्यंत लाभकारी साबित हुआ है. साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी यह मजबूत बनाता है. इसके साथ-साथ योग के नियमित अभ्यास से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है.

योग के साथ यौगिक आहार भी जरूरी

योग के प्रभाव को बढ़ाने में यौगिक आहार की भी अहम भूमिका है. संतुलित और संयमित आहार मन और शरीर दोनों को स्वस्थ रखता है. इसमें ताजे फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज शामिल होते हैं, जो शरीर को आवश्यक पोषक तत्व देकर पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं. श्रीमद्भागवद गीता में भी यौगिक आहार को शुद्ध विचार और निर्मल जीवन के लिए आवश्यक बताया गया है. गीता में उल्लेख है जो व्यक्ति शरीर के साथ अपने विचार और भावना को शुद्ध, पवित्र निर्मल रखना चाहता है तो उसे यौगिक आहार को शामिल करना चाहिए.

महर्षि पतंजलि ने अष्टांग योग को दिया महत्व

यम (आचार-विचार)नियम (स्वअनुशासन)

आसन (शारीरिक मुद्रा)प्राणायाम (श्वास नियंत्रण)

प्रत्याहार (इंद्रिय संयम)धारणा (एकाग्रता)

ध्यान (मेडिटेशन)

समाधि (आत्म-साक्षात्कार)

एलोपैथी चिकित्सक भी दे रहे योग की सलाह

अब एलोपैथी डॉक्टर भी दवाओं के साथ योग को अपनाने की सलाह दे रहे हैं. सर्जन डॉ महेश स्वयं नियमित योग करते हैं और मरीजों को भी बीमारी के अनुसार आसन और प्राणायाम करने की सलाह देते हैं. उनके अनुसार, योग की कठिन क्रियाएं भी नियमित अभ्यास से सरल हो जाती हैं. सर्जन डॉ महेश काफी समय से योग करते हैं. योग की विभिन्न क्रिया जो योग से जुड़े लोगों के लिए कठिन है उसे डॉ महेश करते हैं. खुद पर फायदा होने के बाद मरीजों को सलाह देते हैं.

किन रोगों में कौन सा योग

रोग लाभकारी योगासन

तनाव, बेचैनी, अनिद्रा भ्रामरी, अनुलोम-विलोम, योगनिद्रापीठ दर्द, सर्वाइकल पेन भुजंगासन, मरकटासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन

मोटापा सूर्य नमस्कार, कपालभाति, मलासनइम्यूनिटी और थकान ताड़ासन, वृक्षासन, तितली आसन

डायबिटीज मंडूकासन, वज्रासन, अर्धमत्स्येन्द्रासनब्लड प्रेशर शवासन, ताड़ासन, उत्कटासन, शीतली प्राणायाम

थायराइड उज्जायी प्राणायाम, भुजंगासन, मत्स्यासन, हलासन

अनुभव से प्रमाणित

अनिद्रा से परेशान व्यक्ति को योग से मिला लाभ

राजधानी के एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत युवक को तनाव और अनिद्रा की समस्या थी. नियमित योग से उनकी दवाओं की खुराक कम हो गयी है. रात में मुश्किल से तीन से चार घंटे ही सो पाते थे. डॉक्टरों की दवा लेने से फायदा था, लेकिन वह दवा को छोड़ना चाहते थे, इसलिए योग प्रशिक्षक से मिलकर योग को अपनाया. करीब एक साल के नियमित अभ्यास के बाद आज दवाओं की खुराक कम हो गयी.

तनाव और डायबिटीज से पीड़ित महिला को मिली राहत

हिनू निवासी एक महिला को तनाव के कारण डायबिटीज हो गयी थी. योग से उनका शुगर नियंत्रित हुआ और अब डॉक्टर ने एक वक्त की ही दवा लेने की सलाह दी है. महिला योग से करीब दो साल से जुड़ी हुई है. इससे शुगर का स्तर नियंत्रित होने लगा. साथ ही पहले से स्वस्थ और बेहतर महसूस होने पर योग को दिनचर्या में शामिल कर लिया है.

प्री-डायबिटिक मरीजों के लिए योग का परामर्श

देश और झारखंड में प्री-डायबिटिक मरीज की संख्या तेजी से बढ़ी है. अचानक जांच कराने पर एचबी1एसी का स्तर 6.1 और 6.2 तक आता है. खाने के बाद का शुगर 170 से 180 रहता है. ऐसे मरीजों को दवा की बजाय योग और लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह दी जाती है. ऐसे लोगों को मरकटआसन, पवनमुक्तासन और कैट पोज की सलाह मिलती है. इससे मरीजों काे काफी राहत मिली है.

डॉ वीके ढाढ़निया, डायबिटीज विशेषज्ञ

श्रीकृष्ण का योग संदेश :

भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा कि योग मन, बुद्धि और आत्मा का संतुलन है, जो मनुष्य को दुःख-सुख में समभाव रखना सिखाता है और उसे कर्म में निपुण बनाता है.

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योग और विज्ञान एक-दूसरे के पूरक

योग भारत की प्राचीन परंपराओं में से एक है, जो आज विज्ञान की कसौटी पर भी खरा उतर रहा है. योग केवल आसनों का अभ्यास नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच समरसता स्थापित करने की एक वैज्ञानिक पद्धति है. आधुनिक अनुसंधानों से यह सिद्ध हुआ है कि योगाभ्यास तनाव को कम करता है, रक्तचाप को नियंत्रित करता है, नींद की गुणवत्ता बढ़ाता है और मानसिक स्पष्टता को सशक्त बनाता है. प्राणायाम से फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होती है. जबकि ध्यान मस्तिष्क में सकारात्मक न्यूरोकेमिकल्स की सक्रियता को बढ़ाता है. आज एमआरआइ, इसीजी और हार्ट-रेट वेरिएबिलिटी जैसे उपकरण यह प्रमाणित कर चुके हैं कि योग हमारे मस्तिष्क और शरीर पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डालता है. विज्ञान और योग अब परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक बन चुके हैं. चिकित्सा विज्ञान भी अब योग को एक सहायक चिकित्सा के रूप में मान्यता दे रहा है. विशेषतः मधुमेह, अवसाद, उच्च रक्तचाप और रीढ़ की समस्याओं में बेहतर साबित हुआ है. इसलिए, योग केवल परंपरा नहीं, आधुनिक वैज्ञानिक युग के लिए भी एक उपयोगी, प्रभावी और आवश्यक साधन है. आइए, योग को ज्ञान और विज्ञान दोनों के आलोक में अपनाएं.

डॉ अनुज कुमार

मैग्जिलो फेशियल सर्जन

चेयरपर्सन, पीआर कमेटी,

इंडियन योग असोसिएसन, झारखंड स्टेट चैप्टर.B

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